You look, you observe, you understand. You think, you imagine, you associate. You feel, you insight and you express... In words... In writings. This is what I want to share here. So 'Feelings' are my insights, experiences and perspective to look this world and beyond. Come and feel what I was feeling....

Phool Aur Taare (Hindi)

रोज़ भोर होते ही छुप जाते हो,
ऐ तारों सुबह-सुबह कहाँ जाते हो,
खिल रहे हैं फूल मेरी फुलवारी में,
कहीं वो ही बनकर तो न आ जाते हो,
देखा है मैंने बन्द होते फूलों को शाम में,
और तभी तुम्हें लुक-छिप कर वापिस आते,
अच्छा मेरा इक काम करना,
उस चमकते चाँद को बोलना,
उगाया है कमल भी इसी बगीचे में मैंने,
पर वो अभी तक खिला नहीं,
जो चाँद कमल बन आये,
तो शायद वो भी खिल जाये,
और कल की बीती रात की तरह,
मेरी फुलवारी भी पूरी हो जाये।



After Corona (Hindi)



कोरोना संकटकाल के दृष्टा

आज पूरा विश्व एक बहुत बड़े संकटकाल से गुजर रहा है। सभी देशों की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह से प्रभावित हो चुकी हैं। प्रत्येक इंसान अंदर से भविष्य को लेकर डरा हुआ है। एक बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है। आज इस संकट से न केवल वर्तमान सोच बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों की सोच भी प्रभावित होगी।

ये बहुत ही शांति की बात है कि भारत के लोग स्वयंमेव सेवाभावी हैं, ईश्वर का भजन करते हैं और आज के इस संकटकाल में नरेंद्र मोदी जी जैसे उन्नत नेता के संरक्षण में हैं। मोदी जी ने सही समय पर सही निर्णय लेकर देश को आने वाले एक बहुत बड़े संकट से बाल बाल बचाया है और वैश्विक स्तर पर उदाहरण पेश किया है। लेकिन कोई भी नेता जन सहयोग के बिना अधूरा होता है। आज सभी उनके फैसले के साथ खड़े हैं और घरों में हैं। आम जन और अनेक धनिक धन से तो अनेक तन से सेवा कार्यों को पूरा कर, अपना कर्तव्य अपनी जान की परवाह किये बिना निभा कर, अपने देश के गरीब और पीड़ित वर्ग की सहायता कर रहे हैं और मन से तो सभी मोदी जी की इस लड़ाई में उनके और उनके फैसलों के साथ खड़े ही हैं। अब बात इस पर विचार करने की है कि आगे क्या होना चाहिए और हमें हमारे देश के लिए, इस संसार के लिए क्या करना चाहिए।

अपनी भाषा, अपना धर्म, अपना देश, अपने लोग

हमें बताते हुए हर्ष होता है कि जापान के लोग कर्मठ होते हैं और अपने देश को सबसे ऊपर रखते हैं, कि फ्रांस के लोग ईमानदार होते हैं... ये सब क्या है? ये किसी देश के नेता की नहीं, उस देश के लोगों की तारीफ है जो उन्होंने अच्छे व्यवहार से देश के लिए संग्रहित की है और1



Yaaden (Hindi)

मेरे अक्स का दीदार कर मैं शरमा गई,
आईने में देख तेरी कोई बात याद आ गई,
बस यूँ ही देखते, खुद को सँवारते,
पता नहीं कब सुबह बीती,
और तुझसे मिलने की घड़ी आ गई,
मिलना तो था,
पर जमीं में कदम धँस गए,
जब तेरी फ़ोटो पर चढ़ी माला के फूलों में,
मेरी चुनरी के तार फँस गए।

रोती भी हूँ और चुप होती भी हूँ,
कभी तेरे जाने को सोचकर, कभी तेरे होने को जानकर...



Chullu Bhar Paani (Hindi-Humor)



चुल्लू भर पानी

बहुत सोचती थी,
मुहावरों की हक़ीक़त नहीं होती,
ऐसे ही किसी ने गढ़ दिए,
कमाने को रोटी।

अब चुल्लू भर पानी में कोई डूबेगा कैसे,
सोच सोच हँसती थी, ऐसी कल्पना की कैसे।

मगर जब मैं रोई, तो चुल्लू भर पानी हाथ आया,
दिल डूब चुका था मेरा, मन में बाढ़ था वो लाया।

समझी फिर हक़ीक़त, याद आई वो कहावत,
कैसे चुल्लू भर पानी ने मेरे ख़्वाबों को बहाया,
एक मन मरा था, दूजा उदास अब खड़ा था,
तनहा वो था इतना, जैसे ज़बरन हो जगत् में आया।

आँखों के चुल्लू भर पानी में नहा,
गंगा स्नान सा आनंद पा,
पवित्रता का चोला ओढ़े,
मरे मन को जला,
अब साथ मेरे खड़ा था मेरा नया मन,
पवित्र, पावन, निरपराध मेरा नया मन।



Friendship Day (Hindi)

आज अपने पुराने दोस्तों से मिलने गई थी....
ना आँख में काजल डाला था
ना कान में पहनी थी बाली
एक पुरानी जींस और शर्ट मैंने डाली
ना सेल्फ़ी खिंचवानी थी
ना मेक-अप से ख़ुद को छिपाना था
मैं जैसी थी, मैं जो भी थी
वैसे ही मिलने जाना था
मिलना था मेरी रूहों से
जिनकी रूहों में मैं थी बसी
कुछ उनकी सुनके आना था
कुछ अपनी कहने जाना था
जो सोचा उससे ज़्यादा मिला
आज लगा की फिर मैं पूरी हुई
शुक्रिया मेरी उन रूहों का
जो आज फिर मुझ में आ मिलीं
ना नक़ाब था, ना कोई पर्दा
बस बातों में हम घुलते गए
कुछ कहते गए, कुछ सुनते गए
मन की परतों को चुनते गए
ना शिकवे किए
ना वादे किए
बस जो मन में था
वही बातें किए
जब चुप हो गए
तो थोड़ा रो गए
और फिर हँस लिए
और हम चल दिए
और यूँ इस तरह
आज फिर पूरा हुआ
दोस्ती का ये फ़र्ज़
आज दोस्ती के दिन।



Deshprem (Hindi)

बहुत से तरीक़े हैं देशप्रेम दिखाने के,
ज़रूरी नहीं कि मैं बम से पाकिस्तान ही गिराऊँ।

किसी बच्चे को पढ़ाकर,
किसी पेड़ को बड़ा कर,
नशे की लत को छुड़ाकर,
किसी बिगड़े को बचा कर,

नदियों को निर्मल कर,
फसलों को सिंचित कर,
नाले को राह दिखा कर,
कचरा ना फैला कर,

गायों को पालकर,
गरीबों को दान कर,
मंदिर में सेवा कर,
सब लोगों का मान कर,

आपस में सुलह कर,
गाली-गलौंच हटा कर,
विज्ञान की बातें कर,
ज्ञान की गंगा बहा कर,

रिश्वत से दूर रहकर,
कुरीतियों को रुकवा कर,
नियमों का पालन कर,
प्रदूषण ना फैला कर,

सड़क पर ना थूककर,
होटल से सामान ना चुराकर,
धरोहरों पर नाम ना लिख कर,
ट्रेन की सीटों को ना फाड़कर,

अनेकों तरीक़े हैं, जिनसे मैं बचा सकती हूँ,
मेरे देश और मेरे देश के मान को।

ये मेरे देश की धरती है,
ये मेरी भारत माता हैं,
इनको प्रसन्न रखना मेरे मन को भाता है।
जैसा मेरा स्वभाव बना,
उससे ही कुछ रच जाऊँगी,
वो मेरी भारत माता हैं,
ऐसे ही उन्हें मनाऊँगी।



Shikaar... (Hindi)

जो शिकार होता है, वो ‘शिकार’ होता है,
क्यूँकि वो कमज़ोर है...

उसमें नहीं है ताक़त अपने आप से लड़ने की,
उसमें नहीं है ताक़त डर को पीछे छोड़ आगे बढ़ने की,
उसमें नहीं है ताक़त सच को स्वीकार करने की,
उसमें नहीं है ताक़त स्वयं को नियंत्रित रखने की,

पर जाने क्यूँ दुनिया,
उम्मीद करती है उससे ताक़त की,
जाने क्यूँ सोचती है कि वो होते तो ऐसा करते,
वो होते तो वैसा करते,

अरे वो होते ही नहीं ना...
क्यूँकि जो शिकार होता है,
वो ‘शिकार’ होता है,
क्यूँकि वो कमज़ोर है...

और ‘दुनिया’ में तो बहुत ताक़त है,
‘दुनिया’ ना तो तनहा है
और ना ही कमज़ोर...
और ‘दुनिया’ के पास ज़ुबान भी है,
इसीलिए तो वो ‘शिकार’ नहीं है,

पर जब वो अपने डर को पीछे छोड़
अपनी क्षमताओं से भी आगे बढ़ जाता है...
एक छोटा मेमना शेर से लड़ जाता है...
या सहमने की जगह भीड़ में चढ़ जाता है...

तो छीन लाता है वो एक ज़िंदगी और एक ख़ुशी,
एक नई सोच और एक नया तज़ुरबा...
जो बनाते हैं उसे भीड़ से अलग एक मिसाल,
नहीं करती दुनिया उससे फिर कोई सवाल,

और वो नहीं रह जाता ‘शिकार’|



Jara Si Baat... (Hindi)

ज़रा सी बात थी और...
मैंने मन में सोच सोच उलझा लिया
मैं चाहती थी कि तुम सुलझाओ,
पर सच में उलझन कहाँ है,
ये क्या जान पाते तुम,
पर तुम्हारी चाहते हुए भी,
ना कि गई कोशिश से,
मेरे ग़ुस्से ने जो उस पर ताला लगाया,
उसने मुझे अब बहुत दूर ला दिया,
ज़रा सी ही तो बात थी...

मैं जानती हूँ,
तुम ग़लत नहीं, अनजान थे,
और मैं परेशान,
बस बिन कहे क्यूँ नहीं समझ पाए तुम?
ज़रा सी ही तो बात थी...

अब चाहती हूँ,
जो हुआ उसे भुला आगे बढ़ जाना,
पर क्या तुम आज भी दोगे मेरा साथ?
फिर उलझ रही हूँ अपने सवालों में,
अपने ही मन में,
क्यूँ नहीं ख़ुद से खोल देती,
मेरे मन की गाँठें,
क्यूँ नहीं तुम्हें बोल देती,
जो मेरा मन चाहे,
आख़िर ज़रा सी ही तो बात थी...



Indian Oldage Love (Hindi)

साठ पार कर चुके थे दौनों,
फिर भी कहासुनी सारी थी,
इक दूजे बिन रह नहीं पायें,
पर दौनों को ज़िद प्यारी थी।

ज़िद थी भी इतनी प्यारी,
जो करती थी रिश्तों को गहरा,
इक दूजे को समझते दौनों,
इसीलिए था पहरा।

पहरा था गहरा,
नहीं देतीं मिठाई उनको सीधे,
पर उनके हिस्से की फ़्रिज में,
छोड़ देतीं थी धीरे,
पर उनके खा लेते ही,
मचता रोज़ बवाल,
साठ पार खाते हो मिठाई,
होगा तुम्हारा क्या हाल,
अब जाओ दौड़ने और
पीछे से मैं भी आती हूँ,
कहीं बीच में बैठ ना जाओ,
पूरा पता लगाती हूँ।

पता लगा लो तुम पूरा,
और पीछे मेरे आओ,
जो साठ पार मिठाई तुमने खाई,
उसको तुम भी पचाओ,
आख़िर तुम बिन कोई नहीं अब
इस दुनिया में मेरा,
तेरी ज़िदों के बिना
नहीं पचेगा खाना मेरा।

अच्छा तो ये प्यार नहीं,
इसमें भी तेरा स्वार्थ,
जो कोई और होता दुनिया में
तो करते भी नहीं बात।

करता नहीं जो बात,
तो क्या तुम चुप हो जाती,
सालों हो गए सुनते,
बस तुम अपनी गातीं,
कभी ज़बरन काम पर भेजतीं,
देकर गाली हज़ार,
रोज़ नई चीज़ों की फ़रमाइश,
इतना ही था प्यार।

हाँ इतना ही था प्यार,
बनाया तुमको लायक़,
घर संसार बसाया तेरा,
पर तुम तो रहे खलनायक,
जो भी ख़रीदा, तेरे लिए था,
नहीं अपने लिए बचाया,
फिर भी देखो तुमने मुझको,
इतना कुछ है सुनाया,
जो इतनी बुरी थी लगती,
तो क्यूँ रोज़ गज़रा थे लाते,
क्यूँ कम पैसों में भी तुम
मुझको हर वीक घुमा कर लाते।

लाता था हर वीक घुमा कर,
और तेरे लिए गज़रा,
ठंडी रहे तू, सजी रहे तू,
ये ही स्वारथ बस था,
पर मेरे प्यार को तू समझ ना पाई,
हाय री मेरी क़िस्मत,
हो चला हूँ बुड्ढा, अब तो बक्श दे,
मौत दे रही दस्तक।

मौत दे दस्तक दुश्मन के,
मैं सदा1



Desire - Chahat (Hindi)

जिस डगर से हम निकलें,
कारवां साथ हो ले,
जिस सफर पे जाएँ,
फलसफे लिखे जाएँ,
बंजर जमीन हो तो,
फसल लहलाये,
जो छू लें रेत को तो,
सब सोना बन जाए,
इतना करें करम कि,
पूछे प्रभु भी हम से,
बोल ऐसा है क्या,
जो तेरे क़दमों में रखा जाये....