Nandlala Karte Hain Aguwai (Humor)

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:: What was in my mind ::
It is a humor composition of my college days. It is a light comedy with no particular person/caste or tribe to point out. It is about a young milkman who believes that he is smartest in his world and yes he is proving that too... Just read and enjoy.

बाला ने देखा आज एक ग्वाला,
याद आया उसको ब्रज का नंदलाला।

हृष्ट-पुष्ट सुन्दर, मन-मोहन मुरली वाला,
मोरमुकुटधारी और श्यामल वर्ण निराला,
वर्ण तो श्यामल प्रभु ने इसे भी दे डाला,
पर थोड़ा दुबला था ये श्यामल रंग वाला।

मुरली नहीं थी, हाथ में था सिगरेट-तम्बाकू-मसाला,
पीताम्बर की जगह इसने तन पर पैंट-शर्ट डाला,
सुन्दर आँखों पर लगाया था रंगीन चश्मा आला,
समझ रहा था खुद को हीरो, ये उल्टी टोपीवाला।

यमुना सा बहता था इसके घर के पास एक नाला,
दूध में पानी मिला इसने था अपनी दशा को संभाला,
दिव्य रथ तो नहीं था, पर था वाहन रफ़्तार वाला,
एक घंटे में पहुँचाता था वो, बस्सी से सोडाला।

रास रचैया ना सही, रसिक मिज़ाज कम नहीं था,
हीरोइनों के पोस्टरों से उसका कमरा रंगीं था,
एक नहीं तीन-तीन को, उसने था माना राधा,
बंशी बिन अपनी सीटी से ही, उसने था ये तीर साधा।

द्वारिका ना बसाई, पर कल्पना की दुनिया थी उसकी प्यारी,
राजनीतिज्ञ न था, पर थी राजनेताओं से उसकी यारी,
मोबाइल तरंगों से ही वो था अपनी दुनिया को चलाता,
शेयर-लॉटरी-सट्टे में दिन-रात अपने दिमाग को जलाता।

उसका ये अंदाज़ देख मैं बाला मुस्काई,
आज भी करते हैं नंदलाला इस दुनिया की अगुवाई...
आज भी करते हैं नंदलाला इस दुनिया की अगुवाई।

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