You look, you observe, you understand. You think, you imagine, you associate. You feel, you insight and you express... In words... In writings. This is what I want to share here. So 'Feelings' are my insights, experiences and perspective to look this world and beyond. Come and feel what I was feeling....

Rakhi (Hindi)

आने वाला है राखी का त्यौहार

तेरी उम्र हो बहुत ही लंबी
और सुरक्षित रहे मेरा भी संसार,
इसीलिए इस बार, 
नहीं गई मैं बाज़ार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
ना ही कोई रेशम का धागा, 
ना मैं लाई मिठाई,
नहीं आऊंगी इस बार तेरे घर,
पर मत करना भैया लड़ाई,
भाभी से बँधवा लेना धागा,
और याद करना मेरा प्यार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
सारा साल है फीका अपना,
नहीं मना कोई भी त्यौहार,
घर ही घर में कैद हुए सब,
बस बचा रहे हैं परिवार,
खर्चे बढ़ते, घटती कमाई,
पर नहीं शिकायत भाई,
बस ये वक्त जल्द निकल जाए,
ऐसी देती हूँ दुहाई,
फिर से लगे सावन की झड़ियाँ,
झूले-मेलों की आये बहार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
आने वाला है राखी का त्यौहार।



Hariyaali Teej (Hindi)

हाथों में रचाकर हरी-हरी मेहँदी,
कलाईयों में हरी चूड़ियाँ डालूँ,
हरी साड़ी लपेट बदन पे,
खुद को हरी धरती सा सजा लूँ,
सखियों संग झूमूं किसी बगीचे में,
साज-श्रृंगार की बातें बना लूँ,
मगर क्यूँ नहीं आज सही मायने में
मैं ये त्यौहार मना लूँ,
पार्लर की बजाय नर्सरी को जा
चंद नए पौधे लिवा लूँ,
हाथों को मेहँदी की जगह
गीली मिट्टी से सजा लूँ,
और खुद सँवरने से पहले
एक पौधे को सँवारने की जिम्मेदारी उठा लूँ,
हरे बगीचे में तो सब जाते हैं,
पर आज किसी सूखे स्थान को हरा-भरा बना लूँ,
और उस हरे पौधे की दुआ से ही आज,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ।



Hum Paudhe (Hindi)

खरपतवार की तरह उगे हुए थे
हम जंगल के पौधे,
मज़ा बड़ा था, बस डरते थे,
कोई हमें नहीं रौंदे,
उस खुले अल्हड़ बचपन को हटा
किसी ने सभ्यता सिखलाई,
हाँ, निखारा व्यक्तित्व को मेरे
और नई जमीन दिखलाई,
आज सभ्य हूँ, सही जगह हूँ,
देती आश्रय सबको,
पर वो मासूमियत-अल्हड़ता चली गई,
ढूंढ़ रही मैं जिसको,
पूर्णता तो कभी नहीं थी,
बस तब था अबोध मन प्यारा,
अब संकटों से झूझता सा जीवन,
जग कहता इसे अनुभव हमारा।



Coronatime Humor (Humor)

तब

पत्नी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतज़ार,  
हाथों में था पति के लिए एक उपहार,  
आते ही पति के हुई वर्षा सेंट की,  
और गले में डाला बाहों का हार,  
भीतर जाते ही दिया पानी,  
चलाई कूलर की ठंडी बयार,  
दिखा कर फेवरेट खाना पत्नी यूं चिल्लाई,  
जानू, बाद में लेना बदल कपड़े,  
पहले चखो घर की बनी रस मलाई।  

अब

पत्नी आज भी गेट पर खड़ी कर रही थी इंतजार,  
हाथों में था पति के लिए सेनेटाइजर का उपहार,  
और दस कदम की दूरी बना वो चिल्लाई,  
कहीं किसी से की तो नहीं हाथ मिलाई,  
चलो अब बंद है तुम्हारा हवा, पानी,  
सबसे पहले नहा कर बहाओ कोरोना प्राणी,   
फिर अपने कपड़े आप ही धुल कर आना,  
तभी मिलेगा तुम्हें कोरोना टाइम में खाना।



Thank You God (Hindi)

धन्यवाद

जब जब मैंने खुद को सेवाकार्य में रत कुछ महान पाया,
धन्यवाद हे प्रभु! तुमने मुझसे महान सेवादार दिखलाया,
जब लगा तेरी भक्ति में लीन मैं कोई साधवी हो गई,
तो धन्यवाद प्रभु! पुनः मोह में फँसा, मेरा भ्रम हटाया,
जब लगा कुछ नया खोज पाई इस जगत में,
धन्यवाद प्रभु! तुमने पहले किये गए शोध को पढ़वाया,
जब लगा संसार में सबसे अनोखी प्राणी हूँ मैं,
तो तुमने मुझसे अनोखे प्राणियों से मिलवाया
और तो और जब सबसे दुःखी होने का आभास हुआ,
तो धन्यवाद कि तुमने तभी मुझसे ज्यादा पीड़ित दिखलाया,
धन्यवाद कि मैंने सदा अकेले चलना चाहा
और तुम किसी न किसी रूप में मेरे साथ चलते रहे,
मुझे लगा कि मुझे कोई नहीं सुन रहा,
पर तुम हमेशा मुझे सुनते रहे,
हर बाधा से निकाला, हर परीक्षा में सफल कराया,
कभी दिया सबक और कभी बिखरा दी अपनी माया,
धन्यवाद हे प्रभु! मुझे एक बहुत ही आम सा खास जीवन देने के लिए
और धन्यवाद मेरा ये धन्यवाद सुन लेने के लिए।



Pita ka Pyar (Father's Love) (Hindi)

# एक जंगल ऐसा भी

बड़े प्यार से किसी पिता ने
बेटे जी के सुख की ख़ातिर
बना दिया है प्यारा जंगल
ताकि बच्चे छोड़ें दंगल।
कहीं पे बंदर, कहीं बघेरा,
कहीं डला है शेर का डेरा,
कहीं पे हाथी, कहीं हिरण है,
नदी में पड़ती सूर्य किरण है।
जुगत लगा कर, चीज़ बचा कर,
जोड़-तोड़ कर बना है सारा,
प्यारे बच्चे भूल भी जायें,
याद रखेगा बाप हमारा।
माँ की ममता अपनी जगह है,
बाप के प्यार का नाम नहीं है,
सारे दिन की थकान के बाद,
रातों को उसका काम यही है।
गुमनामी ही उसे मिलेगी,
भूल जाएंगे इस प्यार को इक दिन,
याद रखेगा परमपिता पर,
उसके प्यार को तारे गिन-गिन।



Diye Ki Lau (Hindi)

दिये की लौ

दिये की लौ,
मेरे मनोभावों सी,
कभी अदम्य,
कभी वो मद्धम,
कभी चंचल अनुरागों सी,
कभी खुद जलती,
कभी जलाती,
कभी विरक्ति दर्शाती सी,
चाहे जो, चाहे हो जैसी,
पर सदा प्रकाश फैलाती सी,
उज्ज्वल सी वो,
निर्मल सी वो,
ईश्वर के लिए स्थान बनाती सी,
निराश मन में,
आशा भर दे,
ऐसी कान्ति बिखराती सी,
दिये की लौ,
मेरे मनोभावों सी,
जैसी हूँ,
वैसा दिखाती सी।



Sapna (Hindi)

शब्दजाल


मेरा सपना मैं सुना सकती हूँ,
पर मेरी सपना को मैं सुना सकती नहीं।
मेरा सपना खुली आँखों से दिखता नहीं,
पर मेरी सपना को मैं,
आँखों में ही छुपा सकती नहीं।
मेरा सपना सब कह देता है,
पर फिर भी चुप ही रहता है,
मेरी सपना कभी कुछ कहती नहीं,
पर चुप तो वो रहती भी नहीं।
मेरा सपना तो मेरा ही अपना है,
मुझमें समाया, मुझमें जन्मा,
मेरी सपना मुझसे भी आगे है,
फिर भी है मुझसे ज्यादा मेरी,
मेरा सपना तो अजनबी है लेकिन,
मेरी सपना तो है मेरे सपने जैसी।
शब्दों का मायाजाल यहाँ,
है भँवर बड़ा जंजाल यहाँ,
जब सपना है मेरा पुरुष साथी,
तो क्यूँ उसमें स्त्री ध्वनि आती,
क्यूँ सपना मुझको आता है,
और मेरी सपना है चल आती।



Dar Lagta hai (Hindi)

डर लगता है उस घूरते हुए चेहरे से,
कभी मेरे हँसने पर तो कभी उदास होने पर,
कभी मेरे गाने पर तो कभी बाहर जाने पर,
वो चेहरा मुझे घूरता रहता है,
न जाने क्यूँ वो हँसता नहीं,
मुझसा है, पर मुझसा नहीं,
वो जब चाहे, जहाँ चाहे मुझे घूरता है,
और कल जब उसे हँसते देखा,
तो उस भद्दी हँसी में उसका काला चेहरा
और भी डराने लगा,
डर लगता है उस घूरते हुए चेहरे से,
तो कल मैंने उसे घूर लिया,
तो मेरे इस साहस को दबाने के लिए
वो बोला,
मैं तुम्हें डराना नहीं, बचाना चाहता हूँ,
तुम्हारे कोमल मन को कोई ठेस न लगे,
ये ही कार्य है मेरा,
मैंने माना और मुँह फ़ेर लिया,
पर फिर सोचने लगी...
ये वही घूरने वाला चेहरा तो है,
जो हर बार अलग-अलग तरीके से,
ठेस लगाता है मेरे कोमल मन को,
हाँ, बहुत डर लगता है,
उस घूरते हुए चेहरे से,
जो हर घड़ी मेरा पीछा भी करता है
और मेरा इंतज़ार भी।



Kaisa Saal (Hindi)

जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है,
कहीं कोरोना, कहीं अम्फान,
तो कहीं टिड्डियों का बवाल है।

वक्री सारे ग्रह बैठे हैं
मित्र भी शत्रु बन बैठे हैं,
दांव लगी है मेहनत सारी,
पैसों का भी सवाल है,
जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है।

खर्चे सिर चढ़ कर बोले हैं,
उधारी के फंदे घोले हैं,
फिर भी नहीं फ़िकर है उनकी,
क्योंकि जान खुद ही बेहाल है,
जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है।

आपद का अम्बार लगा है,
नहीं कोई व्यापार चला है,
तंगी-भूख-मंदी से घिरे हैं,
सबकी बिगड़ी चाल है,
जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है।

लगता है दुनिया डूबेगी,
आधी आबादी न रहेगी,
ऊपर से नीचे तक खुलता,
बड़ा काल का गाल है,
जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है।