Bhoot Aur Bhavishya (Hindi)

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We never try to live in the present. A good amount of our life is wasted upon thinking about past or planning for future. But reality is past and future both are out of our reach. Then why human mind always think about these two? It is our birth nature, so there must be some logic behind it... So let us see what is past and what is future and is it really necessary to care about both?

भूत और भविष्य क्या है?

यादों की बारात,
सपनों की सौगात,
झूठी बुनियाद।

सच से परे,
जहाँ हैं सब मौन खड़े।

मानो या ना मानो,
ये है कल... केवल कल।
बीता या आने वाला...
जिसे देखते सब सजल।

भूत और भविष्य क्या है?

एक ठंडी राख,
जिसमें सुलगी आग,
भविष्य की ख़ातिर भूत को किया जाये याद,
भूत आये तो नहीं भूत से कम,
व्यक्ति को मिलता इससे केवल ग़म।

ये है वो ईंट, जिस पर रखी भविष्य की नींव,
जब ईंट हो ख़राब, तो ढह जाए सपनों प्यारा पुल।

भूत और भविष्य क्या है?

पर जिसने भूत जाना, वो जाने भविष्य,
वो नहीं त्रिकालवेत्ता, नहीं है वो ईश,
वो तो है साक्षात् स्वयं जगदीश।

भूत में छिपा भविष्य का ख़ज़ाना,
भूत है जैसे अनाज का एक दाना,
इसी से लेहलेहगी फसल भविष्य की,
इसी से बनेंगे भावी काम,
भूत है भविष्य का एक पैग़ाम।

भूत और भविष्य क्या है?

भविष्य है भूत की तूली से सजी तस्वीर,
जो भूत हो ख़राब, तो बिगड़े तक़दीर।

भूत से हो प्रेरणा,
शक्ति हो झेलने की,
भविष्य की वेदना।

वही सफल होगा इस जीवन पथ पर,
जो हो भूत से भविष्य की ओर अग्रसर।

भूत और भविष्य क्या है?
यह है जग का सार अनश्वर।

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