You look, you observe, you understand. You think, you imagine, you associate. You feel, you insight and you express... In words... In writings. This is what I want to share here. So 'Feelings' are my insights, experiences and perspective to look this world and beyond. Come and feel what I was feeling....

Gandhi Ki Kismat (Hindi)

अपनी अपनी क़िस्मत

हाड़ माँस का पुतला था वो,
सत्य के लिए लड़ता था,
अपने ही देश के लिए नहीं,
वो मानवमात्र से प्रेम करता था,
फिर भी उसके अपनों ने ही,
उसकी नहीं क़दर जानी,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

एक देश आज़ाद कराया,
दूजा आज़ादी पर था,
पर एक विभाजन रोक ना पाया,
ऐसा ही क़िस्मत में था,
वो क्या सिखा गया हमको,
क्या राह दिखा दी जन-जन को,
उसको नहीं याद रखा हमने,
ऐसे कैसे हम अभिमानी,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

बिन हथियार किए उसने वार,
सारे जन-मन को था एक किया,
अपना सर्वस्व लुटाकर भी,
मन में ना उसका अहं किया,
लगता सारी जनता को था,
वो अपना सा, वो प्यारा सा,
फिर भी ना जाने क्यूँ उनमें से ही,
किसी एक ने उस पर वार किया,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

उस एक को तो चलो भूल भी लो,
पर आज के जन का अब क्या करो,
जो नहीं जानते उन्हें क्या है मिला,
वो करते हैं उस संत से गिला,
ना वो पढ़ते हैं, ना समझते हैं,
बस बुराई सबकी करते हैं,
गांधी को ग़लत ठहराते हैं,
ख़ुद को सम्राट बताते हैं,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

विदेशों से सम्मान मिला,
अपने देश में ही अपमान मिला,
उसने तो कुछ नहीं चाहा था,
बस अपना फ़र्ज़ निभाया था,
वो ही था किया, जो तब था सही,
हम कौन जो कह दें, कुछ किया नहीं,
हमने अब तक क्या कर डाला,
बन बैठे बिन किए हम लाला,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

'गाँधी' होना छोटी बात नहीं,
सबको ले कर चलना, देना सीख सही,
अपने लिए कुछ भी रखना नहीं,
फिर भी अपनों की नफरत...
क्या ये बात है1



Positivity (Hindi)

सकारात्मकता

आज हम लोग एक बदलते समय में जी रहे हैं। जहाँ एक ओर पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध हमें आकर्षित कर रही है, वहीँ उन्हीं विदेशियों को जब हम भारतीय पुरातन ज्ञान-विज्ञान और क्रियाओं के पीछे भागते देखते हैं तो हमें अपनी संस्कृति की महानता पता चलती है और हम भी उसे अपनाने चल पड़ते हैं। अब देखने की बात यह है कि हम केवल शब्दों के पीछे भाग रहे हैं या सच में उन्हें समझते भी हैं। इनमें से ही एक बहुचर्चित शब्द है --- सकारात्मकता और सकारात्मक सोच।

ऐसा कहा जाता है कि हमेशा सकारात्मक सोच रखने से इतनी सकारात्मक ऊर्जा निकलती है कि आप जो सोचते हो वो सच होने लग जाता है। पर क्या वास्तविकता में हम इसका आशय समझते हैं, या सकारात्मक होने का केवल दम्भ करते हैं ? सकारात्मक सोच वाले मनुष्य के जीवन में भी कठिनाइयाँ आती हैं और वो भी दुःखी होता है, पर मानसिक संतुलन और संयम बनाये रखता है। क्या भगवान् राम का जीवन सरल था? क्या उनसे ज्यादा कोई सकारात्मक हो सकता है जो बिना विचलित हुए सम्पूर्ण राज-पाट अपने माता-पिता के कहने मात्र से त्याग कर वन में गए। और माता सीता ने भी उनका अनुसरण किया। क्या भगवान् कृष्ण से ज्यादा कोई सकारात्मक हो सकता है जो द्वारकाधीश होते हुए भी सब त्याग कर एक युद्ध में सम्मिलित हुए, पर शस्त्र नहीं उठाया और जो अपनी इच्छा मात्र से उस युद्ध से मनचाहा परिणाम ले सकते थे, फिर भी सारथी बनना स्वीकार किया।

आइये मोटे तौर पर विचार करते हैं कि सकारात्मकता क्या है और कैसे ये जीवन को सरल बनाती है।

सकारात्मक सोच एवं सकारात्मकता का दिखावा

1) विश्वास

  • ऐसा व्यक्ति स्वयं पर विश्वास रखता है और मानता है कि वो स्वयं को पहले से और अधिक उन्नत करेगा।
  • सकारात्मक होने का दिखावा करने वाला व्यक्ति1


Bhoot Aur Bhavishya (Hindi)

भूत और भविष्य क्या है?

यादों की बारात,
सपनों की सौगात,
झूठी बुनियाद।

सच से परे,
जहाँ हैं सब मौन खड़े।

मानो या ना मानो,
ये है कल... केवल कल।
बीता या आने वाला...
जिसे देखते सब सजल।

भूत और भविष्य क्या है?

एक ठंडी राख,
जिसमें सुलगी आग,
भविष्य की ख़ातिर भूत को किया जाये याद,
भूत आये तो नहीं भूत से कम,
व्यक्ति को मिलता इससे केवल ग़म।

ये है वो ईंट, जिस पर रखी भविष्य की नींव,
जब ईंट हो ख़राब, तो ढह जाए सपनों प्यारा पुल।

भूत और भविष्य क्या है?

पर जिसने भूत जाना, वो जाने भविष्य,
वो नहीं त्रिकालवेत्ता, नहीं है वो ईश,
वो तो है साक्षात् स्वयं जगदीश।

भूत में छिपा भविष्य का ख़ज़ाना,
भूत है जैसे अनाज का एक दाना,
इसी से लेहलेहगी फसल भविष्य की,
इसी से बनेंगे भावी काम,
भूत है भविष्य का एक पैग़ाम।

भूत और भविष्य क्या है?

भविष्य है भूत की तूली से सजी तस्वीर,
जो भूत हो ख़राब, तो बिगड़े तक़दीर।

भूत से हो प्रेरणा,
शक्ति हो झेलने की,
भविष्य की वेदना।

वही सफल होगा इस जीवन पथ पर,
जो हो भूत से भविष्य की ओर अग्रसर।

भूत और भविष्य क्या है?
यह है जग का सार अनश्वर।



A Song Conferred to Lord Krishna (Hindi)

श्री कृष्ण कहूँ या कहूँ गोपाल,
इतना बता दे ओ नन्दलाल।

देख ये फूल कैसे मुस्काते,
छूते ही कैसे डर जाते,
हैं ये देखो कितने कोमल प्यारे,
इससे भी कोमल तू है हाँ रे...
फूल कहूँ.... या कि कहूँ कोमल,
इतना बता दे ओ श्यामल....

श्री कृष्ण कहूँ या कहूँ गोपाल,
इतना बता दे ओ नन्दलाल।

मोर की नीली गर्दन बहुत आली,
कोयल को देखो कितना मीठा गाती,
कोयल से भी मीठी तेरी बोली,
मोर से सुन्दर तेरे गाल,
मोर कहूँ.... या कि कहूँ कोयल,
इतना बता दे ओ गोपाल....

श्री कृष्ण कहूँ या कहूँ गोपाल,
इतना बता दे ओ नन्दलाल।

अम्बर है अनंत बहुत विशाल,
बादल का रंग कैसा नीला गोपाल,
ऐसा ही रूप तेरा, ऐसा आकार,
क्या कहूँ बता दे ओ निराकार,
अम्बर कहूँ.... या कि कहूँ बादल,
इतना बता दे ओ नन्दलाल....

श्री कृष्ण कहूँ या कहूँ गोपाल,
इतना बता दे ओ नन्दलाल।



Kyun na main tar jaun... (Hindi)

क्यूँ न भव से मैं तर जाऊँ...

पूर्वजन्म की बात ना जानूँ,
सच है मैं तुझको नहीं पहचानूँ,
लेकिन क्यूँ नहीं मैं तर पाऊँ,
एक जनम जो हरि नर का पाऊँ...

पशु, पाषाण या कि होऊँ पत्ता,
चल नहीं पाये तब मेरी सत्ता,
पर नर देह बुद्धि है तेरी,
जिससे नर ने किस्मत फेरी,

क्यूँ नहीं फिर उस पर इतराऊं,
भाग्य बदल मैं तुझको पाऊं,

गणिका और अजामिल तारे,
नाम लिए से कष्ट निवारे,
वो हरि नाम क्यूँ मैं ले नहीं पाऊँ,
क्यूँ नहीं भव से मैं तर पाऊँ,

हे हरि! हम तुझमें हैं समाये,
तुझसे बाहर जा भी नहीं पाये,
जब तेरी ही माया और तुझको ही पाना,
तो फिर क्यूँ जन्मों का बहाना,

हे हरि! जो ऐसा हो जीवन,
नाम लेण को तरसे ये मन,
माया वश तुझको बिसराऊँ,
पर मृत्यु परे तो तुझको ही पाऊँ,

क्यूँ इस जनम में मैं तर नहीं पाऊँ,
क्यूँ इस जनम में मैं तुझे नहीं पाऊँ।



Shreshthta :: Excellence (Hindi)

हाँ मैं एक मानव हूँ और लड़ती हूँ...
कभी ये लड़ाई मेरी अपने आप से होती है, तो कभी अपने परिवार से,
तो कभी परिवार के लिए मैं लड़ रही होती हूँ, अपने दूर के रिश्तेदार से।
कभी अपने कर्मों से, अपने वृहत परिवार की श्रेष्ठता साबित करती हूँ ,
तो कभी अपनी जाति की महानता के लिए धर्म के कार्य करती हूँ।
कभी अपने नगर की प्रतिनिधि बन, दिखाती हूँ नगर का जोश,
कभी दुश्मन देश के नापाक इरादों पर प्रकट करती हूँ मन का रोष।
कभी देशहित में आने लगते हैं मेरे मन में विचार,
तो कभी प्राकृतिक आपदाओं में मेरा हो जाता है पूरा संसार।
कभी देशवासियों की विजय पर बजा रही होती हूँ ताली,
तो कभी विज्ञान की नई खोज पर कर रही होती हूँ आँखों से आँसू खाली।
हाँ मैं लड़ती हूँ और स्वयं को श्रेष्ठ साबित करती हूँ...
कभी स्वयं में, तो कभी समूह में, तो कभी-कभी सम्पूर्णता में।
पर हाँ मेरे प्रयास होते हैं ‘श्रेष्ठता’ की ओर...
और जब आप सच्चे मन से सही शब्दों में ‘श्रेष्ठ’ बन रहे होते हैं,
तो आप अपने और सम्पूर्ण मानव जाति के काम आते हैं,
किसी को मन-कर्म-वचन से हानि नहीं पहुँचाते...
आप बस विकसित होते हैं... और विकसित करते हैं।
तो आइये आप सभी आइये,
इस ‘श्रेष्ठता की दौड़' में मेरे साथ आइये,
मुझे पीछे छोड़ आगे जाइये...
क्यूँकि आप जीतें या मैं, उद्देश्य पूरा होगा मेरा ही...
क्यूँकि मैं एक मानव हूँ और लड़ती हूँ...
ये सबसे प्यारी ‘श्रेष्ठता की दौड़'।



Vande Matram (Hindi)

देख आँखों में अश्रु नहीं,
मन के मेरे अंगारे हैं,
यूँ आतंकी हमलों में मरने को नहीं,
भारत माँ ने बेटे सँवारे हैं,
अब जवाब देना होगा तेरे नापाक़ इरादों को,
हम धैर्यवान हैं, बुझदिल नहीं,
यहाँ सब हाथों में तलवारें हैं।

हर बार तू अंदर आया है,
धोखे से हमें सताया है,
पर शायद तुझको ये भान नहीं,
'वन्दे मातरम्' की शक्ति का ज्ञान नहीं,
ये शब्द नहीं, ये धड़कन है,
ये जन-जन का अंतर्मन है,
भारत माँ का आह्वान है,
एक पूजा है, एक अनुष्ठान है,
तू भूल गया कारगिल का युद्ध,
माता ने विफल किये थे तेरे आयुध,
उस माँ के बच्चों को सताता है,
तू सच में अपनी मौत बुलाता है,
अब नहीं बचा समय जो कहूँ तू डर जा,
अब तो बस कहती हूँ तू मर जा,
जो बाप है तेरा उसको भी ले आ,
ला बतलाऊँ तेरी औकात है क्या,
हर दिल हर धड़कन कहती है,
लड़ ले और मुँह की खा के जा।

जिसके बारे में कहते थे,
सूर्य अस्त नहीं होगा इसका कभी,
उसको भी धो डाला था,
फिर तेरी तो बिसात है क्या,
सल्तनतें आईं और फ़ना हुईं,
मेरी हस्ती न मुझसे जुदा हुई,
तिनके सा तू उड़ जाएगा,
चीन भी तुझे बचा ना पायेगा,
बस ध्यान मग्न हैं मेरी देवी माँ,
उनको ना तू ललकार यहाँ,
भारत माँ जो उठ आईं तो,
सोच तेरा फिर होगा क्या।

वन्दे मातरम् मैं कहती हूँ,
वन्दे मातरम् सब बोलो यहाँ,
चलो यज्ञ में आहूति दो,
प्रसन्न होओ मेरी भारत माँ,
हे वीर! तुम अकेले नहीं सरहद पर,
जरुरत पड़ी तो हम सब हैं यहाँ,
ना हाथ कम होंगे, ना ही तलवारें,
चलो मिलकर दुश्मन को ललकारें,
दो-दो हाथ करें, छापे मारें,
आतंकियों को ही नहीं, आतंकी देशों को भी,
आओ सबक अब सिखा डालें,
वन्दे मातरम् , जय जय भारत,
सब जन मिलकर1



Bharat Mata (Hindi)

करोड़ों हाथ हैं उनके,
करोड़ों कंठों में संवाद है उनका,
'वन्दे मातरम्' मन्त्र और भारत की रज,
आशीर्वाद है उनका,
चन्दन सी महकती, लहकती हैं,
मेरी भारत माँ,
हिमालय से महासागर तक, फैली हैं,
मेरी भारत माँ,
रेगिस्तान, नदियाँ और दुर्लभ पेड़,
सब से भरपूर, सुन्दर, सुहासिनी हैं,
मेरी भारत माँ,
सब बच्चों को अलग-अलग बोलियों में,
मिठास और प्रेम से बोलना सिखातीं हैं,
मेरी भारत माँ,
दिलों में अपनेपन का एक एहसास करातीं हैं,
मेरी भारत माँ,
सीधी माँ के हम सीधे-सादे बच्चे,
दुनिया की रीत से अलग, तेजवान और निराले बच्चे,
शांत हैं और शांति प्रिय भी...
पर कोई छीने हमारे भाइयों को हमसे,
या देखे गलत इरादों से हमारी माता को,
तो बता देंगे कितना कोलाहल है इस शांति के भीतर,
'वन्दे मातरम्' शक्ति है, गौरव है, साहस है,
उसे ना ललकार ओ मतवाले,
वरना तेरे देश के हर बन्दे से बुलवा देंगे...
भारत माता की जय।



Jai Ganesh (Hindi)

हे देव तेरे... नाम हज़ार,
पूजन कर कृपा पाऊँ मैं अपार,
विशालकाय तू, महाकाय तू,
मंगलमूर्ति रूप तेरा,
सहस्त्र कोटि सूर्य प्रभा समान,
तेजोमय है स्वरुप तेरा,
धूम्रवर्ण तू, चारुकर्ण तू,
गज समान है आनन तेरा,
सुन्दर मुख है, कपिल वर्ण है,
वक्री सुण्ड और गज के कर्ण हैं,
उदर विशाल, नेत्र हैं पिंगल,
हस्त मुद्रा करती सब मंगल,
शिव के लाल, गौरी के दुलारे,
अग्रपूज्य तुम देव हमारे,
भाद्र शुक्ल चौथ को तुम आये,
मोदक प्रिय तेरा नाम कहाये,
प्रसन्नचित्त, चिंता से मुक्त तुम,
सभी विशिष्ट गुणों से युक्त तुम,
ललाट चंद्र तुम धारण करते,
चंद्र देव के अवगुण हरते,
राक्षस मूषक है वाहन तुम्हारा,
चरण धूरि से उसको संवारा,
तेरे बुद्धि कला कौशल से,
सारे जग में हुआ उजारा,
ऐसा क्या जो सुलझ न पाए,
कौन शत्रु तुझे रण में हराये,
सबके बिगड़े काम बना दे,
मनवांछित वर सबको दिला दे,
रिद्धि-सिद्धि के तुम हो स्वामी,
बुद्धिमान तुम, अन्तर्यामी,
शुभ और लाभ हैं, सुत ये तुम्हारे,
कृपा दृष्टि ने संकट तारे,
विघ्नविनाशक, मंगलमूर्ति,
ध्यान मात्र से हो इच्छापूर्ति,
विशिष्ट नायक, गणनायक, गणपति,
विघ्नराज, पशुपालक, अधिपति,
तेरी कृपा जो होये गणेश जी,
मिट जाएँ जीवन में कलेस जी,
आओ आओ गणपति-गणनायक,
मेरे बिगड़े काज बनाओ,
अपने बुद्धि-कौशल से प्रभुजी,
मेरी नैया पार लगाओ,
शत्रु ने घेरा है, है चिंताओं का डेरा,
उनका विनाश कर, हमको बचाओ,
राक्षस रूप चंचल मन है मेरा,
धरि अपने पग करो बुद्धि का उजेरा,
आओ पधारो विनायक-विघ्नहर्ता,
आओ विराजो सर्व मंगल करता,
जय जय गनेस सर्व दुःख हर्ता
जय जय गणेश सर्व सुख करता।



Shri Krishn (Hindi)

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

सबके मन को हरने वाले,
भक्ति में आकर्षित करने वाले,
'श्री' को धारण करने वाले,
सबसे निराले आले-आले,
आते हैं श्री कृष्ण...
श्री कृष्ण, श्री कृष्ण, श्री कृष्ण
बोलो जय जय जय श्री कृष्ण।

गौओं के वंदनीय, नन्हे गौ पालक,
गौ के रक्षक, गौचारी बालक,
गौ प्रिय, गौ वर्धक, गौ रमणीय,
गौ संग आते हैं गोविन्द वंदनीय,
आते हैं गोविन्द...
गोविन्द, गोविन्द, गोविन्द,
बोलो जय जय जय गोविन्द।

विघ्नों का हरण करते हरि प्यारे,
बंधनों से मुक्ति देते वो 'सखा' रे,
हरि के रूप, चौसठ कला वाले,
सबसे प्यारे, वो सबसे निराले,
आते हैं हरे...
जय हरे, श्री हरे,
बोलो जय जय जय श्री हरे।

'मुर' राक्षस को मारने वाले,
संत जनों को तारने वाले,
मेरे मन में भी हैं कई दानव,
उन्हें हरा 'मुरारी', बनाओ मुझे मानव,
ऐसे आते हैं मुरारी...
बोलो मुरारे, जय मुरारे,
बोलो जय जय जय मुरारे।

तुम हो नाथ, मेरा देना सदा साथ,
थाम लो हाथ, अब आओ जगन्नाथ,
मुझे लो उबार, कर रही मैं पुकार,
हे नाथ, जय नाथ, जय जय हे नाथ,
बोलो हे नाथ, जय नाथ,
बोलो जय जय हे नाथ।

नारायण के रूप तुम्हीं हो,
चौसठ कलाओं के भूप (राजा) तुम्हीं हो,
तुम ही रक्षक, तुम ही हो पालक,
तुम ही लक्ष्मीपते नारायण कहाते,
शत्रु-विनाश को, भक्त की पुकार पर,
नारायण गरुड़ लेकर शीघ्र-शीघ्र आते,
जय नारायण, लक्ष्मी-नारायण,
बोलो जय जय जय हे नारायण।

वासुदेव-देवकी की आँखों के तारे,
जसोदा-नन्द के लाल, गोपियों के प्यारे,
भाद्रपद अष्टमी की काली रात में तुम आये,
सबके प्राणों (वसु) के रक्षक, वासुदेव-नंदन कहलाये,
जय वासुदेवाय, जय वासुदेवाय,
बोलो जय जय हे वासुदेवाय।

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।