Bharat Mata (Hindi)

करोड़ों हाथ हैं उनके,
करोड़ों कंठों में संवाद है उनका,
'वन्दे मातरम्' मन्त्र और भारत की रज,
आशीर्वाद है उनका,
चन्दन सी महकती, लहकती हैं,
मेरी भारत माँ,
हिमालय से महासागर तक, फैली हैं,
मेरी भारत माँ,
रेगिस्तान, नदियाँ और दुर्लभ पेड़,
सब से भरपूर, सुन्दर, सुहासिनी हैं,
मेरी भारत माँ,
सब बच्चों को अलग-अलग बोलियों में,
मिठास और प्रेम से बोलना सिखातीं हैं,
मेरी भारत माँ,
दिलों में अपनेपन का एक एहसास करातीं हैं,
मेरी भारत माँ,
सीधी माँ के हम सीधे-सादे बच्चे,
दुनिया की रीत से अलग, तेजवान और निराले बच्चे,
शांत हैं और शांति प्रिय भी...
पर कोई छीने हमारे भाइयों को हमसे,
या देखे गलत इरादों से हमारी माता को,
तो बता देंगे कितना कोलाहल है इस शांति के भीतर,
'वन्दे मातरम्' शक्ति है, गौरव है, साहस है,
उसे ना ललकार ओ मतवाले,
वरना तेरे देश के हर बन्दे से बुलवा देंगे...
भारत माता की जय।



Pranaam to Guru Ji and Guru Maa (Hindi)

गुरू जी मेरे सरल-सुहृदय,
गुरु माँ चपल-चन्द्रिका सी,
गुरु जी शांत समुद्र विशाल,
गुरु माँ बहती गंगा सी।

गुरु जी सिखलाते जीवन,
पर जीवंत बनाती गुरु माँ ही,
गुरु जी ध्यान कराते हैं,
पर ध्यान रखती हैं गुरु माँ ही,
सारा रस, जीवन-तरंग,
हम तक पहुंचाती गुरु माँ ही,
मन से मिलते हम गुरूजी से,
साक्षात् करातीं गुरु माँ ही।

गुरू जी मेरे सरल-सुहृदय,
गुरु माँ चपल-चन्द्रिका सी...

गुरूजी मेरे ये हैं कैसे,
ये मुझे बतातीं गुरु माँ ही,
नित्य रात्रि करते इन्तजार,
पाती भिजवाती गुरु माँ ही,
हम सब पीछे श्री गुरूजी के,
सही राह सुझातीं गुरु माँ ही,
नैया पार कराते श्री गुरूजी मेरे,
पर उसमें छेद बतातीं गुरु माँ ही।

गुरू जी मेरे सरल-सुहृदय,
गुरु माँ चपल-चन्द्रिका सी...

आदर करते सब गुरूजी का,
पर लाड़ लड़ातीं गुरु माँ ही,
व्यक्तित्व बहुमुखी गुरूजी का,
जिसे पूर्ण बनातीं गुरु माँ ही,
गुरु जी-गुरु माँ को नमन मेरा,
गुरु तक पहुंचा दो गुरु माँ जी,
गुरु जी जैसे तो बन न सकेंगे,
स्वयं सा निर्मल बना दो गुरु माँ जी।

गुरू जी मेरे सरल-सुहृदय,
गुरु माँ चपल-चन्द्रिका सी...