Rakhi (Hindi)

आने वाला है राखी का त्यौहार

तेरी उम्र हो बहुत ही लंबी
और सुरक्षित रहे मेरा भी संसार,
इसीलिए इस बार, 
नहीं गई मैं बाज़ार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
ना ही कोई रेशम का धागा, 
ना मैं लाई मिठाई,
नहीं आऊंगी इस बार तेरे घर,
पर मत करना भैया लड़ाई,
भाभी से बँधवा लेना धागा,
और याद करना मेरा प्यार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
सारा साल है फीका अपना,
नहीं मना कोई भी त्यौहार,
घर ही घर में कैद हुए सब,
बस बचा रहे हैं परिवार,
खर्चे बढ़ते, घटती कमाई,
पर नहीं शिकायत भाई,
बस ये वक्त जल्द निकल जाए,
ऐसी देती हूँ दुहाई,
फिर से लगे सावन की झड़ियाँ,
झूले-मेलों की आये बहार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
आने वाला है राखी का त्यौहार।



Hariyaali Teej (Hindi)

हाथों में रचाकर हरी-हरी मेहँदी,
कलाईयों में हरी चूड़ियाँ डालूँ,
हरी साड़ी लपेट बदन पे,
खुद को हरी धरती सा सजा लूँ,
सखियों संग झूमूं किसी बगीचे में,
साज-श्रृंगार की बातें बना लूँ,
मगर क्यूँ नहीं आज सही मायने में
मैं ये त्यौहार मना लूँ,
पार्लर की बजाय नर्सरी को जा
चंद नए पौधे लिवा लूँ,
हाथों को मेहँदी की जगह
गीली मिट्टी से सजा लूँ,
और खुद सँवरने से पहले
एक पौधे को सँवारने की जिम्मेदारी उठा लूँ,
हरे बगीचे में तो सब जाते हैं,
पर आज किसी सूखे स्थान को हरा-भरा बना लूँ,
और उस हरे पौधे की दुआ से ही आज,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ।



Hum Paudhe (Hindi)

खरपतवार की तरह उगे हुए थे
हम जंगल के पौधे,
मज़ा बड़ा था, बस डरते थे,
कोई हमें नहीं रौंदे,
उस खुले अल्हड़ बचपन को हटा
किसी ने सभ्यता सिखलाई,
हाँ, निखारा व्यक्तित्व को मेरे
और नई जमीन दिखलाई,
आज सभ्य हूँ, सही जगह हूँ,
देती आश्रय सबको,
पर वो मासूमियत-अल्हड़ता चली गई,
ढूंढ़ रही मैं जिसको,
पूर्णता तो कभी नहीं थी,
बस तब था अबोध मन प्यारा,
अब संकटों से झूझता सा जीवन,
जग कहता इसे अनुभव हमारा।



Coronatime Humor (Humor)

तब

पत्नी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतज़ार,  
हाथों में था पति के लिए एक उपहार,  
आते ही पति के हुई वर्षा सेंट की,  
और गले में डाला बाहों का हार,  
भीतर जाते ही दिया पानी,  
चलाई कूलर की ठंडी बयार,  
दिखा कर फेवरेट खाना पत्नी यूं चिल्लाई,  
जानू, बाद में लेना बदल कपड़े,  
पहले चखो घर की बनी रस मलाई।  

अब

पत्नी आज भी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतजार,  
हाथों में था पति के लिए सेनेटाइजर का उपहार,  
और दस कदम की दूरी बना वो चिल्लाई,  
कहीं किसी से की तो नहीं हाथ मिलाई,  
चलो अब बंद है तुम्हारा हवा, पानी,  
सबसे पहले नहा कर बहाओ कोरोना प्राणी,   
फिर अपने कपड़े आप ही धुल कर आना,  
तभी मिलेगा तुम्हें कोरोना टाइम में खाना।



Thank You God (Hindi)

धन्यवाद

जब जब मैंने खुद को सेवाकार्य में रत कुछ महान पाया,
धन्यवाद हे प्रभु! तुमने मुझसे महान सेवादार दिखलाया,
जब लगा तेरी भक्ति में लीन मैं कोई साधवी हो गई,
तो धन्यवाद प्रभु! पुनः मोह में फँसा, मेरा भ्रम हटाया,
जब लगा कुछ नया खोज पाई इस जगत में,
धन्यवाद प्रभु! तुमने पहले किये गए शोध को पढ़वाया,
जब लगा संसार में सबसे अनोखी प्राणी हूँ मैं,
तो तुमने मुझसे अनोखे प्राणियों से मिलवाया
और तो और जब सबसे दुःखी होने का आभास हुआ,
तो धन्यवाद कि तुमने तभी मुझसे ज्यादा पीड़ित दिखलाया,
धन्यवाद कि मैंने सदा अकेले चलना चाहा
और तुम किसी न किसी रूप में मेरे साथ चलते रहे,
मुझे लगा कि मुझे कोई नहीं सुन रहा,
पर तुम हमेशा मुझे सुनते रहे,
हर बाधा से निकाला, हर परीक्षा में सफल कराया,
कभी दिया सबक और कभी बिखरा दी अपनी माया,
धन्यवाद हे प्रभु! मुझे एक बहुत ही आम सा खास जीवन देने के लिए
और धन्यवाद मेरा ये धन्यवाद सुन लेने के लिए।



Ganpati Atharvsheersham (Audio + Hindi)



श्री गणपति अथर्वशीर्षम्

हरिः ॐ ॥

नमस्ते गणपतये। समस्त जीवों(योनि/जाति) के स्वामी को नमस्कार है।
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि। केवल आप ही वो प्रत्यक्ष सूक्ष्मतम तत्व हैं जो परोक्ष चैतन्य (आत्मा) को आवरण दे, प्रत्यक्ष बनाता है।
त्वमेव केवलं कर्तासि। आप ही समस्त सृष्टि की उत्पत्ति के कारण स्वरूप हैं।
त्वमेव केवलं धर्तासि। आप ही केवल समस्त सृष्टि को धारण (पालन) करते हैं।
त्वमेव केवलं हर्तासि। आप ही केवल सृष्टि का हरण (अंत / संहारकर्ता) करते हैं।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि। आप ही सत्य स्वरुप सम्पूर्ण ब्रह्म (एक निर्विशेष, सर्वव्यापी, स्वप्रकाश, नित्य, स्वयं सिद्ध चेतन तत्त्व) हैं।
त्वं साक्षादात्मासि नित्यम्। आप ही साक्षात् नित्यात्मा (समस्त सृष्टि की निरंतर चेतना) हैं।
(इस प्रकार यह आपका ब्रह्म अद्वैत स्वरूप है।)

ऋतं वच्मि। उचित कहती हूँ (दैवीय वास्तविकता बतलाती हूँ)।
सत्यं वच्मि। सत्य कहती हूँ (सार्वभौमिक सत्य कहती हूँ)।
कि सम्पूर्ण सृष्टि में प्रत्येक प्राणी और दृश्य तथा अदृश्य में निहित ऊर्जा और चेतना का एक ही स्रोत हैं, जो गणेश जी (ईश्वर) आप हैं।

अव त्वं माम्। आप मेरी (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव वक्तारम्। इस स्तोत्र के (इस अनुभूति को बताने वाले) वक्ता की रक्षा कीजिये।
अव श्रोतारम्। इस स्तोत्र के (इस अनुभूति को सुनने वाले) श्रोता की रक्षा कीजिये।
अव दातारम्। इस स्तोत्र के ज्ञान के दाताओं (इस अनुभूति के ज्ञान को अग्रेषित करने वाले) की रक्षा कीजिए।
अव धातारम्। इस स्तोत्र को स्मरण करने वालों (इस अनुभूति के ज्ञान को स्मृति में जीवित रखने वाले) की रक्षा कीजिए।
अवानूचानमव शिष्यम्। इस स्तोत्र को दोहराने वाले शिष्यों की रक्षा कीजिए।
अव पश्चात्तात्। हे गणेश जी! आप पीछे से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव पुरस्तात्। आगे से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव चोत्तरात्तात्। उत्तर की ओर से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव दक्षिणात्तात्। दक्षिण की ओर से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव चोर्ध्वात्तात्। उर्ध्व भाग से1



Go Get Goa

Goa - A place of juvenility, enjoyment and happiness... A place for the youngsters and couples with enjoyment for entire day and night... A place which rocks on waves in the day time and in the casinos and cruise at night. It is a true saying that sometimes path is more interesting than the destination. Moreover companions in any journey are very important. Like-minded people with full mood of enjoyment and a destination like Goa... what else is needed to thrill and chill your daily ro...


Vipassana Dhamma Thali Jaipur Review

'Sadhana' means 'To attain some goal, keeping yourself focused, calm and determinant onto it; only by keeping mind away from any type of distractions.' 'Samadhi' means 'To keep your body in a particular straight posture and become a viewer of sensations on body parts without reacting on them.' 'Prajna/Pragya' means 'To receive the knowledge about truths... the truths which you can observe and feel within you and around you.' And this is the context behind 'Vipassana'. Vipassana Meditatio...


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Feelings

Thank You God (Hindi)

धन्यवाद

जब जब मैंने खुद को सेवाकार्य में रत कुछ महान पाया,
धन्यवाद हे प्रभु! तुमने मुझसे महान सेवादार दिखलाया,
जब लगा तेरी भक्ति में लीन मैं कोई साधवी हो गई,
तो धन्यवाद प्रभु! पुनः मोह में फँसा, मेरा भ्रम हटाया,
जब लगा कुछ नया खोज पाई इस जगत में,
धन्यवाद प्रभु! तुमने पहले किये गए शोध को पढ़वाया,
जब लगा संसार में सबसे अनोखी प्राणी हूँ मैं,
तो तुमने मुझसे अनोखे प्राणियों से मिलवाया
और तो और जब सबसे दुःखी होने का आभास हुआ,
तो धन्यवाद कि तुमने तभी मुझसे ज्यादा पीड़ित दिखलाया,
धन्यवाद कि मैंने सदा अकेले चलना चाहा
और तुम किसी न किसी रूप में मेरे साथ चलते रहे,
मुझे लगा कि मुझे कोई नहीं सुन रहा,
पर तुम हमेशा मुझे सुनते रहे,
हर बाधा से निकाला, हर परीक्षा में सफल कराया,
कभी दिया सबक और कभी बिखरा दी अपनी माया,
धन्यवाद हे प्रभु! मुझे एक बहुत ही आम सा खास जीवन देने के लिए
और धन्यवाद मेरा ये धन्यवाद सुन लेने के लिए।



Coronatime Humor (Humor)

तब

पत्नी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतज़ार,  
हाथों में था पति के लिए एक उपहार,  
आते ही पति के हुई वर्षा सेंट की,  
और गले में डाला बाहों का हार,  
भीतर जाते ही दिया पानी,  
चलाई कूलर की ठंडी बयार,  
दिखा कर फेवरेट खाना पत्नी यूं चिल्लाई,  
जानू, बाद में लेना बदल कपड़े,  
पहले चखो घर की बनी रस मलाई।  

अब

पत्नी आज भी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतजार,  
हाथों में था पति के लिए सेनेटाइजर का उपहार,  
और दस कदम की दूरी बना वो चिल्लाई,  
कहीं किसी से की तो नहीं हाथ मिलाई,  
चलो अब बंद है तुम्हारा हवा, पानी,  
सबसे पहले नहा कर बहाओ कोरोना प्राणी,   
फिर अपने कपड़े आप ही धुल कर आना,  
तभी मिलेगा तुम्हें कोरोना टाइम में खाना।



Atal :: Expressions of Heart (Hindi)

बालपन से तरुणाई,
और तरुणाई से जवानी,
हर कदम पिछले से आगे,
यादगार और मुश्किल,
फिर घिरी हूँ संघर्षों में,
पहले से और सघन हैं ये बादल,
पर यकीन है बरसेगा सावन,
यकीन होता जा रहा है,
खुद पर और ईश्वर पर,
वो न हारेगा, न हारने देगा,
संघर्ष मेरी नीयती है,
और उससे बाहर लाना,
ईश्वर का फैसला,
और मैं मेरे संघर्ष पर और ईश्वर अपने फैसले पर,
अटल हैं और रहेंगे।



Jai Ganesh (Hindi)

हे देव तेरे... नाम हज़ार,
पूजन कर कृपा पाऊँ मैं अपार,
विशालकाय तू, महाकाय तू,
मंगलमूर्ति रूप तेरा,
सहस्त्र कोटि सूर्य प्रभा समान,
तेजोमय है स्वरुप तेरा,
धूम्रवर्ण तू, चारुकर्ण तू,
गज समान है आनन तेरा,
सुन्दर मुख है, कपिल वर्ण है,
वक्री सुण्ड और गज के कर्ण हैं,
उदर विशाल, नेत्र हैं पिंगल,
हस्त मुद्रा करती सब मंगल,
शिव के लाल, गौरी के दुलारे,
अग्रपूज्य तुम देव हमारे,
भाद्र शुक्ल चौथ को तुम आये,
मोदक प्रिय तेरा नाम कहाये,
प्रसन्नचित्त, चिंता से मुक्त तुम,
सभी विशिष्ट गुणों से युक्त तुम,
ललाट चंद्र तुम धारण करते,
चंद्र देव के अवगुण हरते,
राक्षस मूषक है वाहन तुम्हारा,
चरण धूरि से उसको संवारा,
तेरे बुद्धि कला कौशल से,
सारे जग में हुआ उजारा,
ऐसा क्या जो सुलझ न पाए,
कौन शत्रु तुझे रण में हराये,
सबके बिगड़े काम बना दे,
मनवांछित वर सबको दिला दे,
रिद्धि-सिद्धि के तुम हो स्वामी,
बुद्धिमान तुम, अन्तर्यामी,
शुभ और लाभ हैं, सुत ये तुम्हारे,
कृपा दृष्टि ने संकट तारे,
विघ्नविनाशक, मंगलमूर्ति,
ध्यान मात्र से हो इच्छापूर्ति,
विशिष्ट नायक, गणनायक, गणपति,
विघ्नराज, पशुपालक, अधिपति,
तेरी कृपा जो होये गणेश जी,
मिट जाएँ जीवन में कलेस जी,
आओ आओ गणपति-गणनायक,
मेरे बिगड़े काज बनाओ,
अपने बुद्धि-कौशल से प्रभुजी,
मेरी नैया पार लगाओ,
शत्रु ने घेरा है, है चिंताओं का डेरा,
उनका विनाश कर, हमको बचाओ,
राक्षस रूप चंचल मन है मेरा,
धरि अपने पग करो बुद्धि का उजेरा,
आओ पधारो विनायक-विघ्नहर्ता,
आओ विराजो सर्व मंगल करता,
जय जय गनेस सर्व दुःख हर्ता
जय जय गणेश सर्व सुख करता।



Maine Chod Diya... (I left...) (Hindi)

मैंने छोड़ दिया पतंगों को लपकना,
कि चंद लड़के पतंगों से ज्यादा मेरी छलांगों को देखने लगे थे,
मैंने छोड़ दिया खुलकर खिलखिलाना,
कि चंद होठ उसे देख अजीब सी शक्लें बनाने लगे थे,
मैंने छोड़ दिया छत पर गाने गुनगुनाना,
कि पड़ोस के लड़के बिन चाहे करने लगे थे तारीफ़ उसकी,
मैंने छोड़ दिया नज़रें मिलाना,
कि समझना ही नहीं चाहती थी मैं उनकी नापाक शक्लें,
मैंने छोड़ दिया बिना चुन्नी के सड़क पर जाना,
कि चंद घूरती निगाहें अजीब लगती थीं मुझको।

क्यों कल तक जो कर कर ख़ुशी मिलती थी मुझे,
आज वो हरकतें करते हुए, मैं देखती हूँ चारों तरफ,
क्यों आज अपनी खुशी से पहले डर जाती हूँ,
कि कोई आँखें देख न लें मुझे यूँ खुशियाँ मनाते,
पता नहीं वो कौनसा अनजाना साया डराता है,
वो कौन है जिससे छुपती फिर रही हूँ मैं,
चंद अखबार की ख़बरें हैं या परिवार की नसीहतें,
जो डरा देती हैं मुझे रोज़ाना,
वो जो भी हैं... पर अब इतना तो मैं समझती हूँ,
कि मेरा अपना देश मेरे लिए सुरक्षित नहीं है।

यहाँ न्याय की देवी के घर में अंधेर भले ही न हो,
पर देर अवश्य है...
गुनहगारों के मन में डर नहीं,
पर बच जाने का यकीन है।
नेता को नेतागिरी से और बलवान को दादागिरी से,
फ़ुरसत ही नहीं...
और सफेदपोशों के काले हाथ अंधों को दिखते ही नहीं।
वैसे किसी को यहाँ किसी दूसरे के फटे में हाथ नहीं देना,
लेकिन आँख, कान और मुँह वहीं घुसाए रखने हैं।
धृष्ट से लेकर भ्रष्ट तक सब मौसी के लड़के हैं,
और बिना अपने उल्लू को सीधा किये कोई लाचार का सगा नहीं है।

अपनी जाति को रोज़ अखबारों में लाचारी से मरते-घुटते देख,
तिल-तिल कर जो मैं मरती-डरती जाती हूँ,
ये जो हवा खराब हो गई है मेरे देश की,
उसमें जब मैं सांस1



Janak Ki Vyatha... (Hindi)

ये धरती पुरुषविहीन हुई, हे जानकी!
क्या रहना पड़ेगा जनक के घर में तुम्हें सदा?
कभी सोचा न था,
मेरी प्रतिज्ञा ही बाधक बनेगी,
तेरे कन्यादान में, मेरी प्रिये!

हे सीते! देखी है तुझमें दुर्गा की मूरत मैंने,
कैसे दे दूँ किसी कायर के हाथ में तुझको।
जिस धनुष को एक हाथ में उठा,
बचपन से तरुणाई तक खेली है तू तेरी सखियों संग,
उसी धनुष को हिलाने मात्र में भी असमर्थ है आज ये नृपजन।

हे वैदेही! देखी है तुझमें लक्ष्मी सी चपलता सदा,
कैसे दे दूँ किसी पुरुष-पुरातन के हाथों में तुझको।
आये हैं नरेश विश्व के हर छोर से,
किन्तु पाना चाहते हैं सब तुझे हाथों के ज़ोर से।

वो पुरुष ही क्या जो दुर्बल को दबाये,
बलशाली तो हिंसक पशु भी होते हैं।
वो बुद्धि ही क्या जो दूसरों को सताये,
अविवेकी पूत पर तो सदा ही कुल रोते हैं।

हे पुत्री! तू माँ गौरी सी सीधी,
कैसे सौंपूं तुझे किसी बली-हठी को,
जो तेरे इस स्त्री रूप से परे धवल मन को,
न देखना चाहता है और न सुनना।

हे विशालाक्षी! सरस्वती सी तेज है तेरी बुद्धि,
कैसे; कैसे दे दूँ तुझे किसी ऐसे दुर्बुद्धि को,
जो उसके उपयोग के स्थान पर, उसे दबाये,
स्वयं अहंकार के मद में।

इसीलिए हे जानकी! धनुष विखंडन की ये शर्त रखी थी मैंने,
बिना विवेक, सदविचार और आशीष के, केवल बाहुबल से,
इस धनुष को हिलाना भी असंभव है जानकी।
किन्तु ये न पता था कि अब पुरुष रहे ही नहीं इस धरा पर।

जिस धरती ने तुझ जैसी सुशील कन्या को जना,
उसकी गोद में एक भी सुकुमार न हुआ...
हे सुहासिनी! तो क्या जीवन भर अब हंसी भूलकर,
संभालनी पड़ेगी सत्ता तुझे?
नहीं-नहीं मैं इतना निष्ठुर पिता नहीं,
जो छीन ले तेरी खुशियां तुझसे।

हे कान्ता! छोड़ दे तू मेरे प्रण को...
जिसे वरना चाहे वर1



Jara Si Baat... (Hindi)

ज़रा सी बात थी और...
मैंने मन में सोच सोच उलझा लिया
मैं चाहती थी कि तुम सुलझाओ,
पर सच में उलझन कहाँ है,
ये क्या जान पाते तुम,
पर तुम्हारी चाहते हुए भी,
ना कि गई कोशिश से,
मेरे ग़ुस्से ने जो उस पर ताला लगाया,
उसने मुझे अब बहुत दूर ला दिया,
ज़रा सी ही तो बात थी...

मैं जानती हूँ,
तुम ग़लत नहीं, अनजान थे,
और मैं परेशान,
बस बिन कहे क्यूँ नहीं समझ पाए तुम?
ज़रा सी ही तो बात थी...

अब चाहती हूँ,
जो हुआ उसे भुला आगे बढ़ जाना,
पर क्या तुम आज भी दोगे मेरा साथ?
फिर उलझ रही हूँ अपने सवालों में,
अपने ही मन में,
क्यूँ नहीं ख़ुद से खोल देती,
मेरे मन की गाँठें,
क्यूँ नहीं तुम्हें बोल देती,
जो मेरा मन चाहे,
आख़िर ज़रा सी ही तो बात थी...



Patthar :: The Stone (Hindi-Humor)

एक दिन रास्ते में मेरा पैर किसी चीज से टकराया और मैं ठिठक कर रुक गया,
झुक कर देखा, तो कुछ ख़ास ना था, यह था एक पत्थर...
एक निर्मम, निर्जीव, निरीह पत्थर।

उस पत्थर की हिम्मत पर मुझे आश्चर्य हुआ और रोष भी,
एक अदना सा पत्थर और इंसान से टकराने का साहस...
पर वो चुप था, कुछ ना बोला, क्योंकि वो था एक पत्थर...
एक निर्मम, निर्जीव, निरीह पत्थर।

मेरे इस विचार-मंथन के बीच, कुछ लोग आये,
उसे उठाया और एक कार के शीशे पे दे मारा,
फिर पुलिस आई, दो को धरा, चार को साथ ले गई,
पर अभी भी, मेरी आँखों के सामने, पास की मिट्टी में, पड़ा था, वही एक पत्थर...
एक निर्मम, निर्जीव, निरीह पत्थर।

तभी एक ढोंगी आया, साधु-वेश बना, उसने उसी पत्थर को उठाया,
फिर नल के जल से पवित्र कर, उसे फूलों का हार पहनाया,
भीड़ जुटी, आरती हुई और ढेर सा चढ़ावा उस पत्थर ने पाया,
चढ़ावा समेट साधु के जाने के बाद,
मेरे सामने, फूलों का हार पहने, पड़ा था, वही एक पत्थर...
एक निर्मम, निर्जीव, निरीह पत्थर।

अब उस पत्थर का महात्मय समझ आने लगा था,
जिसे जाना था तुच्छ, उसी को मैं सिर नवाने लगा था,
फिर पास जाकर उसके, शुरू की मैंने मेरी प्रार्थना -

हे पत्थर देवता! आप भाग्य-विधाता,
कहीं विध्वंस का कारण, कहीं सृष्टि निर्माता,
किसी को देते दंड, किसी को देते दाना,
विधना की सृष्टि का, तुम ही बुनते ताना-बाना,
तुम्हारे बिना विधाता का नहीं कोई आकार,
तुमने ही उसे बनाया, सगुण और साकार।

हे पत्थर देवता! आपके प्रति दुर्भावना के लिए, मैं क्षमाप्रार्थी हूँ,
अपने घर के गल्ले पर, सदा करता आपकी ही आरती हूँ,
अभी एक छोटा कवि हूँ, मुझे आप महान बनाना,
इसीलिये चढ़ा रहा हूँ ये, ग्यारह रूपये और चार आना।

ऐसा कहकर मन में श्रद्धा भाव लिए, मैं1



After Corona (Hindi)



कोरोना संकटकाल के दृष्टा

आज पूरा विश्व एक बहुत बड़े संकटकाल से गुजर रहा है। सभी देशों की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह से प्रभावित हो चुकी हैं। प्रत्येक इंसान अंदर से भविष्य को लेकर डरा हुआ है। एक बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है। आज इस संकट से न केवल वर्तमान सोच बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों की सोच भी प्रभावित होगी।

ये बहुत ही शांति की बात है कि भारत के लोग स्वयंमेव सेवाभावी हैं, ईश्वर का भजन करते हैं और आज के इस संकटकाल में नरेंद्र मोदी जी जैसे उन्नत नेता के संरक्षण में हैं। मोदी जी ने सही समय पर सही निर्णय लेकर देश को आने वाले एक बहुत बड़े संकट से बाल बाल बचाया है और वैश्विक स्तर पर उदाहरण पेश किया है। लेकिन कोई भी नेता जन सहयोग के बिना अधूरा होता है। आज सभी उनके फैसले के साथ खड़े हैं और घरों में हैं। आम जन और अनेक धनिक धन से तो अनेक तन से सेवा कार्यों को पूरा कर, अपना कर्तव्य अपनी जान की परवाह किये बिना निभा कर, अपने देश के गरीब और पीड़ित वर्ग की सहायता कर रहे हैं और मन से तो सभी मोदी जी की इस लड़ाई में उनके और उनके फैसलों के साथ खड़े ही हैं। अब बात इस पर विचार करने की है कि आगे क्या होना चाहिए और हमें हमारे देश के लिए, इस संसार के लिए क्या करना चाहिए।

अपनी भाषा, अपना धर्म, अपना देश, अपने लोग

हमें बताते हुए हर्ष होता है कि जापान के लोग कर्मठ होते हैं और अपने देश को सबसे ऊपर रखते हैं, कि फ्रांस के लोग ईमानदार होते हैं... ये सब क्या है? ये किसी देश के नेता की नहीं, उस देश के लोगों की तारीफ है जो उन्होंने अच्छे व्यवहार से देश के लिए संग्रहित की है और1



Deshprem (Hindi)

बहुत से तरीक़े हैं देशप्रेम दिखाने के,
ज़रूरी नहीं कि मैं बम से पाकिस्तान ही गिराऊँ।

किसी बच्चे को पढ़ाकर,
किसी पेड़ को बड़ा कर,
नशे की लत को छुड़ाकर,
किसी बिगड़े को बचा कर,

नदियों को निर्मल कर,
फसलों को सिंचित कर,
नाले को राह दिखा कर,
कचरा ना फैला कर,

गायों को पालकर,
गरीबों को दान कर,
मंदिर में सेवा कर,
सब लोगों का मान कर,

आपस में सुलह कर,
गाली-गलौंच हटा कर,
विज्ञान की बातें कर,
ज्ञान की गंगा बहा कर,

रिश्वत से दूर रहकर,
कुरीतियों को रुकवा कर,
नियमों का पालन कर,
प्रदूषण ना फैला कर,

सड़क पर ना थूककर,
होटल से सामान ना चुराकर,
धरोहरों पर नाम ना लिख कर,
ट्रेन की सीटों को ना फाड़कर,

अनेकों तरीक़े हैं, जिनसे मैं बचा सकती हूँ,
मेरे देश और मेरे देश के मान को।

ये मेरे देश की धरती है,
ये मेरी भारत माता हैं,
इनको प्रसन्न रखना मेरे मन को भाता है।
जैसा मेरा स्वभाव बना,
उससे ही कुछ रच जाऊँगी,
वो मेरी भारत माता हैं,
ऐसे ही उन्हें मनाऊँगी।



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Travels

Coonoor - Gateway to Serenity

Ok guys so let me tell you about a wonderful and off the beaten track; place around 60 kms ahead of Ooty, the quaint and peaceful town with lush green tea estates — Coonoor.I was at my friend's place in Bengaluru and from there we were on a road trip to Mysore. We started at 5:30 in the morning. In midway we decided to go to Ooty and cover Mysore in our way back. But as destinations are already decided, we can only choose paths. So on our way, suddenly one of my friend called up and sugges...


Manali Memories - Part (1)

Manali in Different Seasons If there is any heaven on earth... It is here... It is here... It is here. No idea about Kashmir yet, but enchanting beauty of Manali attracts tourists all around the world. It has a totally different and new look in every season. In January it is totally white and snowfall is there. In July-August water and waterfalls everywhere, but yes that season is dangerous and slippery too. In this season you may face some landslides as well. So September to Dec...


Go Get Goa

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Ashram Memories

Today I am telling you about a totally different destination for vacation, for knowledge gain, for knowing our culture as well as staying in a calm and natural environment. A destination where your kids will play freely and you can meditate there without children's worry. A destination where you will find members of different age groups, kids, youths, elders, old-age people, all. And everybody would be talking about development of nation, about technology, about linking spirituality with techn...


Vipassana Dhamma Thali Jaipur Review

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