Diye Ki Lau (Hindi)

दिये की लौ

दिये की लौ,
मेरे मनोभावों सी,
कभी अदम्य,
कभी वो मद्धम,
कभी चंचल अनुरागों सी,
कभी खुद जलती,
कभी जलाती,
कभी विरक्ति दर्शाती सी,
चाहे जो, चाहे हो जैसी,
पर सदा प्रकाश फैलाती सी,
उज्ज्वल सी वो,
निर्मल सी वो,
ईश्वर के लिए स्थान बनाती सी,
निराश मन में,
आशा भर दे,
ऐसी कान्ति बिखराती सी,
दिये की लौ,
मेरे मनोभावों सी,
जैसी हूँ,
वैसा दिखाती सी।



Sapna (Hindi)

शब्दजाल


मेरा सपना मैं सुना सकती हूँ,
पर मेरी सपना को मैं सुना सकती नहीं।
मेरा सपना खुली आँखों से दिखता नहीं,
पर मेरी सपना को मैं,
आँखों में ही छुपा सकती नहीं।
मेरा सपना सब कह देता है,
पर फिर भी चुप ही रहता है,
मेरी सपना कभी कुछ कहती नहीं,
पर चुप तो वो रहती भी नहीं।
मेरा सपना तो मेरा ही अपना है,
मुझमें समाया, मुझमें जन्मा,
मेरी सपना मुझसे भी आगे है,
फिर भी है मुझसे ज्यादा मेरी,
मेरा सपना तो अजनबी है लेकिन,
मेरी सपना तो है मेरे सपने जैसी।
शब्दों का मायाजाल यहाँ,
है भँवर बड़ा जंजाल यहाँ,
जब सपना है मेरा पुरुष साथी,
तो क्यूँ उसमें स्त्री ध्वनि आती,
क्यूँ सपना मुझको आता है,
और मेरी सपना है चल आती।



Haan Main Tumhaare Liye Kuch Nahi Laai Hun (Hindi)

आँखों में जुगनू, मुट्ठी में धूप भर के लाई हूँ,
हाँ, मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं लाइ हूँ ...

अपनी सारी दुआएं, किस्मत के सारे तारे लाई हूँ,
हाँ, मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं लाइ हूँ ...

पहली बारिश की ख़ुशबू, अपनी पहली गुड़िया लाई हूँ,
हाँ, मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं लाइ हूँ ...

अपने अनदेखे सपने, सारी हँसी लाई हूँ,
हाँ, मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं लाइ हूँ ...

जिन किताबों में लिखा था तुम्हारा नाम और ईद का चाँद, लाई हूँ,
हाँ, सही कहा तुमने...... मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं लाइ हूँ ...