Yaaden (Hindi)

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:: What was in my mind ::
This piece is very near and dear to my heart as it has no dialogues but tremendous expressions. It starts with inner happiness of a young girl and ends with her devotion for his love... Read and enjoy.

मेरे अक्स का दीदार कर मैं शरमा गई,
आईने में देख तेरी कोई बात याद आ गई,
बस यूँ ही देखते, खुद को सँवारते,
पता नहीं कब सुबह बीती,
और तुझसे मिलने की घड़ी आ गई,
मिलना तो था,
पर जमीं में कदम धँस गए,
जब तेरी फ़ोटो पर चढ़ी माला के फूलों में,
मेरी चुनरी के तार फँस गए।

रोती भी हूँ और चुप होती भी हूँ,
कभी तेरे जाने को सोचकर, कभी तेरे होने को जानकर...

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