Rakhi (Hindi)

आने वाला है राखी का त्यौहार

तेरी उम्र हो बहुत ही लंबी
और सुरक्षित रहे मेरा भी संसार,
इसीलिए इस बार, 
नहीं गई मैं बाज़ार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
ना ही कोई रेशम का धागा, 
ना मैं लाई मिठाई,
नहीं आऊंगी इस बार तेरे घर,
पर मत करना भैया लड़ाई,
भाभी से बँधवा लेना धागा,
और याद करना मेरा प्यार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
सारा साल है फीका अपना,
नहीं मना कोई भी त्यौहार,
घर ही घर में कैद हुए सब,
बस बचा रहे हैं परिवार,
खर्चे बढ़ते, घटती कमाई,
पर नहीं शिकायत भाई,
बस ये वक्त जल्द निकल जाए,
ऐसी देती हूँ दुहाई,
फिर से लगे सावन की झड़ियाँ,
झूले-मेलों की आये बहार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
आने वाला है राखी का त्यौहार।



Hariyaali Teej (Hindi)

हाथों में रचाकर हरी-हरी मेहँदी,
कलाईयों में हरी चूड़ियाँ डालूँ,
हरी साड़ी लपेट बदन पे,
खुद को हरी धरती सा सजा लूँ,
सखियों संग झूमूं किसी बगीचे में,
साज-श्रृंगार की बातें बना लूँ,
मगर क्यूँ नहीं आज सही मायने में
मैं ये त्यौहार मना लूँ,
पार्लर की बजाय नर्सरी को जा
चंद नए पौधे लिवा लूँ,
हाथों को मेहँदी की जगह
गीली मिट्टी से सजा लूँ,
और खुद सँवरने से पहले
एक पौधे को सँवारने की जिम्मेदारी उठा लूँ,
हरे बगीचे में तो सब जाते हैं,
पर आज किसी सूखे स्थान को हरा-भरा बना लूँ,
और उस हरे पौधे की दुआ से ही आज,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ।



Hum Paudhe (Hindi)

खरपतवार की तरह उगे हुए थे
हम जंगल के पौधे,
मज़ा बड़ा था, बस डरते थे,
कोई हमें नहीं रौंदे,
उस खुले अल्हड़ बचपन को हटा
किसी ने सभ्यता सिखलाई,
हाँ, निखारा व्यक्तित्व को मेरे
और नई जमीन दिखलाई,
आज सभ्य हूँ, सही जगह हूँ,
देती आश्रय सबको,
पर वो मासूमियत-अल्हड़ता चली गई,
ढूंढ़ रही मैं जिसको,
पूर्णता तो कभी नहीं थी,
बस तब था अबोध मन प्यारा,
अब संकटों से झूझता सा जीवन,
जग कहता इसे अनुभव हमारा।



Coronatime Humor (Humor)

तब

पत्नी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतज़ार,  
हाथों में था पति के लिए एक उपहार,  
आते ही पति के हुई वर्षा सेंट की,  
और गले में डाला बाहों का हार,  
भीतर जाते ही दिया पानी,  
चलाई कूलर की ठंडी बयार,  
दिखा कर फेवरेट खाना पत्नी यूं चिल्लाई,  
जानू, बाद में लेना बदल कपड़े,  
पहले चखो घर की बनी रस मलाई।  

अब

पत्नी आज भी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतजार,  
हाथों में था पति के लिए सेनेटाइजर का उपहार,  
और दस कदम की दूरी बना वो चिल्लाई,  
कहीं किसी से की तो नहीं हाथ मिलाई,  
चलो अब बंद है तुम्हारा हवा, पानी,  
सबसे पहले नहा कर बहाओ कोरोना प्राणी,   
फिर अपने कपड़े आप ही धुल कर आना,  
तभी मिलेगा तुम्हें कोरोना टाइम में खाना।



Thank You God (Hindi)

धन्यवाद

जब जब मैंने खुद को सेवाकार्य में रत कुछ महान पाया,
धन्यवाद हे प्रभु! तुमने मुझसे महान सेवादार दिखलाया,
जब लगा तेरी भक्ति में लीन मैं कोई साधवी हो गई,
तो धन्यवाद प्रभु! पुनः मोह में फँसा, मेरा भ्रम हटाया,
जब लगा कुछ नया खोज पाई इस जगत में,
धन्यवाद प्रभु! तुमने पहले किये गए शोध को पढ़वाया,
जब लगा संसार में सबसे अनोखी प्राणी हूँ मैं,
तो तुमने मुझसे अनोखे प्राणियों से मिलवाया
और तो और जब सबसे दुःखी होने का आभास हुआ,
तो धन्यवाद कि तुमने तभी मुझसे ज्यादा पीड़ित दिखलाया,
धन्यवाद कि मैंने सदा अकेले चलना चाहा
और तुम किसी न किसी रूप में मेरे साथ चलते रहे,
मुझे लगा कि मुझे कोई नहीं सुन रहा,
पर तुम हमेशा मुझे सुनते रहे,
हर बाधा से निकाला, हर परीक्षा में सफल कराया,
कभी दिया सबक और कभी बिखरा दी अपनी माया,
धन्यवाद हे प्रभु! मुझे एक बहुत ही आम सा खास जीवन देने के लिए
और धन्यवाद मेरा ये धन्यवाद सुन लेने के लिए।



Ganpati Atharvsheersham (Audio + Hindi)



श्री गणपति अथर्वशीर्षम्

हरिः ॐ ॥

नमस्ते गणपतये। समस्त जीवों(योनि/जाति) के स्वामी को नमस्कार है।
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि। केवल आप ही वो प्रत्यक्ष सूक्ष्मतम तत्व हैं जो परोक्ष चैतन्य (आत्मा) को आवरण दे, प्रत्यक्ष बनाता है।
त्वमेव केवलं कर्तासि। आप ही समस्त सृष्टि की उत्पत्ति के कारण स्वरूप हैं।
त्वमेव केवलं धर्तासि। आप ही केवल समस्त सृष्टि को धारण (पालन) करते हैं।
त्वमेव केवलं हर्तासि। आप ही केवल सृष्टि का हरण (अंत / संहारकर्ता) करते हैं।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि। आप ही सत्य स्वरुप सम्पूर्ण ब्रह्म (एक निर्विशेष, सर्वव्यापी, स्वप्रकाश, नित्य, स्वयं सिद्ध चेतन तत्त्व) हैं।
त्वं साक्षादात्मासि नित्यम्। आप ही साक्षात् नित्यात्मा (समस्त सृष्टि की निरंतर चेतना) हैं।
(इस प्रकार यह आपका ब्रह्म अद्वैत स्वरूप है।)

ऋतं वच्मि। उचित कहती हूँ (दैवीय वास्तविकता बतलाती हूँ)।
सत्यं वच्मि। सत्य कहती हूँ (सार्वभौमिक सत्य कहती हूँ)।
कि सम्पूर्ण सृष्टि में प्रत्येक प्राणी और दृश्य तथा अदृश्य में निहित ऊर्जा और चेतना का एक ही स्रोत हैं, जो गणेश जी (ईश्वर) आप हैं।

अव त्वं माम्। आप मेरी (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव वक्तारम्। इस स्तोत्र के (इस अनुभूति को बताने वाले) वक्ता की रक्षा कीजिये।
अव श्रोतारम्। इस स्तोत्र के (इस अनुभूति को सुनने वाले) श्रोता की रक्षा कीजिये।
अव दातारम्। इस स्तोत्र के ज्ञान के दाताओं (इस अनुभूति के ज्ञान को अग्रेषित करने वाले) की रक्षा कीजिए।
अव धातारम्। इस स्तोत्र को स्मरण करने वालों (इस अनुभूति के ज्ञान को स्मृति में जीवित रखने वाले) की रक्षा कीजिए।
अवानूचानमव शिष्यम्। इस स्तोत्र को दोहराने वाले शिष्यों की रक्षा कीजिए।
अव पश्चात्तात्। हे गणेश जी! आप पीछे से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव पुरस्तात्। आगे से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव चोत्तरात्तात्। उत्तर की ओर से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव दक्षिणात्तात्। दक्षिण की ओर से (इस अनुभूति की) रक्षा कीजिये।
अव चोर्ध्वात्तात्। उर्ध्व भाग से1



Go Get Goa

Goa - A place of juvenility, enjoyment and happiness... A place for the youngsters and couples with enjoyment for entire day and night... A place which rocks on waves in the day time and in the casinos and cruise at night. It is a true saying that sometimes path is more interesting than the destination. Moreover companions in any journey are very important. Like-minded people with full mood of enjoyment and a destination like Goa... what else is needed to thrill and chill your daily ro...


Vipassana Dhamma Thali Jaipur Review

'Sadhana' means 'To attain some goal, keeping yourself focused, calm and determinant onto it; only by keeping mind away from any type of distractions.' 'Samadhi' means 'To keep your body in a particular straight posture and become a viewer of sensations on body parts without reacting on them.' 'Prajna/Pragya' means 'To receive the knowledge about truths... the truths which you can observe and feel within you and around you.' And this is the context behind 'Vipassana'. Vipassana Meditatio...


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Feelings

Hariyaali Teej (Hindi)

हाथों में रचाकर हरी-हरी मेहँदी,
कलाईयों में हरी चूड़ियाँ डालूँ,
हरी साड़ी लपेट बदन पे,
खुद को हरी धरती सा सजा लूँ,
सखियों संग झूमूं किसी बगीचे में,
साज-श्रृंगार की बातें बना लूँ,
मगर क्यूँ नहीं आज सही मायने में
मैं ये त्यौहार मना लूँ,
पार्लर की बजाय नर्सरी को जा
चंद नए पौधे लिवा लूँ,
हाथों को मेहँदी की जगह
गीली मिट्टी से सजा लूँ,
और खुद सँवरने से पहले
एक पौधे को सँवारने की जिम्मेदारी उठा लूँ,
हरे बगीचे में तो सब जाते हैं,
पर आज किसी सूखे स्थान को हरा-भरा बना लूँ,
और उस हरे पौधे की दुआ से ही आज,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ।



Adhoori Khwahishen... (Hindi)

जिंदगी में जरुरी नहीं कि हर ख्वाहिश पूरी हो,
कोई जरुरी नहीं कि हर रात नूरी हो,
वो तो नजरिया इंसां का है, जो है उसे देखता,
बदलता, ढालता, ढलता और सहेजता,
अंधियारे में सायों से ही वो बनाता नए चित्र,
अधूरी ख्वाहिशों में भी भरता रहता रंग विचित्र,
इन्हीं चित्रों में ढूंढ ख़ुशी, पूरी करता ख्वाहिशें,
क्या हुआ ख्वाहिशें बदलीं और मिल गई नई मंज़िलें,
जो ख्वाब पूरे न हों तो उनके पीछे क्या भागना,
ख्वाब लो तुम बदल अपने, जिंदगी जी लो यहाँ,
ना बीते पर बस है अपना, ना आने वाले का यकीं,
जी सको तो जी लो हर पल, मानो जैसे ये ही है आखिरी,
लाख गम हैं जमाने में, मैं क्यूँ दूँ इक और मिला,
कारवां क्यूँ न शुरू कर दूँ, अपना मैं इक कदम बढ़ा,
फ़लसफ़े तो बन ही लेंगे, जब दिल में है इतना हौसला,
सारे ख्वाब भी पूरे होंगे, बस अब शरू है सिलसिला,
आँख मेरी आज नम है, दिल में है छाया ज़लज़ला,
चंद अधूरी ख्वाहिशें, चुभती हैं दिल में, करतीं गिला,
कर दूंगी उनको भी मैं ठंडा, अपनी नज़मों के रंग मिला|



Darpan Men Tum Nazar Aaye... (Hindi)

दर्पण में तुम नज़र आये...

हे प्रभु! देखा जो दर्पण तो तुम नज़र आये,
प्यारी सी मूरत में तुम मुस्काये,
मेरी सूरत में तो ढूँढ न पाई तुमको,
पर दर्पण को देख नव-विचार मन में आये।

दर्पण धवल से भी धवल, मुझको सब कुछ दिखाए,
झूठ नहीं बोले, मेरी सच्ची सूरत बताये,
कहीं दिखे ब्रह्माण्ड उसमें, लगे सबकुछ समाये,
फिर भी दर्पण श्वेत नहीं, श्याम वर्ण कहलाये।

तुम भी श्यामवर्णी कृष्ण! करते सबको आकर्षित,
तुम्हें देख जन खुद को पा जाते, होते सभी हर्षित,
तेरे मुख भीतर भी है ब्रह्माण्ड समाया,
कहीं दर्पण सा रूप तो तूने नहीं पाया?

तुम्हारे ही सम दिखती, सबकी सूरत उसमें,
जैसा रूप बनाकर देखो, वैसा ही दिखे उसमें,
ना कभी तुम डिगे सत्य से, ना कभी दर्पण झूठ बोले,
जो जैसा हो और जितना हो, बिल्कुल बराबर ही तोले।

हे श्याम! तुम्हारा रंग साँवला, फिर भी निराला,
कहीं वो पारद सा तो नहीं था, जो चमके आला-आला,
पारद का आकार कुछ नहीं, सब द्रव्यों में वो भारी,
एक ही पल में पारद में मुझे तेरी खूबी मिलीं सारी।

आ जाओ श्याम! अब देओ बतलाये,
कैसी सूरत थी तेरी जो सबके मन को भाये,
एक बार आकर तुम मेरे ये सारे भ्रम मिटा दो,
आओ आओ श्याम अब अपनी सूरत तुम दिखा दो...
... आओ आओ श्याम अब अपनी सूरत तुम दिखा दो।



Kis Vidhi Aau Dwaar Tihaare (Hindi-Poetry)

किस विधि आऊँ द्वार तिहारे...

कुबुद्धि, कुसंगी, हूँ मैं कुमार्गगामी,
नहीं मानूँ तेरा कहना, करती हूँ मैं मनमानी,
अपनी सोच से ही उपजाए, मैंने ये मायाजाल,
पहले तो मनभाये, पर अब हैं जी का जंजाल,
जी का जंजाल हैं ये, अब हैं जी को जलाते,
हैं ये पाप के घड़े, पर हैं मन को लुभाते।

दुर्व्यसनों को छोड़, मैं आऊँ कैसे बंधन तोड़,
हे नाथ! करो सहाय, बताओ आप ही कोई उपाय,
उपाय हो ऐसा कि मन पवित्र हो जाए,
ना रहे कोई इच्छा अधूरी, ये जीव तृप्ति पाए।

नित-नित आऊं द्वार तिहारे, तेरी ज्योति से करूँ मन पावन,
मन-मंदिर में बिठाऊँ तुझको, जो पूर्ण स्वस्थ हो मेरा अन्तर्मन,
अंतर्मन से आती ध्वनि तेरी, उसे साफ़-साफ़ सुन पाऊँ,
मन के भीतर, जग में बाहर, मैं तुझको पा जाऊँ।

ना कुछ बुरा दिखे जग भीतर,
ना मन कुत्सित मार्ग पर जाए,
मोह-माया-व्यसन जिन्हें तुमने छुड़ाया,
उनसे लो अब मेरे मन को बचाये।

तेरी शक्ति, तेरी इच्छा बिन,
ये सब संभव नहीं हे नाथ!
अब देर ना कर, तू मेरे द्वारे आजा,
ले चल मुझको अपने ही साथ,
ले चल, ले चल, अब तू ले चल,
ले चल मुझको अपने ही साथ।



Teej Ki Sawaari (Hindi)

लहर-लहर लहराये लहरियो,
बरसे बदरा, बोले मोरियो,
गाये पपीहा, कोयल कुहुके,
आतीं हैं मैया रुक-रुक के...

पालकियों की शान है आई,
बघ्घियाँ भी सजी हैं भाई,
स्वर्ण-रजत से भरे हैं थाल,
मुक्ताहार, और भी माल...

आगे-आगे चलते हैं हाथी माता के,
ऊंट-घोड़े सजे खड़े हैं जीवनदाता के।

देखो इनकी चुनरी प्यारी,
देखो इनका घघरा भारी,
घघरे पर क्या है चित्रकारी,
सब अनमोल भये हैं...

सोलह सावन झूल लिए हैं,
सखियों से सब भेंट लिए हैं,
सोलह श्रृंगार माँ ने किये हैं,
मेंहदी से हाथ सजा लिए हैं...

उनके दर्शन पाने आये, शीश झुकायें, सब माता के,
सच्चा सुख मिलता है, अपने जीवनदाता से।

माता मेरी, माता भवानी,
शिव से है ये प्रीत पुरानी,
कथा नहीं जाए ये बख़ानी,
शिवपुर को हैं चलीं भवानी...

मांग भर रहे हैं त्रिपुरारी,
साथ खड़े शिवगण भयकारी,
गौरी माँ की शोभा भारी,
सब के सब मगन भये हैं...

आओ-आओ दौड़ के आओ पाने दर्शन माता के,
सच्चा सुख मिलता है, अपने जीवनदाता से।

इसी कथा के प्रतीक में अभी,
मना रहे तीज-त्यौहार सभी,
आतीं हैं मैया तीजों में,
जब बरखा छींट पड़े हैं...

माँ की लीला अपरम्पारी,
देख-देख हरषे नर-नारी,
नर-नारी हरषे अति सुन्दर,
माँ दे रहीं सबको इच्छित वर...

सारा जग है उमड़ पड़ा पाने आशीष माता के,
सच्चा सुख मिलता है, अपने जीवनदाता से।

आओ देखें माँ की सवारी,
उनकी शोभा है अति प्यारी,
खायें झूले, मचाएं धूम,
मस्ती में सब रहे हैं झूम...

मैया के आगे हम नाचें,
खूब बजाएं ढोल-नताशे,
कर प्रणाम गौरी मैया को,
बांटो बच्चों में तुम बताशे...

सज-धज कर सब आये देखो, भक्त माता के,
सच्चा सुख मिलता है, अपने जीवनदाता से।

करो आरती, गाओ स्तुति,
मंगलकारी गीत सुनाओ,
अपने सुहाग की करो प्रार्थना,
और अमर वर पाओ...
गाओ गाओ गाओ सभी, मंगलगीत गाओ,
हाँ गाओ गाओ गाओ सभी, मंगलगीत गाओ।

परणाम कर लो सभी, तीज माता के,1



Ankahe Ansune Sawal (Hindi)

जब कुछ नहीं तो क्यूँ बोलती हैं तेरी निगाहें...
करतीं हैं मुझसे दो-चार बातें,
जुबां तेरी भी चुप है, जुबां मेरी भी चुप है,
तो कैसे बोलते-बोलते कटती हैं रातें...

मेरे हर सवाल पर तेरी खामोशी कहती है,
मैं नहीं तेरा, तू नहीं मेरी...
तो फिर भी क्यूँ ये लगता है कि जैसे चोरी से,
तेरी इज़ाजत के बग़ैर...
करने लगती हैं, तेरी निगाहें कई बातें...

क्यूँ आ जाती है शऱारत तेरे मन में,
जो सामने मैं हूँ होता...
क्यूँ लगती है तू मुझे मेरी हमदम, मेरी छाया...

क्या ये मोहब्बत है... मेरे मन की..., मेरे मन में...,
या सच में तू भी उसी पशोपेश में है... जहाँ मैं हूँ...,
और चाहती है तू भी जानना उत्तर...
चंद उन अनकहे-अनसुने सवालों के।



Krishna Kaun Hai... (Hindi)

कृष्णवर्णी 'कान्हा' या 'कृष्ण' सम काला

कृष्ण तो है वो जो करता है आकृष्ट,
समस्त इन्द्रियों को वश में कर, करवाये काम अभीष्ट।
निश्छल भक्ति का जो है दाता, वही जगत में कृष्ण कहाता,
शिव-विष्णु का रूप वही है, पूर्ण ऊर्जा के साथ जो आता।
साक्षात् परम ब्रह्म वही है, वही है अतुलित बुद्धि का स्वामी,
गौ-गोपियों का प्राणप्रिय वही है, वही है सच्चा अन्तर्यामी।
जगतरूप-जगदीश्वर वो है, वही सृष्टि का आधार,
प्रकृति में बीजस्वरूप वही है, सगुण और साकार।

ये है कृष्ण, तो 'कृष्ण वर्ण' क्या है...
जो 'कृष्ण' के गुण हैं...
क्या 'काला रंग' भी रहा उन्हें समा है?

'कृष्ण' सम 'काला' भी करता है आकृष्ट,
समस्त रंगों को अवशोषित कर बनता है विशिष्ट।
ज्यों सब को समाहित कर, नहीं करे कोई अभिमान,
ऐसे ही अंधकारमय बन, 'काला' नहीं कराता होने का भान।
जहाँ कुछ नहीं, वहाँ भी वो है, बन प्रकृति का अभिन्न अंग,
जब कुछ न था इस धरा पर, तब भी फैला था ये ही रंग।
आज भी जिस अनजान शक्ति से ब्रह्माण्ड है बँधा हुआ,
उसके केंद्र में है काल-छिद्र विकराल रूप में पड़ा हुआ,
उसने ही बाँध रखा है, दूर-दूर के पिण्डों को,
वो ही उनके सृजन का कारण और लील जायेगा वो सबको।

क्या ब्रह्मा-विष्णु-महेश सा नहीं उसका व्यवहार,
क्या पूर्ण ऊर्जा का स्रोत वो नहीं, कृष्ण रूप अवतार?
तो क्या कृष्ण कथा है उपमान-उपमेय से रची हुई,
ब्रह्माण्ड की कथा क्या है, अलंकारों से सजी हुई?

'कृष्ण' के अवतार को मन में विचार लो,
इस ब्रह्माण्ड में उनकी कथा को सार लो,
तो 'कृष्ण', रंग से कहीं आगे एक व्यक्तित्व बन जायेगा,
'कृष्ण' को समझने का आनन्द तब ही तो आयेगा।
'कृष्ण' के 'काले' और 'राधा' के 'प्रकाश' से तब,
तुम्हारा मिलन छन भर में ही हो जायेगा।

कृष्ण के काले और राधा के प्रकाश से तब,
तुम्हारा मिलन छन भर1



Friendship Day (Hindi)

आज अपने पुराने दोस्तों से मिलने गई थी....
ना आँख में काजल डाला था
ना कान में पहनी थी बाली
एक पुरानी जींस और शर्ट मैंने डाली
ना सेल्फ़ी खिंचवानी थी
ना मेक-अप से ख़ुद को छिपाना था
मैं जैसी थी, मैं जो भी थी
वैसे ही मिलने जाना था
मिलना था मेरी रूहों से
जिनकी रूहों में मैं थी बसी
कुछ उनकी सुनके आना था
कुछ अपनी कहने जाना था
जो सोचा उससे ज़्यादा मिला
आज लगा की फिर मैं पूरी हुई
शुक्रिया मेरी उन रूहों का
जो आज फिर मुझ में आ मिलीं
ना नक़ाब था, ना कोई पर्दा
बस बातों में हम घुलते गए
कुछ कहते गए, कुछ सुनते गए
मन की परतों को चुनते गए
ना शिकवे किए
ना वादे किए
बस जो मन में था
वही बातें किए
जब चुप हो गए
तो थोड़ा रो गए
और फिर हँस लिए
और हम चल दिए
और यूँ इस तरह
आज फिर पूरा हुआ
दोस्ती का ये फ़र्ज़
आज दोस्ती के दिन।



Shri Krishn (Hindi)

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

सबके मन को हरने वाले,
भक्ति में आकर्षित करने वाले,
'श्री' को धारण करने वाले,
सबसे निराले आले-आले,
आते हैं श्री कृष्ण...
श्री कृष्ण, श्री कृष्ण, श्री कृष्ण
बोलो जय जय जय श्री कृष्ण।

गौओं के वंदनीय, नन्हे गौ पालक,
गौ के रक्षक, गौचारी बालक,
गौ प्रिय, गौ वर्धक, गौ रमणीय,
गौ संग आते हैं गोविन्द वंदनीय,
आते हैं गोविन्द...
गोविन्द, गोविन्द, गोविन्द,
बोलो जय जय जय गोविन्द।

विघ्नों का हरण करते हरि प्यारे,
बंधनों से मुक्ति देते वो 'सखा' रे,
हरि के रूप, चौसठ कला वाले,
सबसे प्यारे, वो सबसे निराले,
आते हैं हरे...
जय हरे, श्री हरे,
बोलो जय जय जय श्री हरे।

'मुर' राक्षस को मारने वाले,
संत जनों को तारने वाले,
मेरे मन में भी हैं कई दानव,
उन्हें हरा 'मुरारी', बनाओ मुझे मानव,
ऐसे आते हैं मुरारी...
बोलो मुरारे, जय मुरारे,
बोलो जय जय जय मुरारे।

तुम हो नाथ, मेरा देना सदा साथ,
थाम लो हाथ, अब आओ जगन्नाथ,
मुझे लो उबार, कर रही मैं पुकार,
हे नाथ, जय नाथ, जय जय हे नाथ,
बोलो हे नाथ, जय नाथ,
बोलो जय जय हे नाथ।

नारायण के रूप तुम्हीं हो,
चौसठ कलाओं के भूप (राजा) तुम्हीं हो,
तुम ही रक्षक, तुम ही हो पालक,
तुम ही लक्ष्मीपते नारायण कहाते,
शत्रु-विनाश को, भक्त की पुकार पर,
नारायण गरुड़ लेकर शीघ्र-शीघ्र आते,
जय नारायण, लक्ष्मी-नारायण,
बोलो जय जय जय हे नारायण।

वासुदेव-देवकी की आँखों के तारे,
जसोदा-नन्द के लाल, गोपियों के प्यारे,
भाद्रपद अष्टमी की काली रात में तुम आये,
सबके प्राणों (वसु) के रक्षक, वासुदेव-नंदन कहलाये,
जय वासुदेवाय, जय वासुदेवाय,
बोलो जय जय हे वासुदेवाय।

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।



Save The Nature

:: What was in my mind :: Nature is our mother. We are surviving on earth just because of it. If we destroy it or do over exploitation... it will not be available for our coming generations. So we should save natural resources and use them wisely. On the occasion of World Environment Day on 5th June, here is one another composition of my brother, which is in the form of a drama show. Hey Man! Hey Man! Look in-front-of you... We are the big trees... We are calling you... We are standing...


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Manali Memories - Part (2)

So as I was telling you in my last article that we have booked a government bus in 150 per person for Kullu and Manikaran tour for the third day trip and we were very happy that we maintain our budget by saving money here... So here started the next morning. Himalaya Early Morning View from My Hotel As per my habit I wake up early and got ready first, while my friends were getting ready, I was viewing the calm and magnificent Snow-White Himalaya from my room window. Sun rose from ri...


Ashram Memories

Today I am telling you about a totally different destination for vacation, for knowledge gain, for knowing our culture as well as staying in a calm and natural environment. A destination where your kids will play freely and you can meditate there without children's worry. A destination where you will find members of different age groups, kids, youths, elders, old-age people, all. And everybody would be talking about development of nation, about technology, about linking spirituality with techn...


Manali Memories - Part (1)

Manali in Different Seasons If there is any heaven on earth... It is here... It is here... It is here. No idea about Kashmir yet, but enchanting beauty of Manali attracts tourists all around the world. It has a totally different and new look in every season. In January it is totally white and snowfall is there. In July-August water and waterfalls everywhere, but yes that season is dangerous and slippery too. In this season you may face some landslides as well. So September to Dec...


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