Two Liners (Hindi)

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:: What was in my mind ::
It is a collection of different two-liners from my diaries as well as my friend's posts. Hope you all enjoy it.

कोई क्या इतने प्यार से भी रो जाता है,
जो उसकी हर आह पर वाह ही निकल पाता है,
सुनती हैं दीवारें, पर क्यूँ आज इन्सान चुप है,
पूछता है वो कि क्या दीवारों से भी कुछ कहा जाता है।


कोई प्याला हो तो पी के भी मैं ख़ुश हूँ यारों,
मरी दुनिया में ऐसे ही जिया जाता है,
वो साँस ही क्या, जिसमें आवाज़ ना हो यारों,
इसीलिए मरते दम तक ऐसे ही पिया जाता है।


पसंद जब चाहत बने और चाहत बने जूनून,
तब दिक्कत बढ़ जाती है, जब पल को नहीं सुकून।
सुकून ढूँढू मैं गलियों में, सुकूं तो मन का मोर,
ज्यूँ चकोर उड़ता फिरे, ढूंढे चाँद चहुँ ओर।


औरों से अब क्या कहूँ, कैसे कहूँ मैं बात,
खुद में ही खामोश हूँ, मन में है उल्लास।


मितवा तुम किसी और के, नहीं करते मुझसे बात,
कल जाकर ले आये तुम, उसके लिए सौगात।


फ़ुरसत के दो लम्हे जिंदगी में मिलें... तो शायद मर जाएँ...
एक नज़र वो हमें और हम उन्हें देख लें, तो शायद प्यार कर जाएँ।

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1 Comments:



  1. Deepika Singh
    Wahh bht Khub 👏🏻👏🏻👏🏻