Rakhi (Hindi)

आने वाला है राखी का त्यौहार

तेरी उम्र हो बहुत ही लंबी
और सुरक्षित रहे मेरा भी संसार,
इसीलिए इस बार, 
नहीं गई मैं बाज़ार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
ना ही कोई रेशम का धागा, 
ना मैं लाई मिठाई,
नहीं आऊंगी इस बार तेरे घर,
पर मत करना भैया लड़ाई,
भाभी से बँधवा लेना धागा,
और याद करना मेरा प्यार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
सारा साल है फीका अपना,
नहीं मना कोई भी त्यौहार,
घर ही घर में कैद हुए सब,
बस बचा रहे हैं परिवार,
खर्चे बढ़ते, घटती कमाई,
पर नहीं शिकायत भाई,
बस ये वक्त जल्द निकल जाए,
ऐसी देती हूँ दुहाई,
फिर से लगे सावन की झड़ियाँ,
झूले-मेलों की आये बहार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
आने वाला है राखी का त्यौहार।



Hariyaali Teej (Hindi)

हाथों में रचाकर हरी-हरी मेहँदी,
कलाईयों में हरी चूड़ियाँ डालूँ,
हरी साड़ी लपेट बदन पे,
खुद को हरी धरती सा सजा लूँ,
सखियों संग झूमूं किसी बगीचे में,
साज-श्रृंगार की बातें बना लूँ,
मगर क्यूँ नहीं आज सही मायने में
मैं ये त्यौहार मना लूँ,
पार्लर की बजाय नर्सरी को जा
चंद नए पौधे लिवा लूँ,
हाथों को मेहँदी की जगह
गीली मिट्टी से सजा लूँ,
और खुद सँवरने से पहले
एक पौधे को सँवारने की जिम्मेदारी उठा लूँ,
हरे बगीचे में तो सब जाते हैं,
पर आज किसी सूखे स्थान को हरा-भरा बना लूँ,
और उस हरे पौधे की दुआ से ही आज,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ।



Hum Paudhe (Hindi)

खरपतवार की तरह उगे हुए थे
हम जंगल के पौधे,
मज़ा बड़ा था, बस डरते थे,
कोई हमें नहीं रौंदे,
उस खुले अल्हड़ बचपन को हटा
किसी ने सभ्यता सिखलाई,
हाँ, निखारा व्यक्तित्व को मेरे
और नई जमीन दिखलाई,
आज सभ्य हूँ, सही जगह हूँ,
देती आश्रय सबको,
पर वो मासूमियत-अल्हड़ता चली गई,
ढूंढ़ रही मैं जिसको,
पूर्णता तो कभी नहीं थी,
बस तब था अबोध मन प्यारा,
अब संकटों से झूझता सा जीवन,
जग कहता इसे अनुभव हमारा।



Coronatime Humor (Humor)

तब

पत्नी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतज़ार,  
हाथों में था पति के लिए एक उपहार,  
आते ही पति के हुई वर्षा सेंट की,  
और गले में डाला बाहों का हार,  
भीतर जाते ही दिया पानी,  
चलाई कूलर की ठंडी बयार,  
दिखा कर फेवरेट खाना पत्नी यूं चिल्लाई,  
जानू, बाद में लेना बदल कपड़े,  
पहले चखो घर की बनी रस मलाई।  

अब

पत्नी आज भी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतजार,  
हाथों में था पति के लिए सेनेटाइजर का उपहार,  
और दस कदम की दूरी बना वो चिल्लाई,  
कहीं किसी से की तो नहीं हाथ मिलाई,  
चलो अब बंद है तुम्हारा हवा, पानी,  
सबसे पहले नहा कर बहाओ कोरोना प्राणी,   
फिर अपने कपड़े आप ही धुल कर आना,  
तभी मिलेगा तुम्हें कोरोना टाइम में खाना।



Thank You God (Hindi)

धन्यवाद

जब जब मैंने खुद को सेवाकार्य में रत कुछ महान पाया,
धन्यवाद हे प्रभु! तुमने मुझसे महान सेवादार दिखलाया,
जब लगा तेरी भक्ति में लीन मैं कोई साधवी हो गई,
तो धन्यवाद प्रभु! पुनः मोह में फँसा, मेरा भ्रम हटाया,
जब लगा कुछ नया खोज पाई इस जगत में,
धन्यवाद प्रभु! तुमने पहले किये गए शोध को पढ़वाया,
जब लगा संसार में सबसे अनोखी प्राणी हूँ मैं,
तो तुमने मुझसे अनोखे प्राणियों से मिलवाया
और तो और जब सबसे दुःखी होने का आभास हुआ,
तो धन्यवाद कि तुमने तभी मुझसे ज्यादा पीड़ित दिखलाया,
धन्यवाद कि मैंने सदा अकेले चलना चाहा
और तुम किसी न किसी रूप में मेरे साथ चलते रहे,
मुझे लगा कि मुझे कोई नहीं सुन रहा,
पर तुम हमेशा मुझे सुनते रहे,
हर बाधा से निकाला, हर परीक्षा में सफल कराया,
कभी दिया सबक और कभी बिखरा दी अपनी माया,
धन्यवाद हे प्रभु! मुझे एक बहुत ही आम सा खास जीवन देने के लिए
और धन्यवाद मेरा ये धन्यवाद सुन लेने के लिए।



Ganpati Atharvsheersham (Audio + Hindi)



श्री गणपति अथर्वशीर्षम्

हरिः ॐ ॥

नमस्ते गणपतये। समस्त जीवों(योनि/जाति) के स्वामी को नमस्कार है।
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि। केवल आप ही वो प्रत्यक्ष सूक्ष्मतम तत्व हैं जो परोक्ष चैतन्य (आत्मा) को आवरण दे, प्रत्यक्ष बनाता है।
त्वमेव केवलं कर्तासि। आप ही समस्त सृष्टि की उत्पत्ति के कारण स्वरूप हैं।
त्वमेव केवलं धर्तासि। आप ही केवल समस्त सृष्टि को धारण (पालन) करते हैं।
त्वमेव केवलं हर्तासि। आप ही केवल सृष्टि का हरण (अंत / संहारकर्ता) करते हैं।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि। आप ही सत्य स्वरुप सम्पूर्ण ब्रह्म (एक निर्विशेष, सर्वव्यापी, स्वप्रकाश, नित्य, स्वयं सिद्ध चेतन तत्त्व) हैं।
त्वं साक्षादात्मासि नित्यम्। आप ही साक्षात् नित्यात्मा (समस्त सृष्टि की निरंतर चेतना) हैं।
(इस प्रकार यह आपका ब्रह्म अद्वैत स्वरूप है।)

ऋतं वच्मि। उचित कहती हूँ (दैवीय वास्तविकता बतलाती हूँ)।
सत्यं वच्मि। सत्य कहती हूँ (सार्वभौमिक सत्य कहती हूँ)।
कि सम्पूर्ण सृष्टि में प्रत्येक प्राणी और दृश्य तथा अदृश्य में निहित ऊर्जा और चेतना का एक ही स्रोत हैं, जो गणेश जी (ईश्वर) आप हैं।

अव त्वं माम्। आप मेरी (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव वक्तारम्। इस स्तोत्र के (इस अनुभूति को बताने वाले) वक्ता की रक्षा कीजिये।
अव श्रोतारम्। इस स्तोत्र के (इस अनुभूति को सुनने वाले) श्रोता की रक्षा कीजिये।
अव दातारम्। इस स्तोत्र के ज्ञान के दाताओं (इस अनुभूति के ज्ञान को अग्रेषित करने वाले) की रक्षा कीजिए।
अव धातारम्। इस स्तोत्र को स्मरण करने वालों (इस अनुभूति के ज्ञान को स्मृति में जीवित रखने वाले) की रक्षा कीजिए।
अवानूचानमव शिष्यम्। इस स्तोत्र को दोहराने वाले शिष्यों की रक्षा कीजिए।
अव पश्चात्तात्। हे गणेश जी! आप पीछे से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव पुरस्तात्। आगे से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव चोत्तरात्तात्। उत्तर की ओर से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव दक्षिणात्तात्। दक्षिण की ओर से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव चोर्ध्वात्तात्। उर्ध्व भाग से1



Go Get Goa

Goa - A place of juvenility, enjoyment and happiness... A place for the youngsters and couples with enjoyment for entire day and night... A place which rocks on waves in the day time and in the casinos and cruise at night. It is a true saying that sometimes path is more interesting than the destination. Moreover companions in any journey are very important. Like-minded people with full mood of enjoyment and a destination like Goa... what else is needed to thrill and chill your daily ro...


Vipassana Dhamma Thali Jaipur Review

'Sadhana' means 'To attain some goal, keeping yourself focused, calm and determinant onto it; only by keeping mind away from any type of distractions.' 'Samadhi' means 'To keep your body in a particular straight posture and become a viewer of sensations on body parts without reacting on them.' 'Prajna/Pragya' means 'To receive the knowledge about truths... the truths which you can observe and feel within you and around you.' And this is the context behind 'Vipassana'. Vipassana Meditatio...


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Feelings

Kis Vidhi Poojun Nath (Hindi)

किस विधि पूजूँ नाथ... आप आये मेरे द्वारे...,
मैले सारे आसन... कैसे दूँ मैं बिठा रे...

मैंने ही कहा था कल तुम आना,
साफ़ रखुँगी अपना अँगना,
पर निद्रा में स्वप्न जो आये,
मुझको दिया पीछे भगा रे...,
इँह ते उँह तक भगा-भगा के,
मुझको दिया थका रे...

भोर भई, तुम थे आने को,
अमृत वायु मिली थी मुझको,
पर पीने भर की शक्ति नहीं थी,
वो पल दिए गंवा रे...

तुम आये तो मैला था मन,
झूठे पड़े थे रात के बर्तन,
कहाँ बिठाऊँ, क्या मैं खिलाऊँ,
नैनों में अश्रु भरा रे...,

अश्रु बहे, बहा ले गए तुमको,
अब तुम पास नहीं थे,
कल तेरे आने की आस थी मन में,
हम भी निराश नहीं थे,
धुल गया था आँगन,
पावन था मन,
पर तुम चले गए थे,
कल भोर में आने का, फिर से वचन दे,
तुम मुझे छोड़ गए थे,

कभी तो ऐसा भी होगा ओ प्रभुजी!
सपनों से मैं बाहर रहुँगी,
भोर के अमृत से झाड़ कर आँगन,
तेरा ही नाम जपुँगी,
उदयकाल की मिलन वेला में,
तुझसे मिलन करुँगी,
कुछ अपनी कह, कुछ तेरी सुन,
मन में धीर धरुँगी।



Bharat Mata (Hindi)

करोड़ों हाथ हैं उनके,
करोड़ों कंठों में संवाद है उनका,
'वन्दे मातरम्' मन्त्र और भारत की रज,
आशीर्वाद है उनका,
चन्दन सी महकती, लहकती हैं,
मेरी भारत माँ,
हिमालय से महासागर तक, फैली हैं,
मेरी भारत माँ,
रेगिस्तान, नदियाँ और दुर्लभ पेड़,
सब से भरपूर, सुन्दर, सुहासिनी हैं,
मेरी भारत माँ,
सब बच्चों को अलग-अलग बोलियों में,
मिठास और प्रेम से बोलना सिखातीं हैं,
मेरी भारत माँ,
दिलों में अपनेपन का एक एहसास करातीं हैं,
मेरी भारत माँ,
सीधी माँ के हम सीधे-सादे बच्चे,
दुनिया की रीत से अलग, तेजवान और निराले बच्चे,
शांत हैं और शांति प्रिय भी...
पर कोई छीने हमारे भाइयों को हमसे,
या देखे गलत इरादों से हमारी माता को,
तो बता देंगे कितना कोलाहल है इस शांति के भीतर,
'वन्दे मातरम्' शक्ति है, गौरव है, साहस है,
उसे ना ललकार ओ मतवाले,
वरना तेरे देश के हर बन्दे से बुलवा देंगे...
भारत माता की जय।



Jai Ganesh (Hindi)

हे देव तेरे... नाम हज़ार,
पूजन कर कृपा पाऊँ मैं अपार,
विशालकाय तू, महाकाय तू,
मंगलमूर्ति रूप तेरा,
सहस्त्र कोटि सूर्य प्रभा समान,
तेजोमय है स्वरुप तेरा,
धूम्रवर्ण तू, चारुकर्ण तू,
गज समान है आनन तेरा,
सुन्दर मुख है, कपिल वर्ण है,
वक्री सुण्ड और गज के कर्ण हैं,
उदर विशाल, नेत्र हैं पिंगल,
हस्त मुद्रा करती सब मंगल,
शिव के लाल, गौरी के दुलारे,
अग्रपूज्य तुम देव हमारे,
भाद्र शुक्ल चौथ को तुम आये,
मोदक प्रिय तेरा नाम कहाये,
प्रसन्नचित्त, चिंता से मुक्त तुम,
सभी विशिष्ट गुणों से युक्त तुम,
ललाट चंद्र तुम धारण करते,
चंद्र देव के अवगुण हरते,
राक्षस मूषक है वाहन तुम्हारा,
चरण धूरि से उसको संवारा,
तेरे बुद्धि कला कौशल से,
सारे जग में हुआ उजारा,
ऐसा क्या जो सुलझ न पाए,
कौन शत्रु तुझे रण में हराये,
सबके बिगड़े काम बना दे,
मनवांछित वर सबको दिला दे,
रिद्धि-सिद्धि के तुम हो स्वामी,
बुद्धिमान तुम, अन्तर्यामी,
शुभ और लाभ हैं, सुत ये तुम्हारे,
कृपा दृष्टि ने संकट तारे,
विघ्नविनाशक, मंगलमूर्ति,
ध्यान मात्र से हो इच्छापूर्ति,
विशिष्ट नायक, गणनायक, गणपति,
विघ्नराज, पशुपालक, अधिपति,
तेरी कृपा जो होये गणेश जी,
मिट जाएँ जीवन में कलेस जी,
आओ आओ गणपति-गणनायक,
मेरे बिगड़े काज बनाओ,
अपने बुद्धि-कौशल से प्रभुजी,
मेरी नैया पार लगाओ,
शत्रु ने घेरा है, है चिंताओं का डेरा,
उनका विनाश कर, हमको बचाओ,
राक्षस रूप चंचल मन है मेरा,
धरि अपने पग करो बुद्धि का उजेरा,
आओ पधारो विनायक-विघ्नहर्ता,
आओ विराजो सर्व मंगल करता,
जय जय गनेस सर्व दुःख हर्ता
जय जय गणेश सर्व सुख करता।



Kyun na main tar jaun... (Hindi)

क्यूँ न भव से मैं तर जाऊँ...

पूर्वजन्म की बात ना जानूँ,
सच है मैं तुझको नहीं पहचानूँ,
लेकिन क्यूँ नहीं मैं तर पाऊँ,
एक जनम जो हरि नर का पाऊँ...

पशु, पाषाण या कि होऊँ पत्ता,
चल नहीं पाये तब मेरी सत्ता,
पर नर देह बुद्धि है तेरी,
जिससे नर ने किस्मत फेरी,

क्यूँ नहीं फिर उस पर इतराऊं,
भाग्य बदल मैं तुझको पाऊं,

गणिका और अजामिल तारे,
नाम लिए से कष्ट निवारे,
वो हरि नाम क्यूँ मैं ले नहीं पाऊँ,
क्यूँ नहीं भव से मैं तर पाऊँ,

हे हरि! हम तुझमें हैं समाये,
तुझसे बाहर जा भी नहीं पाये,
जब तेरी ही माया और तुझको ही पाना,
तो फिर क्यूँ जन्मों का बहाना,

हे हरि! जो ऐसा हो जीवन,
नाम लेण को तरसे ये मन,
माया वश तुझको बिसराऊँ,
पर मृत्यु परे तो तुझको ही पाऊँ,

क्यूँ इस जनम में मैं तर नहीं पाऊँ,
क्यूँ इस जनम में मैं तुझे नहीं पाऊँ।



Rakhi (Hindi)

आने वाला है राखी का त्यौहार

तेरी उम्र हो बहुत ही लंबी
और सुरक्षित रहे मेरा भी संसार,
इसीलिए इस बार, 
नहीं गई मैं बाज़ार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
ना ही कोई रेशम का धागा, 
ना मैं लाई मिठाई,
नहीं आऊंगी इस बार तेरे घर,
पर मत करना भैया लड़ाई,
भाभी से बँधवा लेना धागा,
और याद करना मेरा प्यार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
सारा साल है फीका अपना,
नहीं मना कोई भी त्यौहार,
घर ही घर में कैद हुए सब,
बस बचा रहे हैं परिवार,
खर्चे बढ़ते, घटती कमाई,
पर नहीं शिकायत भाई,
बस ये वक्त जल्द निकल जाए,
ऐसी देती हूँ दुहाई,
फिर से लगे सावन की झड़ियाँ,
झूले-मेलों की आये बहार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
आने वाला है राखी का त्यौहार।



Coronatime Humor (Humor)

तब

पत्नी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतज़ार,  
हाथों में था पति के लिए एक उपहार,  
आते ही पति के हुई वर्षा सेंट की,  
और गले में डाला बाहों का हार,  
भीतर जाते ही दिया पानी,  
चलाई कूलर की ठंडी बयार,  
दिखा कर फेवरेट खाना पत्नी यूं चिल्लाई,  
जानू, बाद में लेना बदल कपड़े,  
पहले चखो घर की बनी रस मलाई।  

अब

पत्नी आज भी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतजार,  
हाथों में था पति के लिए सेनेटाइजर का उपहार,  
और दस कदम की दूरी बना वो चिल्लाई,  
कहीं किसी से की तो नहीं हाथ मिलाई,  
चलो अब बंद है तुम्हारा हवा, पानी,  
सबसे पहले नहा कर बहाओ कोरोना प्राणी,   
फिर अपने कपड़े आप ही धुल कर आना,  
तभी मिलेगा तुम्हें कोरोना टाइम में खाना।



Hariyaali Teej (Hindi)

हाथों में रचाकर हरी-हरी मेहँदी,
कलाईयों में हरी चूड़ियाँ डालूँ,
हरी साड़ी लपेट बदन पे,
खुद को हरी धरती सा सजा लूँ,
सखियों संग झूमूं किसी बगीचे में,
साज-श्रृंगार की बातें बना लूँ,
मगर क्यूँ नहीं आज सही मायने में
मैं ये त्यौहार मना लूँ,
पार्लर की बजाय नर्सरी को जा
चंद नए पौधे लिवा लूँ,
हाथों को मेहँदी की जगह
गीली मिट्टी से सजा लूँ,
और खुद सँवरने से पहले
एक पौधे को सँवारने की जिम्मेदारी उठा लूँ,
हरे बगीचे में तो सब जाते हैं,
पर आज किसी सूखे स्थान को हरा-भरा बना लूँ,
और उस हरे पौधे की दुआ से ही आज,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ।



Khar (Enmity) (Hindi)

बहुत ख़ार है तेरे भीतर, कुछ ख़ार यहाँ है बाकी,
लहरें-तूफ़ां अनेकों, मेरे मन के भी ये साथी।
इतने तूफानों में भी, है मौन खड़ा तू जैसे,
वैसी ही मौन हूँ मैं भी, पर शांत कहूँ मैं कैसे ...

ये हवा नहीं, ना ही मौसम, जो मन को हिला-मिला दें,
कुछ रिश्तों के बंधन हैं, जहाँ शिकवे और गिला हैं।
तुझसी नहीं बलशाली, जो सबको मैं अपना लूँ,
या तो अपने रंग में रंग दूँ, या छोड़ कर उन्हें दया दूँ ...

फिर भी शांति की तलाश, ले आई मुझे यहाँ आज,
उमड़े-घुमड़े और बरसे मेरे बादल, पिघल गई मैं आज,
आँखों से आँसू बन निकला, ख़ार मिला तुझ भीतर,
तेरे मौन से मेरे मौन को मिले अनेकों उत्तर...
तेरे मौन से मेरे मौन को मिले अनेकों उत्तर।



Indian Oldage Love (Hindi)

साठ पार कर चुके थे दौनों,
फिर भी कहासुनी सारी थी,
इक दूजे बिन रह नहीं पायें,
पर दौनों को ज़िद प्यारी थी।

ज़िद थी भी इतनी प्यारी,
जो करती थी रिश्तों को गहरा,
इक दूजे को समझते दौनों,
इसीलिए था पहरा।

पहरा था गहरा,
नहीं देतीं मिठाई उनको सीधे,
पर उनके हिस्से की फ़्रिज में,
छोड़ देतीं थी धीरे,
पर उनके खा लेते ही,
मचता रोज़ बवाल,
साठ पार खाते हो मिठाई,
होगा तुम्हारा क्या हाल,
अब जाओ दौड़ने और
पीछे से मैं भी आती हूँ,
कहीं बीच में बैठ ना जाओ,
पूरा पता लगाती हूँ।

पता लगा लो तुम पूरा,
और पीछे मेरे आओ,
जो साठ पार मिठाई तुमने खाई,
उसको तुम भी पचाओ,
आख़िर तुम बिन कोई नहीं अब
इस दुनिया में मेरा,
तेरी ज़िदों के बिना
नहीं पचेगा खाना मेरा।

अच्छा तो ये प्यार नहीं,
इसमें भी तेरा स्वार्थ,
जो कोई और होता दुनिया में
तो करते भी नहीं बात।

करता नहीं जो बात,
तो क्या तुम चुप हो जाती,
सालों हो गए सुनते,
बस तुम अपनी गातीं,
कभी ज़बरन काम पर भेजतीं,
देकर गाली हज़ार,
रोज़ नई चीज़ों की फ़रमाइश,
इतना ही था प्यार।

हाँ इतना ही था प्यार,
बनाया तुमको लायक़,
घर संसार बसाया तेरा,
पर तुम तो रहे खलनायक,
जो भी ख़रीदा, तेरे लिए था,
नहीं अपने लिए बचाया,
फिर भी देखो तुमने मुझको,
इतना कुछ है सुनाया,
जो इतनी बुरी थी लगती,
तो क्यूँ रोज़ गज़रा थे लाते,
क्यूँ कम पैसों में भी तुम
मुझको हर वीक घुमा कर लाते।

लाता था हर वीक घुमा कर,
और तेरे लिए गज़रा,
ठंडी रहे तू, सजी रहे तू,
ये ही स्वारथ बस था,
पर मेरे प्यार को तू समझ ना पाई,
हाय री मेरी क़िस्मत,
हो चला हूँ बुड्ढा, अब तो बक्श दे,
मौत दे रही दस्तक।

मौत दे दस्तक दुश्मन के,
मैं सदा1



Tarang :: Be Live (Hindi)

आज ज़रा गाड़ी को रहने दो गैराज़ में,
कि दिल पैर निकालने को कर रहा है,
आज ज़रा मोबाइल को फिक्स्ड कर दो,
कि मन कुछ कहने को मचल रहा है।

आज कोई ना चलाओ एसी. ,
कि वादियों की खानी हैं हवाएँ,
आज सब इयरफोन निकाल दो,
और सुनो जो भँवरे गुनगुनायें।

आज कोई टीवी को बंद कर दो,
कि मुझे है तुमसे दो बात करनी,
आज कोई दिन में ना सोने जाओ,
कि दिखानी है मेरे सपनों की जरनी।

आज सब फेसबुक को भूल जाओ,
कि लाइव देखना है फेस तुम सबका,
आज सब बंद कमरों से बाहर आओ,
चलो मिलकर करें मन हल्का।



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Travels

Ashram Memories

Today I am telling you about a totally different destination for vacation, for knowledge gain, for knowing our culture as well as staying in a calm and natural environment. A destination where your kids will play freely and you can meditate there without children's worry. A destination where you will find members of different age groups, kids, youths, elders, old-age people, all. And everybody would be talking about development of nation, about technology, about linking spirituality with techn...


Vipassana Dhamma Thali Jaipur Review

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Coonoor - Gateway to Serenity

Ok guys so let me tell you about a wonderful and off the beaten track; place around 60 kms ahead of Ooty, the quaint and peaceful town with lush green tea estates — Coonoor.I was at my friend's place in Bengaluru and from there we were on a road trip to Mysore. We started at 5:30 in the morning. In midway we decided to go to Ooty and cover Mysore in our way back. But as destinations are already decided, we can only choose paths. So on our way, suddenly one of my friend called up and sugges...


Rajahmundry Official Tour

I was on an official tour to Rajahmundry. I brought up and live in Delhi and it was my first South India tour. So I already have a fear of language problem there. I took flight early in the morning and reached there around 11:30 am. Since it was the month of July so I was expecting hot weather in Rajahmundry too. But unexpectedly weather was very pleasant and clouds were there in the sky. I have already communicated to my hotel manager to send cab for me to commute from airport to hotel.I hav...


Manali Memories - Part (1)

Manali in Different Seasons If there is any heaven on earth... It is here... It is here... It is here. No idea about Kashmir yet, but enchanting beauty of Manali attracts tourists all around the world. It has a totally different and new look in every season. In January it is totally white and snowfall is there. In July-August water and waterfalls everywhere, but yes that season is dangerous and slippery too. In this season you may face some landslides as well. So September to Dec...


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