Khar (Enmity) (Hindi)

0 Comment(s)
1348 View(s)
|

:: What was in my mind ::
In our life we all have good and bad people. Some relations which we want to retain for long and some which we want to get rid off... But we have to deal with all them daily. So this poetry is dedicated to all those relations where people have a lot of things to speak but due to some boundations they just avoid.
When I saw Ocean's calmness, I found answer of many of my questions in that calmness.

बहुत ख़ार है तेरे भीतर, कुछ ख़ार यहाँ है बाकी,
लहरें-तूफ़ां अनेकों, मेरे मन के भी ये साथी।
इतने तूफानों में भी, है मौन खड़ा तू जैसे,
वैसी ही मौन हूँ मैं भी, पर शांत कहूँ मैं कैसे ...

ये हवा नहीं, ना ही मौसम, जो मन को हिला-मिला दें,
कुछ रिश्तों के बंधन हैं, जहाँ शिकवे और गिला हैं।
तुझसी नहीं बलशाली, जो सबको मैं अपना लूँ,
या तो अपने रंग में रंग दूँ, या छोड़ कर उन्हें दया दूँ ...

फिर भी शांति की तलाश, ले आई मुझे यहाँ आज,
उमड़े-घुमड़े और बरसे मेरे बादल, पिघल गई मैं आज,
आँखों से आँसू बन निकला, ख़ार मिला तुझ भीतर,
तेरे मौन से मेरे मौन को मिले अनेकों उत्तर...
तेरे मौन से मेरे मौन को मिले अनेकों उत्तर।

 2
 0
0 Comment(s) Write
1348 View(s)



0 Comments: