Gandhi Ki Kismat (Hindi)

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:: What was in my mind ::
Today there is a huge mass who believed that Gandhi was a culprit and Natho Ram Godse was correct when he shot Gandhi Ji. We are not aware of the scenarios of that time today and we all know Gandhi Ji's will was for good of India. His faith on a particular community failed. So actually he treated all his children equally, but if children did something wrong, we cannot blame the master of that family for it. At least till this extent... Kindly read my views on Gandhi Ji's and his thoughts.

अपनी अपनी क़िस्मत

हाड़ माँस का पुतला था वो,
सत्य के लिए लड़ता था,
अपने ही देश के लिए नहीं,
वो मानवमात्र से प्रेम करता था,
फिर भी उसके अपनों ने ही,
उसकी नहीं क़दर जानी,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

एक देश आज़ाद कराया,
दूजा आज़ादी पर था,
पर एक विभाजन रोक ना पाया,
ऐसा ही क़िस्मत में था,
वो क्या सिखा गया हमको,
क्या राह दिखा दी जन-जन को,
उसको नहीं याद रखा हमने,
ऐसे कैसे हम अभिमानी,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

बिन हथियार किए उसने वार,
सारे जन-मन को था एक किया,
अपना सर्वस्व लुटाकर भी,
मन में ना उसका अहं किया,
लगता सारी जनता को था,
वो अपना सा, वो प्यारा सा,
फिर भी ना जाने क्यूँ उनमें से ही,
किसी एक ने उस पर वार किया,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

उस एक को तो चलो भूल भी लो,
पर आज के जन का अब क्या करो,
जो नहीं जानते उन्हें क्या है मिला,
वो करते हैं उस संत से गिला,
ना वो पढ़ते हैं, ना समझते हैं,
बस बुराई सबकी करते हैं,
गांधी को ग़लत ठहराते हैं,
ख़ुद को सम्राट बताते हैं,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

विदेशों से सम्मान मिला,
अपने देश में ही अपमान मिला,
उसने तो कुछ नहीं चाहा था,
बस अपना फ़र्ज़ निभाया था,
वो ही था किया, जो तब था सही,
हम कौन जो कह दें, कुछ किया नहीं,
हमने अब तक क्या कर डाला,
बन बैठे बिन किए हम लाला,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

'गाँधी' होना छोटी बात नहीं,
सबको ले कर चलना, देना सीख सही,
अपने लिए कुछ भी रखना नहीं,
फिर भी अपनों की नफरत...
क्या ये बात है सही,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

माना जिन्ना-नेहरू की जगह,
वल्लभ आते तो होता क्या,
ये आज सोच हम सकते हैं,
क्यूंकि ये है बीता कल अपना,
पर तब क्या कोई कह सकता था,
कौन सही था और कौन सच्चा था,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

सब आजादी के परवाने थे,
लगता था सब दीवाने थे,
तन-धन-मन सबने लगाया था,
तब आजाद भारत को पाया था,
पर रहा ना वैसा निश्छल भारत,
सब हुए नेता की फितरत से अवगत,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

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