Kis Vidhi Aau Dwaar Tihaare (Hindi-Poetry)

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:: What was in my mind ::
Human life is full of sins and only the almighty God can save us and bring us out from all our faults and sins. So here I am praying and asking God to remove all my impurities and make my soul pure and truthful so that it can listen God's will clearly and follow it...

किस विधि आऊँ द्वार तिहारे...

कुबुद्धि, कुसंगी, हूँ मैं कुमार्गगामी,
नहीं मानूँ तेरा कहना, करती हूँ मैं मनमानी,
अपनी सोच से ही उपजाए, मैंने ये मायाजाल,
पहले तो मनभाये, पर अब हैं जी का जंजाल,
जी का जंजाल हैं ये, अब हैं जी को जलाते,
हैं ये पाप के घड़े, पर हैं मन को लुभाते।

दुर्व्यसनों को छोड़, मैं आऊँ कैसे बंधन तोड़,
हे नाथ! करो सहाय, बताओ आप ही कोई उपाय,
उपाय हो ऐसा कि मन पवित्र हो जाए,
ना रहे कोई इच्छा अधूरी, ये जीव तृप्ति पाए।

नित-नित आऊं द्वार तिहारे, तेरी ज्योति से करूँ मन पावन,
मन-मंदिर में बिठाऊँ तुझको, जो पूर्ण स्वस्थ हो मेरा अन्तर्मन,
अंतर्मन से आती ध्वनि तेरी, उसे साफ़-साफ़ सुन पाऊँ,
मन के भीतर, जग में बाहर, मैं तुझको पा जाऊँ।

ना कुछ बुरा दिखे जग भीतर,
ना मन कुत्सित मार्ग पर जाए,
मोह-माया-व्यसन जिन्हें तुमने छुड़ाया,
उनसे लो अब मेरे मन को बचाये।

तेरी शक्ति, तेरी इच्छा बिन,
ये सब संभव नहीं हे नाथ!
अब देर ना कर, तू मेरे द्वारे आजा,
ले चल मुझको अपने ही साथ,
ले चल, ले चल, अब तू ले चल,
ले चल मुझको अपने ही साथ।

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