Aao Ab Sheeghra Aao (Hindi-Poetry)

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:: What was in my mind ::
There are many malpractices present in the society at the name of God. Taking intoxicants, humiliation, animal oblation, charity against will, penance, hypocritical saints, etc. are name of a few of them. By this composition I just want to highlight some of these wrong deeds and asking God to come oand stop all of them or at least show right path to his devotees.

हे नाथ! ढूंढते तो तुम्हें सभी हैं,
बस सबके रास्ते अलग-अलग हैं...

कुछ को तुम सपने में देते हो दिखाई,
कुछ को तुम जागते में पड़ते हो सुनाई,
कुछ तुम्हें मंदिरों में जाते हैं ढूंढने,
कुछ की मस्जिदों में होती है सुनवाई,

कुछ को तुम ग्रंथों के पन्नों में मिल जाते,
कुछ तुमको सूली पर लटका हुआ पाते,
कुछ ढूंढते आग-हवा-पानी में तुमको,
कुछ ढूंढते संतों की वाणी में तुमको।

कल गई मैं मंदिर दिखी सूरत तुम्हारी,
पर बंद थे लोगों के नेत्र...
मन पर पड़े थे परदे भारी,

मस्ज़िद में मैंने देखा...
लाउड स्पीकर से लोगों ने पुकारा,
जैसे दूर तुम थे बैठे,
और सुनने का मन ना था तुम्हारा,

आज के मनुज ने,
तेरे कुछ कर्म अपना लिए थे,
नीति भुला दी थी तेरी,
पर कुछ अधर्म अपना लिए थे,

होली पर मैंने देखा, सब जय राधे-कृष्ण गा रहे थे,
और राधा की इच्छा के विरुद्ध, उसे छेड़े जा रहे थे,
शिवरात्रि में भांग पीकर, सारे बन बैठे तेरे बाराती,
और शरद पूनों को डांडिया में, गोपियों से रास रचा रहे थे,

जो तुमने पशु रूपी किसी असुर को था मारा,
तो आज भी उसकी बलि के पीछे था जग सारा,
जो देव रूप में तुमने कभी सोमरस पिया था,
तो उसे सुरा समझकर, मनुज उसी से जिया था,

आज का अर्जुन, 'अपने' कृष्ण की राहों पर,
अपने परिवार से ही करता है लड़ाई,
लोगों को मारकर, छल-कपट से जीतकर,
तेरी ही कही गीता की देता है दुहाई,

और वो यहाँ रुकता नहीं है...

अपने ही मुख से खुद को,
कहता तेरा पच्चीसवां अवतार,
स्वर्ण सिंहासन पर हो आसीन,
दिखाता नित-नए चमत्कार,

कहीं छल से, तो कहीं बल से, बस चाहता है
कि लोग तुझे भुला उसे भजें,
तू मूरत बन पड़ा रहे एक कमरे में,
और तेरी मुकुट-माला से वो सजें,

इसीलिए हे कृष्ण! अब और देर न लगाओ,
स्वयं सुदर्शन चक्र ले शीघ्र आओ,
अपनी प्यारी दुनिया को बचाओ,
और जो नहीं बचा पाओ तो भी...
अपने भक्तों को यथार्थ का ज्ञान तो करा जाओ।

आओ कृष्ण! अब शीघ्र आओ।

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