Rakhi (Hindi)

आने वाला है राखी का त्यौहार

तेरी उम्र हो बहुत ही लंबी
और सुरक्षित रहे मेरा भी संसार,
इसीलिए इस बार, 
नहीं गई मैं बाज़ार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
ना ही कोई रेशम का धागा, 
ना मैं लाई मिठाई,
नहीं आऊंगी इस बार तेरे घर,
पर मत करना भैया लड़ाई,
भाभी से बँधवा लेना धागा,
और याद करना मेरा प्यार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
सारा साल है फीका अपना,
नहीं मना कोई भी त्यौहार,
घर ही घर में कैद हुए सब,
बस बचा रहे हैं परिवार,
खर्चे बढ़ते, घटती कमाई,
पर नहीं शिकायत भाई,
बस ये वक्त जल्द निकल जाए,
ऐसी देती हूँ दुहाई,
फिर से लगे सावन की झड़ियाँ,
झूले-मेलों की आये बहार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
आने वाला है राखी का त्यौहार।



Hariyaali Teej (Hindi)

हाथों में रचाकर हरी-हरी मेहँदी,
कलाईयों में हरी चूड़ियाँ डालूँ,
हरी साड़ी लपेट बदन पे,
खुद को हरी धरती सा सजा लूँ,
सखियों संग झूमूं किसी बगीचे में,
साज-श्रृंगार की बातें बना लूँ,
मगर क्यूँ नहीं आज सही मायने में
मैं ये त्यौहार मना लूँ,
पार्लर की बजाय नर्सरी को जा
चंद नए पौधे लिवा लूँ,
हाथों को मेहँदी की जगह
गीली मिट्टी से सजा लूँ,
और खुद सँवरने से पहले
एक पौधे को सँवारने की जिम्मेदारी उठा लूँ,
हरे बगीचे में तो सब जाते हैं,
पर आज किसी सूखे स्थान को हरा-भरा बना लूँ,
और उस हरे पौधे की दुआ से ही आज,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ।



Hum Paudhe (Hindi)

खरपतवार की तरह उगे हुए थे
हम जंगल के पौधे,
मज़ा बड़ा था, बस डरते थे,
कोई हमें नहीं रौंदे,
उस खुले अल्हड़ बचपन को हटा
किसी ने सभ्यता सिखलाई,
हाँ, निखारा व्यक्तित्व को मेरे
और नई जमीन दिखलाई,
आज सभ्य हूँ, सही जगह हूँ,
देती आश्रय सबको,
पर वो मासूमियत-अल्हड़ता चली गई,
ढूंढ़ रही मैं जिसको,
पूर्णता तो कभी नहीं थी,
बस तब था अबोध मन प्यारा,
अब संकटों से झूझता सा जीवन,
जग कहता इसे अनुभव हमारा।



Coronatime Humor (Humor)

तब

पत्नी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतज़ार,  
हाथों में था पति के लिए एक उपहार,  
आते ही पति के हुई वर्षा सेंट की,  
और गले में डाला बाहों का हार,  
भीतर जाते ही दिया पानी,  
चलाई कूलर की ठंडी बयार,  
दिखा कर फेवरेट खाना पत्नी यूं चिल्लाई,  
जानू, बाद में लेना बदल कपड़े,  
पहले चखो घर की बनी रस मलाई।  

अब

पत्नी आज भी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतजार,  
हाथों में था पति के लिए सेनेटाइजर का उपहार,  
और दस कदम की दूरी बना वो चिल्लाई,  
कहीं किसी से की तो नहीं हाथ मिलाई,  
चलो अब बंद है तुम्हारा हवा, पानी,  
सबसे पहले नहा कर बहाओ कोरोना प्राणी,   
फिर अपने कपड़े आप ही धुल कर आना,  
तभी मिलेगा तुम्हें कोरोना टाइम में खाना।



Thank You God (Hindi)

धन्यवाद

जब जब मैंने खुद को सेवाकार्य में रत कुछ महान पाया,
धन्यवाद हे प्रभु! तुमने मुझसे महान सेवादार दिखलाया,
जब लगा तेरी भक्ति में लीन मैं कोई साधवी हो गई,
तो धन्यवाद प्रभु! पुनः मोह में फँसा, मेरा भ्रम हटाया,
जब लगा कुछ नया खोज पाई इस जगत में,
धन्यवाद प्रभु! तुमने पहले किये गए शोध को पढ़वाया,
जब लगा संसार में सबसे अनोखी प्राणी हूँ मैं,
तो तुमने मुझसे अनोखे प्राणियों से मिलवाया
और तो और जब सबसे दुःखी होने का आभास हुआ,
तो धन्यवाद कि तुमने तभी मुझसे ज्यादा पीड़ित दिखलाया,
धन्यवाद कि मैंने सदा अकेले चलना चाहा
और तुम किसी न किसी रूप में मेरे साथ चलते रहे,
मुझे लगा कि मुझे कोई नहीं सुन रहा,
पर तुम हमेशा मुझे सुनते रहे,
हर बाधा से निकाला, हर परीक्षा में सफल कराया,
कभी दिया सबक और कभी बिखरा दी अपनी माया,
धन्यवाद हे प्रभु! मुझे एक बहुत ही आम सा खास जीवन देने के लिए
और धन्यवाद मेरा ये धन्यवाद सुन लेने के लिए।



Ganpati Atharvsheersham (Audio + Hindi)



श्री गणपति अथर्वशीर्षम्

हरिः ॐ ॥

नमस्ते गणपतये। समस्त जीवों(योनि/जाति) के स्वामी को नमस्कार है।
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि। केवल आप ही वो प्रत्यक्ष सूक्ष्मतम तत्व हैं जो परोक्ष चैतन्य (आत्मा) को आवरण दे, प्रत्यक्ष बनाता है।
त्वमेव केवलं कर्तासि। आप ही समस्त सृष्टि की उत्पत्ति के कारण स्वरूप हैं।
त्वमेव केवलं धर्तासि। आप ही केवल समस्त सृष्टि को धारण (पालन) करते हैं।
त्वमेव केवलं हर्तासि। आप ही केवल सृष्टि का हरण (अंत / संहारकर्ता) करते हैं।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि। आप ही सत्य स्वरुप सम्पूर्ण ब्रह्म (एक निर्विशेष, सर्वव्यापी, स्वप्रकाश, नित्य, स्वयं सिद्ध चेतन तत्त्व) हैं।
त्वं साक्षादात्मासि नित्यम्। आप ही साक्षात् नित्यात्मा (समस्त सृष्टि की निरंतर चेतना) हैं।
(इस प्रकार यह आपका ब्रह्म अद्वैत स्वरूप है।)

ऋतं वच्मि। उचित कहती हूँ (दैवीय वास्तविकता बतलाती हूँ)।
सत्यं वच्मि। सत्य कहती हूँ (सार्वभौमिक सत्य कहती हूँ)।
कि सम्पूर्ण सृष्टि में प्रत्येक प्राणी और दृश्य तथा अदृश्य में निहित ऊर्जा और चेतना का एक ही स्रोत हैं, जो गणेश जी (ईश्वर) आप हैं।

अव त्वं माम्। आप मेरी (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव वक्तारम्। इस स्तोत्र के (इस अनुभूति को बताने वाले) वक्ता की रक्षा कीजिये।
अव श्रोतारम्। इस स्तोत्र के (इस अनुभूति को सुनने वाले) श्रोता की रक्षा कीजिये।
अव दातारम्। इस स्तोत्र के ज्ञान के दाताओं (इस अनुभूति के ज्ञान को अग्रेषित करने वाले) की रक्षा कीजिए।
अव धातारम्। इस स्तोत्र को स्मरण करने वालों (इस अनुभूति के ज्ञान को स्मृति में जीवित रखने वाले) की रक्षा कीजिए।
अवानूचानमव शिष्यम्। इस स्तोत्र को दोहराने वाले शिष्यों की रक्षा कीजिए।
अव पश्चात्तात्। हे गणेश जी! आप पीछे से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव पुरस्तात्। आगे से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव चोत्तरात्तात्। उत्तर की ओर से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव दक्षिणात्तात्। दक्षिण की ओर से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव चोर्ध्वात्तात्। उर्ध्व भाग से1



Go Get Goa

Goa - A place of juvenility, enjoyment and happiness... A place for the youngsters and couples with enjoyment for entire day and night... A place which rocks on waves in the day time and in the casinos and cruise at night. It is a true saying that sometimes path is more interesting than the destination. Moreover companions in any journey are very important. Like-minded people with full mood of enjoyment and a destination like Goa... what else is needed to thrill and chill your daily ro...


Vipassana Dhamma Thali Jaipur Review

'Sadhana' means 'To attain some goal, keeping yourself focused, calm and determinant onto it; only by keeping mind away from any type of distractions.' 'Samadhi' means 'To keep your body in a particular straight posture and become a viewer of sensations on body parts without reacting on them.' 'Prajna/Pragya' means 'To receive the knowledge about truths... the truths which you can observe and feel within you and around you.' And this is the context behind 'Vipassana'. Vipassana Meditatio...


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Feelings

Positivity (Hindi)

सकारात्मकता

आज हम लोग एक बदलते समय में जी रहे हैं। जहाँ एक ओर पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध हमें आकर्षित कर रही है, वहीँ उन्हीं विदेशियों को जब हम भारतीय पुरातन ज्ञान-विज्ञान और क्रियाओं के पीछे भागते देखते हैं तो हमें अपनी संस्कृति की महानता पता चलती है और हम भी उसे अपनाने चल पड़ते हैं। अब देखने की बात यह है कि हम केवल शब्दों के पीछे भाग रहे हैं या सच में उन्हें समझते भी हैं। इनमें से ही एक बहुचर्चित शब्द है --- सकारात्मकता और सकारात्मक सोच।

ऐसा कहा जाता है कि हमेशा सकारात्मक सोच रखने से इतनी सकारात्मक ऊर्जा निकलती है कि आप जो सोचते हो वो सच होने लग जाता है। पर क्या वास्तविकता में हम इसका आशय समझते हैं, या सकारात्मक होने का केवल दम्भ करते हैं ? सकारात्मक सोच वाले मनुष्य के जीवन में भी कठिनाइयाँ आती हैं और वो भी दुःखी होता है, पर मानसिक संतुलन और संयम बनाये रखता है। क्या भगवान् राम का जीवन सरल था? क्या उनसे ज्यादा कोई सकारात्मक हो सकता है जो बिना विचलित हुए सम्पूर्ण राज-पाट अपने माता-पिता के कहने मात्र से त्याग कर वन में गए। और माता सीता ने भी उनका अनुसरण किया। क्या भगवान् कृष्ण से ज्यादा कोई सकारात्मक हो सकता है जो द्वारकाधीश होते हुए भी सब त्याग कर एक युद्ध में सम्मिलित हुए, पर शस्त्र नहीं उठाया और जो अपनी इच्छा मात्र से उस युद्ध से मनचाहा परिणाम ले सकते थे, फिर भी सारथी बनना स्वीकार किया।

आइये मोटे तौर पर विचार करते हैं कि सकारात्मकता क्या है और कैसे ये जीवन को सरल बनाती है।

सकारात्मक सोच एवं सकारात्मकता का दिखावा

1) विश्वास

  • ऐसा व्यक्ति स्वयं पर विश्वास रखता है और मानता है कि वो स्वयं को पहले से और अधिक उन्नत करेगा।
  • सकारात्मक होने का दिखावा करने वाला व्यक्ति1


Stri-Purush Sanvaad (Hindi)

स्त्री-पुरुष संवाद ------ ये एक काल्पनिक लघु परिदृश्य है, जिसका किसी भी ऐतिहासिक या पौराणिक घटना से कोई सम्बन्ध नहीं है। ये बस मेरे विचारों का नाट्य रूपांतरण है।

तो बात उस समय की है, जब ब्रह्मा जी ने प्रकृति के विकास और संतुलन के लिए मानव की रचना की। पुरुष और स्त्री को बनाया और उनको कहा कि आपसी सामंजस्य से जीवनयापन करें। तो पुरुष और स्त्री ने संवाद शरू किया ---

पुरुष - हे देवी! मैं पुरुष अपने पौरुष, अर्थात परिश्रम और योजना से, आपके लिए प्रकृति प्रदत्त समस्त संसाधनों से धरती पर रहने और जीवनयापन करने की उत्तम से उत्तम व्यवस्था करूँगा।

स्त्री - हे देव! मैं भी वचन देती हूँ कि मैं भी अपने स्त्री धर्म का पालन करते हुए उस स्थान को अपनी रचनात्मकता और आयोजन क्षमता से स्वर्ग सा विकसित करुँगी और आपके साथ धर्मपूर्वक जीवनयापन करुँगी।

पुरुष - हे देवी! मैं आपको प्रसन्न करते हुए, आपकी सहमति से, आपके साथ योग द्वारा अपनी ऊर्जा को आपमें स्थापित करूँगा।

स्त्री - देव! प्रेम से परिपूर्ण हो मैं भी उस ऊर्जा को धारण कर, अपनी ऊर्जा का उसमें समावेश कर, ब्रह्मा द्वारा रचित प्रकृति के विकास में अपनी भूमिका निभाऊंगी।

पुरुष - हे देवी! मैं आपको वचन देता हूँ कि धरती पर मैं आपके और आपके द्वारा उत्पन्न मेरी संतानों के भरण-पोषण की समस्त व्यवस्था करूँगा।

स्त्री - हे देव! मैं भी आपको वचन देती हूँ कि आपके द्वारा परिश्रम से संग्रहित वस्तुओं से मैं स्वयं संतुष्ट होऊंगी और आपको और आपके द्वारा उत्पन्न मेरी संतानों को भी संतुष्ट रखूंगी।

पुरुष - हे देवी! मैं आपको और हमारी आने वाली संतानों को पूर्ण सुरक्षा का वचन देता हूँ। मैं आप सभी की सुरक्षा के लिए दैवीय, शारीरिक और प्राकृतिक बाधाओं से बिना डरे युद्ध करूँगा और उनसे सुरक्षा हेतु योजना बनाऊँगा।

स्त्री - देव! मैं1



Tree's Appeal

:: What was in my mind :: Trees are precious. They give us life, pure air, food and everything which makes our life easy. So we should also respect nature and save trees. On the occasion of World Environment Day on 5th June, here is one of my brother's childhood compositions which were prepared for school competition. I saw a tall big tree somewhere, He called me, please come here, I will tell you a story flare, Please listen me and beware...Food, cloth, home, life and air, We giv...


Coronatime Humor (Humor)

तब

पत्नी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतज़ार,  
हाथों में था पति के लिए एक उपहार,  
आते ही पति के हुई वर्षा सेंट की,  
और गले में डाला बाहों का हार,  
भीतर जाते ही दिया पानी,  
चलाई कूलर की ठंडी बयार,  
दिखा कर फेवरेट खाना पत्नी यूं चिल्लाई,  
जानू, बाद में लेना बदल कपड़े,  
पहले चखो घर की बनी रस मलाई।  

अब

पत्नी आज भी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतजार,  
हाथों में था पति के लिए सेनेटाइजर का उपहार,  
और दस कदम की दूरी बना वो चिल्लाई,  
कहीं किसी से की तो नहीं हाथ मिलाई,  
चलो अब बंद है तुम्हारा हवा, पानी,  
सबसे पहले नहा कर बहाओ कोरोना प्राणी,   
फिर अपने कपड़े आप ही धुल कर आना,  
तभी मिलेगा तुम्हें कोरोना टाइम में खाना।



Main (I) (Hindi)

'अहम्' का भाव संसार से मुक्ति में बाधक है। जो कह रहा है 'मैंने किया', 'मैं कर रहा हूँ', 'मैं करके दिखाऊंगा' वो वास्तविकता में क्या करेगा और किसे दिखायेगा?

हमारे अंदर जो करोड़ों रक्त कोशिकाएं घूम रही हैं, जो रुधिर में बहने वाली आक्सीजन उन्हें घुमा रही है, जो हृदय उसे फेफड़ों से सोख कर शुद्ध कर रहा है, जो नाक उसे अंदर घुसा रही है, जो तंत्रिका तंत्र इस सारे कार्य को बिना दिमाग को बताये किये जा रहा है, जो जढराग्नि भोजन को पचा समस्त तंत्रिका तंत्र को, मस्तिष्क को और समस्त अंगों को पोषण देती है, जो मस्तिष्क इतने विलक्षण कार्य करता है, जो अवर्णनीय है, नया सीखना, पुराने को संभल कर रखना, समस्त इन्द्रियों द्वारा किये जा रहे कार्यों से परिणाम निकालना, नए नए आविष्कारों की रचना करना, सोचना और जो शरीर के अज्ञात सात चक्र इन सभी ज्ञात अंगों को भली प्रकार नियंत्रित और यन्त्रित करते हैं, उनमें से कोई भी 'मैं' या 'मेरा' नहीं बोलता। बल्कि सब चुपचाप अपना कार्य करते रहते हैं।

ना ही कोई मनुष्य इनमें से किसी की भी तुलना कर किसी क्रिया या कारक को श्रेष्ठ बता पाता है। हाँ कई बार अपने दिमाग की तारीफ़ जरूर करता है। लेकिन क्या दिमाग उस तारीफ़ को सुनने के लिए कार्य कर रहा था, या क्या वो इसका घमंड करता है, या क्या वो बाकी तंत्र को बतलाता है की मेरी तारीफ़ हुई... नहीं। वो कुछ नहीं बोलता और कार्य करता रहता है। वहाँ कोई लड़ाई नहीं, कोई ऊँच-नीच नहीं। बस कार्य के प्रति समर्पण और उसकी निरंतरता। न कोई वक्ता, न कोई श्रोता और हम जैसे अनभिज्ञ दृष्टा। ये सब अनवरत हो पाता है क्यूंकि वहाँ 'मैं' और 'तू' नहीं है। एक-एक पल में हमारे भीतर और बाहर इतने कार्य हो रहे हैं और उसके बाद भी मज़े की बात1



Prayer to Goddess Durga (Hindi)

बसो मैया मेरे भीतर, सदा-सर्वदा वास करो।
मन की गति बन, मेरी सुमति बन, सदा मेरा तुम विकास करो।

मेरे मन की शक्ति तुम हो, हृदय में बसी भक्ति तुम,
वाणी की मधुरता तुम हो, सुर-साम्राज्ञी देवी तुम।

तुम से ही माँ, दश विद्याएं, नौ निधि सब तेरे आधीन,
अष्ट-सिद्धि की दाता मैया, व्याधि-विनाशिनी दोष विहीन।

ओ मेरी मैया, सामने आना, साथ में मेरे रहना सदा,
सब अपराध क्षमा कर मैया, मेरी तुम विनती सुनना।

कुमार्गगामी, मैं खलकामी, तुमको ना पहचानी माँ,
पर तुम मेरी शक्ति-स्वरूपा, तुम हो अंतर्यामी माँ।

तुमने ही संसार बनाया, सब रचना तेरे आधीन,
मेरी रचना का विकास कर, बना मुझे तू पूर्ण स्वाधीन।

तेरे ही चित्र उकेरूँ प्रतिपल, तेरा ही गान मैं गाऊँ माँ,
जग में कुछ ऐसा कर पाऊँ, कहलाऊँ तेरी 'आभा'।

तेरे ही कार्यों में शोभा पाऊँ, बना रहे सदा साथ तेरा,
इस जनम और हर एक जनम में, सिर पर हो माँ हाथ तेरा,

माँ बना रहे विश्वास मेरा, माँ सिर पर हो सदा हाथ तेरा...



Tarang :: Be Live (Hindi)

आज ज़रा गाड़ी को रहने दो गैराज़ में,
कि दिल पैर निकालने को कर रहा है,
आज ज़रा मोबाइल को फिक्स्ड कर दो,
कि मन कुछ कहने को मचल रहा है।

आज कोई ना चलाओ एसी. ,
कि वादियों की खानी हैं हवाएँ,
आज सब इयरफोन निकाल दो,
और सुनो जो भँवरे गुनगुनायें।

आज कोई टीवी को बंद कर दो,
कि मुझे है तुमसे दो बात करनी,
आज कोई दिन में ना सोने जाओ,
कि दिखानी है मेरे सपनों की जरनी।

आज सब फेसबुक को भूल जाओ,
कि लाइव देखना है फेस तुम सबका,
आज सब बंद कमरों से बाहर आओ,
चलो मिलकर करें मन हल्का।



Nandlala Karte Hain Aguwai (Humor)

बाला ने देखा आज एक ग्वाला,
याद आया उसको ब्रज का नंदलाला।

हृष्ट-पुष्ट सुन्दर, मन-मोहन मुरली वाला,
मोरमुकुटधारी और श्यामल वर्ण निराला,
वर्ण तो श्यामल प्रभु ने इसे भी दे डाला,
पर थोड़ा दुबला था ये श्यामल रंग वाला।

मुरली नहीं थी, हाथ में था सिगरेट-तम्बाकू-मसाला,
पीताम्बर की जगह इसने तन पर पैंट-शर्ट डाला,
सुन्दर आँखों पर लगाया था रंगीन चश्मा आला,
समझ रहा था खुद को हीरो, ये उल्टी टोपीवाला।

यमुना सा बहता था इसके घर के पास एक नाला,
दूध में पानी मिला इसने था अपनी दशा को संभाला,
दिव्य रथ तो नहीं था, पर था वाहन रफ़्तार वाला,
एक घंटे में पहुँचाता था वो, बस्सी से सोडाला।

रास रचैया ना सही, रसिक मिज़ाज कम नहीं था,
हीरोइनों के पोस्टरों से उसका कमरा रंगीं था,
एक नहीं तीन-तीन को, उसने था माना राधा,
बंशी बिन अपनी सीटी से ही, उसने था ये तीर साधा।

द्वारिका ना बसाई, पर कल्पना की दुनिया थी उसकी प्यारी,
राजनीतिज्ञ न था, पर थी राजनेताओं से उसकी यारी,
मोबाइल तरंगों से ही वो था अपनी दुनिया को चलाता,
शेयर-लॉटरी-सट्टे में दिन-रात अपने दिमाग को जलाता।

उसका ये अंदाज़ देख मैं बाला मुस्काई,
आज भी करते हैं नंदलाला इस दुनिया की अगुवाई...
आज भी करते हैं नंदलाला इस दुनिया की अगुवाई।



Jara Si Baat... (Hindi)

ज़रा सी बात थी और...
मैंने मन में सोच सोच उलझा लिया
मैं चाहती थी कि तुम सुलझाओ,
पर सच में उलझन कहाँ है,
ये क्या जान पाते तुम,
पर तुम्हारी चाहते हुए भी,
ना कि गई कोशिश से,
मेरे ग़ुस्से ने जो उस पर ताला लगाया,
उसने मुझे अब बहुत दूर ला दिया,
ज़रा सी ही तो बात थी...

मैं जानती हूँ,
तुम ग़लत नहीं, अनजान थे,
और मैं परेशान,
बस बिन कहे क्यूँ नहीं समझ पाए तुम?
ज़रा सी ही तो बात थी...

अब चाहती हूँ,
जो हुआ उसे भुला आगे बढ़ जाना,
पर क्या तुम आज भी दोगे मेरा साथ?
फिर उलझ रही हूँ अपने सवालों में,
अपने ही मन में,
क्यूँ नहीं ख़ुद से खोल देती,
मेरे मन की गाँठें,
क्यूँ नहीं तुम्हें बोल देती,
जो मेरा मन चाहे,
आख़िर ज़रा सी ही तो बात थी...



Indian Oldage Love (Hindi)

साठ पार कर चुके थे दौनों,
फिर भी कहासुनी सारी थी,
इक दूजे बिन रह नहीं पायें,
पर दौनों को ज़िद प्यारी थी।

ज़िद थी भी इतनी प्यारी,
जो करती थी रिश्तों को गहरा,
इक दूजे को समझते दौनों,
इसीलिए था पहरा।

पहरा था गहरा,
नहीं देतीं मिठाई उनको सीधे,
पर उनके हिस्से की फ़्रिज में,
छोड़ देतीं थी धीरे,
पर उनके खा लेते ही,
मचता रोज़ बवाल,
साठ पार खाते हो मिठाई,
होगा तुम्हारा क्या हाल,
अब जाओ दौड़ने और
पीछे से मैं भी आती हूँ,
कहीं बीच में बैठ ना जाओ,
पूरा पता लगाती हूँ।

पता लगा लो तुम पूरा,
और पीछे मेरे आओ,
जो साठ पार मिठाई तुमने खाई,
उसको तुम भी पचाओ,
आख़िर तुम बिन कोई नहीं अब
इस दुनिया में मेरा,
तेरी ज़िदों के बिना
नहीं पचेगा खाना मेरा।

अच्छा तो ये प्यार नहीं,
इसमें भी तेरा स्वार्थ,
जो कोई और होता दुनिया में
तो करते भी नहीं बात।

करता नहीं जो बात,
तो क्या तुम चुप हो जाती,
सालों हो गए सुनते,
बस तुम अपनी गातीं,
कभी ज़बरन काम पर भेजतीं,
देकर गाली हज़ार,
रोज़ नई चीज़ों की फ़रमाइश,
इतना ही था प्यार।

हाँ इतना ही था प्यार,
बनाया तुमको लायक़,
घर संसार बसाया तेरा,
पर तुम तो रहे खलनायक,
जो भी ख़रीदा, तेरे लिए था,
नहीं अपने लिए बचाया,
फिर भी देखो तुमने मुझको,
इतना कुछ है सुनाया,
जो इतनी बुरी थी लगती,
तो क्यूँ रोज़ गज़रा थे लाते,
क्यूँ कम पैसों में भी तुम
मुझको हर वीक घुमा कर लाते।

लाता था हर वीक घुमा कर,
और तेरे लिए गज़रा,
ठंडी रहे तू, सजी रहे तू,
ये ही स्वारथ बस था,
पर मेरे प्यार को तू समझ ना पाई,
हाय री मेरी क़िस्मत,
हो चला हूँ बुड्ढा, अब तो बक्श दे,
मौत दे रही दस्तक।

मौत दे दस्तक दुश्मन के,
मैं सदा1



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Travels

Ashram Memories

Today I am telling you about a totally different destination for vacation, for knowledge gain, for knowing our culture as well as staying in a calm and natural environment. A destination where your kids will play freely and you can meditate there without children's worry. A destination where you will find members of different age groups, kids, youths, elders, old-age people, all. And everybody would be talking about development of nation, about technology, about linking spirituality with techn...


Manali Memories - Part (1)

Manali in Different Seasons If there is any heaven on earth... It is here... It is here... It is here. No idea about Kashmir yet, but enchanting beauty of Manali attracts tourists all around the world. It has a totally different and new look in every season. In January it is totally white and snowfall is there. In July-August water and waterfalls everywhere, but yes that season is dangerous and slippery too. In this season you may face some landslides as well. So September to Dec...


Wonderful Trip to Kerala

Hi again. So this time I am bringing another cool-cool trip to Kerala. I will share my experience as well as different ways (which are not available anywhere else on internet) to plan a great and budget trip there. So a family of 4 or group of 4 people is so common in a trip and so hard to adjust in a normal single room. See three person are ok with an extra bed in room, but adjusting 4 is hard and normally we have to book two rooms for that. So I am taking 4 people in a room option to plan your...


Go Get Goa

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