Shri Krishn (Hindi)

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:: What was in my mind ::
In Sanskrit each syllable has a distinct meaning and by conjunction of letters, it creates a unique word with different meanings. Indian God names are not an exception of it. A small name with a large meaning to understand his Godly powers and a complete Mantra consists many names of God in particular order and rhyme which create extra-ordinary powers while chanting these shlokas. Here I tried to elaborate a little, Lord Krishna's smallest and sweetest mantra... Shri Krishn, Govind, Hare, Muraare, He Naath, Naaraayan, Vaasudevaay.

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

सबके मन को हरने वाले,
भक्ति में आकर्षित करने वाले,
'श्री' को धारण करने वाले,
सबसे निराले आले-आले,
आते हैं श्री कृष्ण...
श्री कृष्ण, श्री कृष्ण, श्री कृष्ण
बोलो जय जय जय श्री कृष्ण।

गौओं के वंदनीय, नन्हे गौ पालक,
गौ के रक्षक, गौचारी बालक,
गौ प्रिय, गौ वर्धक, गौ रमणीय,
गौ संग आते हैं गोविन्द वंदनीय,
आते हैं गोविन्द...
गोविन्द, गोविन्द, गोविन्द,
बोलो जय जय जय गोविन्द।

विघ्नों का हरण करते हरि प्यारे,
बंधनों से मुक्ति देते वो 'सखा' रे,
हरि के रूप, चौसठ कला वाले,
सबसे प्यारे, वो सबसे निराले,
आते हैं हरे...
जय हरे, श्री हरे,
बोलो जय जय जय श्री हरे।

'मुर' राक्षस को मारने वाले,
संत जनों को तारने वाले,
मेरे मन में भी हैं कई दानव,
उन्हें हरा 'मुरारी', बनाओ मुझे मानव,
ऐसे आते हैं मुरारी...
बोलो मुरारे, जय मुरारे,
बोलो जय जय जय मुरारे।

तुम हो नाथ, मेरा देना सदा साथ,
थाम लो हाथ, अब आओ जगन्नाथ,
मुझे लो उबार, कर रही मैं पुकार,
हे नाथ, जय नाथ, जय जय हे नाथ,
बोलो हे नाथ, जय नाथ,
बोलो जय जय हे नाथ।

नारायण के रूप तुम्हीं हो,
चौसठ कलाओं के भूप (राजा) तुम्हीं हो,
तुम ही रक्षक, तुम ही हो पालक,
तुम ही लक्ष्मीपते नारायण कहाते,
शत्रु-विनाश को, भक्त की पुकार पर,
नारायण गरुड़ लेकर शीघ्र-शीघ्र आते,
जय नारायण, लक्ष्मी-नारायण,
बोलो जय जय जय हे नारायण।

वासुदेव-देवकी की आँखों के तारे,
जसोदा-नन्द के लाल, गोपियों के प्यारे,
भाद्रपद अष्टमी की काली रात में तुम आये,
सबके प्राणों (वसु) के रक्षक, वासुदेव-नंदन कहलाये,
जय वासुदेवाय, जय वासुदेवाय,
बोलो जय जय हे वासुदेवाय।

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

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