Thank You God (Hindi)

धन्यवाद

जब जब मैंने खुद को सेवाकार्य में रत कुछ महान पाया,
धन्यवाद हे प्रभु! तुमने मुझसे महान सेवादार दिखलाया,
जब लगा तेरी भक्ति में लीन मैं कोई साधवी हो गई,
तो धन्यवाद प्रभु! पुनः मोह में फँसा, मेरा भ्रम हटाया,
जब लगा कुछ नया खोज पाई इस जगत में,
धन्यवाद प्रभु! तुमने पहले किये गए शोध को पढ़वाया,
जब लगा संसार में सबसे अनोखी प्राणी हूँ मैं,
तो तुमने मुझसे अनोखे प्राणियों से मिलवाया
और तो और जब सबसे दुःखी होने का आभास हुआ,
तो धन्यवाद कि तुमने तभी मुझसे ज्यादा पीड़ित दिखलाया,
धन्यवाद कि मैंने सदा अकेले चलना चाहा
और तुम किसी न किसी रूप में मेरे साथ चलते रहे,
मुझे लगा कि मुझे कोई नहीं सुन रहा,
पर तुम हमेशा मुझे सुनते रहे,
हर बाधा से निकाला, हर परीक्षा में सफल कराया,
कभी दिया सबक और कभी बिखरा दी अपनी माया,
धन्यवाद हे प्रभु! मुझे एक बहुत ही आम सा खास जीवन देने के लिए
और धन्यवाद मेरा ये धन्यवाद सुन लेने के लिए।



Deshprem (Hindi)

बहुत से तरीक़े हैं देशप्रेम दिखाने के,
ज़रूरी नहीं कि मैं बम से पाकिस्तान ही गिराऊँ।

किसी बच्चे को पढ़ाकर,
किसी पेड़ को बड़ा कर,
नशे की लत को छुड़ाकर,
किसी बिगड़े को बचा कर,

नदियों को निर्मल कर,
फसलों को सिंचित कर,
नाले को राह दिखा कर,
कचरा ना फैला कर,

गायों को पालकर,
गरीबों को दान कर,
मंदिर में सेवा कर,
सब लोगों का मान कर,

आपस में सुलह कर,
गाली-गलौंच हटा कर,
विज्ञान की बातें कर,
ज्ञान की गंगा बहा कर,

रिश्वत से दूर रहकर,
कुरीतियों को रुकवा कर,
नियमों का पालन कर,
प्रदूषण ना फैला कर,

सड़क पर ना थूककर,
होटल से सामान ना चुराकर,
धरोहरों पर नाम ना लिख कर,
ट्रेन की सीटों को ना फाड़कर,

अनेकों तरीक़े हैं, जिनसे मैं बचा सकती हूँ,
मेरे देश और मेरे देश के मान को।

ये मेरे देश की धरती है,
ये मेरी भारत माता हैं,
इनको प्रसन्न रखना मेरे मन को भाता है।
जैसा मेरा स्वभाव बना,
उससे ही कुछ रच जाऊँगी,
वो मेरी भारत माता हैं,
ऐसे ही उन्हें मनाऊँगी।



A Song Conferred to Lord Krishna (Hindi)

श्री कृष्ण कहूँ या कहूँ गोपाल,
इतना बता दे ओ नन्दलाल।

देख ये फूल कैसे मुस्काते,
छूते ही कैसे डर जाते,
हैं ये देखो कितने कोमल प्यारे,
इससे भी कोमल तू है हाँ रे...
फूल कहूँ.... या कि कहूँ कोमल,
इतना बता दे ओ श्यामल....

श्री कृष्ण कहूँ या कहूँ गोपाल,
इतना बता दे ओ नन्दलाल।

मोर की नीली गर्दन बहुत आली,
कोयल को देखो कितना मीठा गाती,
कोयल से भी मीठी तेरी बोली,
मोर से सुन्दर तेरे गाल,
मोर कहूँ.... या कि कहूँ कोयल,
इतना बता दे ओ गोपाल....

श्री कृष्ण कहूँ या कहूँ गोपाल,
इतना बता दे ओ नन्दलाल।

अम्बर है अनंत बहुत विशाल,
बादल का रंग कैसा नीला गोपाल,
ऐसा ही रूप तेरा, ऐसा आकार,
क्या कहूँ बता दे ओ निराकार,
अम्बर कहूँ.... या कि कहूँ बादल,
इतना बता दे ओ नन्दलाल....

श्री कृष्ण कहूँ या कहूँ गोपाल,
इतना बता दे ओ नन्दलाल।



Kyun na main tar jaun... (Hindi)

क्यूँ न भव से मैं तर जाऊँ...

पूर्वजन्म की बात ना जानूँ,
सच है मैं तुझको नहीं पहचानूँ,
लेकिन क्यूँ नहीं मैं तर पाऊँ,
एक जनम जो हरि नर का पाऊँ...

पशु, पाषाण या कि होऊँ पत्ता,
चल नहीं पाये तब मेरी सत्ता,
पर नर देह बुद्धि है तेरी,
जिससे नर ने किस्मत फेरी,

क्यूँ नहीं फिर उस पर इतराऊं,
भाग्य बदल मैं तुझको पाऊं,

गणिका और अजामिल तारे,
नाम लिए से कष्ट निवारे,
वो हरि नाम क्यूँ मैं ले नहीं पाऊँ,
क्यूँ नहीं भव से मैं तर पाऊँ,

हे हरि! हम तुझमें हैं समाये,
तुझसे बाहर जा भी नहीं पाये,
जब तेरी ही माया और तुझको ही पाना,
तो फिर क्यूँ जन्मों का बहाना,

हे हरि! जो ऐसा हो जीवन,
नाम लेण को तरसे ये मन,
माया वश तुझको बिसराऊँ,
पर मृत्यु परे तो तुझको ही पाऊँ,

क्यूँ इस जनम में मैं तर नहीं पाऊँ,
क्यूँ इस जनम में मैं तुझे नहीं पाऊँ।



Vande Matram (Hindi)

देख आँखों में अश्रु नहीं,
मन के मेरे अंगारे हैं,
यूँ आतंकी हमलों में मरने को नहीं,
भारत माँ ने बेटे सँवारे हैं,
अब जवाब देना होगा तेरे नापाक़ इरादों को,
हम धैर्यवान हैं, बुझदिल नहीं,
यहाँ सब हाथों में तलवारें हैं।

हर बार तू अंदर आया है,
धोखे से हमें सताया है,
पर शायद तुझको ये भान नहीं,
'वन्दे मातरम्' की शक्ति का ज्ञान नहीं,
ये शब्द नहीं, ये धड़कन है,
ये जन-जन का अंतर्मन है,
भारत माँ का आह्वान है,
एक पूजा है, एक अनुष्ठान है,
तू भूल गया कारगिल का युद्ध,
माता ने विफल किये थे तेरे आयुध,
उस माँ के बच्चों को सताता है,
तू सच में अपनी मौत बुलाता है,
अब नहीं बचा समय जो कहूँ तू डर जा,
अब तो बस कहती हूँ तू मर जा,
जो बाप है तेरा उसको भी ले आ,
ला बतलाऊँ तेरी औकात है क्या,
हर दिल हर धड़कन कहती है,
लड़ ले और मुँह की खा के जा।

जिसके बारे में कहते थे,
सूर्य अस्त नहीं होगा इसका कभी,
उसको भी धो डाला था,
फिर तेरी तो बिसात है क्या,
सल्तनतें आईं और फ़ना हुईं,
मेरी हस्ती न मुझसे जुदा हुई,
तिनके सा तू उड़ जाएगा,
चीन भी तुझे बचा ना पायेगा,
बस ध्यान मग्न हैं मेरी देवी माँ,
उनको ना तू ललकार यहाँ,
भारत माँ जो उठ आईं तो,
सोच तेरा फिर होगा क्या।

वन्दे मातरम् मैं कहती हूँ,
वन्दे मातरम् सब बोलो यहाँ,
चलो यज्ञ में आहूति दो,
प्रसन्न होओ मेरी भारत माँ,
हे वीर! तुम अकेले नहीं सरहद पर,
जरुरत पड़ी तो हम सब हैं यहाँ,
ना हाथ कम होंगे, ना ही तलवारें,
चलो मिलकर दुश्मन को ललकारें,
दो-दो हाथ करें, छापे मारें,
आतंकियों को ही नहीं, आतंकी देशों को भी,
आओ सबक अब सिखा डालें,
वन्दे मातरम् , जय जय भारत,
सब जन मिलकर1



Bharat Mata (Hindi)

करोड़ों हाथ हैं उनके,
करोड़ों कंठों में संवाद है उनका,
'वन्दे मातरम्' मन्त्र और भारत की रज,
आशीर्वाद है उनका,
चन्दन सी महकती, लहकती हैं,
मेरी भारत माँ,
हिमालय से महासागर तक, फैली हैं,
मेरी भारत माँ,
रेगिस्तान, नदियाँ और दुर्लभ पेड़,
सब से भरपूर, सुन्दर, सुहासिनी हैं,
मेरी भारत माँ,
सब बच्चों को अलग-अलग बोलियों में,
मिठास और प्रेम से बोलना सिखातीं हैं,
मेरी भारत माँ,
दिलों में अपनेपन का एक एहसास करातीं हैं,
मेरी भारत माँ,
सीधी माँ के हम सीधे-सादे बच्चे,
दुनिया की रीत से अलग, तेजवान और निराले बच्चे,
शांत हैं और शांति प्रिय भी...
पर कोई छीने हमारे भाइयों को हमसे,
या देखे गलत इरादों से हमारी माता को,
तो बता देंगे कितना कोलाहल है इस शांति के भीतर,
'वन्दे मातरम्' शक्ति है, गौरव है, साहस है,
उसे ना ललकार ओ मतवाले,
वरना तेरे देश के हर बन्दे से बुलवा देंगे...
भारत माता की जय।



Jai Ganesh (Hindi)

हे देव तेरे... नाम हज़ार,
पूजन कर कृपा पाऊँ मैं अपार,
विशालकाय तू, महाकाय तू,
मंगलमूर्ति रूप तेरा,
सहस्त्र कोटि सूर्य प्रभा समान,
तेजोमय है स्वरुप तेरा,
धूम्रवर्ण तू, चारुकर्ण तू,
गज समान है आनन तेरा,
सुन्दर मुख है, कपिल वर्ण है,
वक्री सुण्ड और गज के कर्ण हैं,
उदर विशाल, नेत्र हैं पिंगल,
हस्त मुद्रा करती सब मंगल,
शिव के लाल, गौरी के दुलारे,
अग्रपूज्य तुम देव हमारे,
भाद्र शुक्ल चौथ को तुम आये,
मोदक प्रिय तेरा नाम कहाये,
प्रसन्नचित्त, चिंता से मुक्त तुम,
सभी विशिष्ट गुणों से युक्त तुम,
ललाट चंद्र तुम धारण करते,
चंद्र देव के अवगुण हरते,
राक्षस मूषक है वाहन तुम्हारा,
चरण धूरि से उसको संवारा,
तेरे बुद्धि कला कौशल से,
सारे जग में हुआ उजारा,
ऐसा क्या जो सुलझ न पाए,
कौन शत्रु तुझे रण में हराये,
सबके बिगड़े काम बना दे,
मनवांछित वर सबको दिला दे,
रिद्धि-सिद्धि के तुम हो स्वामी,
बुद्धिमान तुम, अन्तर्यामी,
शुभ और लाभ हैं, सुत ये तुम्हारे,
कृपा दृष्टि ने संकट तारे,
विघ्नविनाशक, मंगलमूर्ति,
ध्यान मात्र से हो इच्छापूर्ति,
विशिष्ट नायक, गणनायक, गणपति,
विघ्नराज, पशुपालक, अधिपति,
तेरी कृपा जो होये गणेश जी,
मिट जाएँ जीवन में कलेस जी,
आओ आओ गणपति-गणनायक,
मेरे बिगड़े काज बनाओ,
अपने बुद्धि-कौशल से प्रभुजी,
मेरी नैया पार लगाओ,
शत्रु ने घेरा है, है चिंताओं का डेरा,
उनका विनाश कर, हमको बचाओ,
राक्षस रूप चंचल मन है मेरा,
धरि अपने पग करो बुद्धि का उजेरा,
आओ पधारो विनायक-विघ्नहर्ता,
आओ विराजो सर्व मंगल करता,
जय जय गनेस सर्व दुःख हर्ता
जय जय गणेश सर्व सुख करता।



Shri Krishn (Hindi)

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

सबके मन को हरने वाले,
भक्ति में आकर्षित करने वाले,
'श्री' को धारण करने वाले,
सबसे निराले आले-आले,
आते हैं श्री कृष्ण...
श्री कृष्ण, श्री कृष्ण, श्री कृष्ण
बोलो जय जय जय श्री कृष्ण।

गौओं के वंदनीय, नन्हे गौ पालक,
गौ के रक्षक, गौचारी बालक,
गौ प्रिय, गौ वर्धक, गौ रमणीय,
गौ संग आते हैं गोविन्द वंदनीय,
आते हैं गोविन्द...
गोविन्द, गोविन्द, गोविन्द,
बोलो जय जय जय गोविन्द।

विघ्नों का हरण करते हरि प्यारे,
बंधनों से मुक्ति देते वो 'सखा' रे,
हरि के रूप, चौसठ कला वाले,
सबसे प्यारे, वो सबसे निराले,
आते हैं हरे...
जय हरे, श्री हरे,
बोलो जय जय जय श्री हरे।

'मुर' राक्षस को मारने वाले,
संत जनों को तारने वाले,
मेरे मन में भी हैं कई दानव,
उन्हें हरा 'मुरारी', बनाओ मुझे मानव,
ऐसे आते हैं मुरारी...
बोलो मुरारे, जय मुरारे,
बोलो जय जय जय मुरारे।

तुम हो नाथ, मेरा देना सदा साथ,
थाम लो हाथ, अब आओ जगन्नाथ,
मुझे लो उबार, कर रही मैं पुकार,
हे नाथ, जय नाथ, जय जय हे नाथ,
बोलो हे नाथ, जय नाथ,
बोलो जय जय हे नाथ।

नारायण के रूप तुम्हीं हो,
चौसठ कलाओं के भूप (राजा) तुम्हीं हो,
तुम ही रक्षक, तुम ही हो पालक,
तुम ही लक्ष्मीपते नारायण कहाते,
शत्रु-विनाश को, भक्त की पुकार पर,
नारायण गरुड़ लेकर शीघ्र-शीघ्र आते,
जय नारायण, लक्ष्मी-नारायण,
बोलो जय जय जय हे नारायण।

वासुदेव-देवकी की आँखों के तारे,
जसोदा-नन्द के लाल, गोपियों के प्यारे,
भाद्रपद अष्टमी की काली रात में तुम आये,
सबके प्राणों (वसु) के रक्षक, वासुदेव-नंदन कहलाये,
जय वासुदेवाय, जय वासुदेवाय,
बोलो जय जय हे वासुदेवाय।

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।



Teej Ki Sawaari (Hindi)

लहर-लहर लहराये लहरियो,
बरसे बदरा, बोले मोरियो,
गाये पपीहा, कोयल कुहुके,
आतीं हैं मैया रुक-रुक के...

पालकियों की शान है आई,
बघ्घियाँ भी सजी हैं भाई,
स्वर्ण-रजत से भरे हैं थाल,
मुक्ताहार, और भी माल...

आगे-आगे चलते हैं हाथी माता के,
ऊंट-घोड़े सजे खड़े हैं जीवनदाता के।

देखो इनकी चुनरी प्यारी,
देखो इनका घघरा भारी,
घघरे पर क्या है चित्रकारी,
सब अनमोल भये हैं...

सोलह सावन झूल लिए हैं,
सखियों से सब भेंट लिए हैं,
सोलह श्रृंगार माँ ने किये हैं,
मेंहदी से हाथ सजा लिए हैं...

उनके दर्शन पाने आये, शीश झुकायें, सब माता के,
सच्चा सुख मिलता है, अपने जीवनदाता से।

माता मेरी, माता भवानी,
शिव से है ये प्रीत पुरानी,
कथा नहीं जाए ये बख़ानी,
शिवपुर को हैं चलीं भवानी...

मांग भर रहे हैं त्रिपुरारी,
साथ खड़े शिवगण भयकारी,
गौरी माँ की शोभा भारी,
सब के सब मगन भये हैं...

आओ-आओ दौड़ के आओ पाने दर्शन माता के,
सच्चा सुख मिलता है, अपने जीवनदाता से।

इसी कथा के प्रतीक में अभी,
मना रहे तीज-त्यौहार सभी,
आतीं हैं मैया तीजों में,
जब बरखा छींट पड़े हैं...

माँ की लीला अपरम्पारी,
देख-देख हरषे नर-नारी,
नर-नारी हरषे अति सुन्दर,
माँ दे रहीं सबको इच्छित वर...

सारा जग है उमड़ पड़ा पाने आशीष माता के,
सच्चा सुख मिलता है, अपने जीवनदाता से।

आओ देखें माँ की सवारी,
उनकी शोभा है अति प्यारी,
खायें झूले, मचाएं धूम,
मस्ती में सब रहे हैं झूम...

मैया के आगे हम नाचें,
खूब बजाएं ढोल-नताशे,
कर प्रणाम गौरी मैया को,
बांटो बच्चों में तुम बताशे...

सज-धज कर सब आये देखो, भक्त माता के,
सच्चा सुख मिलता है, अपने जीवनदाता से।

करो आरती, गाओ स्तुति,
मंगलकारी गीत सुनाओ,
अपने सुहाग की करो प्रार्थना,
और अमर वर पाओ...
गाओ गाओ गाओ सभी, मंगलगीत गाओ,
हाँ गाओ गाओ गाओ सभी, मंगलगीत गाओ।

परणाम कर लो सभी, तीज माता के,1



Kis Vidhi Aau Dwaar Tihaare (Hindi-Poetry)

किस विधि आऊँ द्वार तिहारे...

कुबुद्धि, कुसंगी, हूँ मैं कुमार्गगामी,
नहीं मानूँ तेरा कहना, करती हूँ मैं मनमानी,
अपनी सोच से ही उपजाए, मैंने ये मायाजाल,
पहले तो मनभाये, पर अब हैं जी का जंजाल,
जी का जंजाल हैं ये, अब हैं जी को जलाते,
हैं ये पाप के घड़े, पर हैं मन को लुभाते।

दुर्व्यसनों को छोड़, मैं आऊँ कैसे बंधन तोड़,
हे नाथ! करो सहाय, बताओ आप ही कोई उपाय,
उपाय हो ऐसा कि मन पवित्र हो जाए,
ना रहे कोई इच्छा अधूरी, ये जीव तृप्ति पाए।

नित-नित आऊं द्वार तिहारे, तेरी ज्योति से करूँ मन पावन,
मन-मंदिर में बिठाऊँ तुझको, जो पूर्ण स्वस्थ हो मेरा अन्तर्मन,
अंतर्मन से आती ध्वनि तेरी, उसे साफ़-साफ़ सुन पाऊँ,
मन के भीतर, जग में बाहर, मैं तुझको पा जाऊँ।

ना कुछ बुरा दिखे जग भीतर,
ना मन कुत्सित मार्ग पर जाए,
मोह-माया-व्यसन जिन्हें तुमने छुड़ाया,
उनसे लो अब मेरे मन को बचाये।

तेरी शक्ति, तेरी इच्छा बिन,
ये सब संभव नहीं हे नाथ!
अब देर ना कर, तू मेरे द्वारे आजा,
ले चल मुझको अपने ही साथ,
ले चल, ले चल, अब तू ले चल,
ले चल मुझको अपने ही साथ।



Tere Hone Se (Hindi)

तेरे होने से...

जीवन में बहार है, लगता प्यारा ये संसार है,
मन में आशा है, इच्छा है, सपने हैं,
लगता है इस दुनिया में सभी लोग अपने हैं।

तेरे होने से...

लड़ने की ताकत है, जीतने का साहस है,
भाग्य है और भाग्य पर भरोसा है,
गलती पर क्षमा की आशा है।

तेरे होने से...

दुर्घटना से सुघटना तक और मृत्यु से अमरत्व तक,
जाने की सीढ़ी है,
तेरे होने से ही संस्कार और संस्कृतियाँ,
चलते पीढ़ी-दर-पीढ़ी हैं।

तेरे होने से...

पापियों में भय है, असत्य पर सत्य की विजय है,
अंत में बुराई का अंत है,
प्रलय के पश्चात फिर, जीवन अनंत है।

तेरे होने से...

प्रज्ञा है, विद्या है, मस्तिष्क में बुद्धि है,
और बुद्धि से परे संसार में, अनेकों सिद्धि हैं,
आकाश में तारे हैं, तो धरती पर पुष्प बहुत सारे हैं,
अण्ड से ब्रह्माण्ड और अणु से परमाणु तक रहस्य बहुत प्यारे हैं।

तेरे होने से...

प्रेम है, प्रकृति है,
और प्रकृति में सृजन और संहार की शक्ति है,
मौन है और मौन की अपनी अभिव्यक्ति है,
और उस मौन में वाक् से भी अधिक शक्ति है।

तेरे होने से...

मन में विचार हैं, कलम में धार है,
कोरे कागज़ पर होती, रंगों की बहार है,
आचार है, व्यवहार है और मन का संसार है।

ये अच्छा है कि तू है,

और अगर प्रार्थना में शक्ति है, तो हे प्रभु!
आज अपने लिए और सबके लिए,
एक यही प्रार्थना करुँगी कि तू हमेशा रहे...
सबके पास, सबके साथ...

क्योंकि हम हैं तो सिर्फ तेरे होने से...



Vipassana Dhamma Thali Jaipur Review

'Sadhana' means 'To attain some goal, keeping yourself focused, calm and determinant onto it; only by keeping mind away from any type of distractions.' 'Samadhi' means 'To keep your body in a particular straight posture and become a viewer of sensations on body parts without reacting on them.' 'Prajna/Pragya' means 'To receive the knowledge about truths... the truths which you can observe and feel within you and around you.' And this is the context behind 'Vipassana'. Vipassana Meditatio...


Prabhu Milan (Hindi)

हे प्रभु! स्वप्न लोक की नगरी है ये,
सुन्दर, मायावी, लुभावने वाली,
जानती हूँ सच नहीं, ये स्वप्न है,
और अंत में रह जाएंगे हाथ खाली,

पर निद्रा के वश में प्रभुजी!
बस नहीं चलता मेरा,
तुझसे मिलन मेरा हो नहीं पाता,
जब होता सुबह सवेरा,

कब तुम आते, कब चले जाते,
मुझको एहसास नहीं है,
बस रहती है शिकायत स्वप्न में,
क्यों तू मेरे पास नहीं है,

हे मुरली-मनोहर! करो कुछ ऐसा,
ये रात आने न पाए,
भोर समय मैं रहूँ जागती,
ना कोई स्वप्न सताये।

बोले श्याम - जो ऐसा हो तो,
तुम थक जाओगे दिन में,
स्वप्न ना होंगे तो उल्लास ना होगा,
फिर क्या करोगे मन में,

भोर में जब आऊँगा मैं तो,
कौन कथा बांचोगे...
कुछ रचने को नहीं जो होगा तो,
कौनसा वर सांचोगे?

जो न मिलन होगा तम-सत का तो,
दीपक कहाँ रखोगे,
जो न परीक्षा होगी तेरे मन की तो,
आगे कैसे बढ़ोगे?

जो मैं रहुँगा साथ सदा ही तो,
कौन पुकारेगा मुझको,
कैसे सुनाओगे सपनों के किस्से,
जब साथ रखोगे मुझको,

ये कर्मभूमि है मित्र ओ मेरे,
तो कर्म पड़ेगा करना,
सपनों के संग भोर का ध्यान भी,
पड़ेगा तुमको ही रखना,

फिर आऊँगा मिलन को मैं भी,
जो झड़ा होगा तेरा आँगन,
सुनुँगा तेरी सारी कथाएँ,
और करुँगा मन को पावन,

करुँगा मन को पावन,
कि तू मुझे रोज़ बुलाना,
तभी तो भक्त और भगवान् का,
बुनेगा तानाबाना।

तभी तो भक्त और भगवान् का,
बुनेगा तानाबाना।

भावार्थ शब्दार्थ :

स्वप्न लोक की नगरी = इच्छाओं से भरा संसार,
सत्य = मोक्ष,
निद्रा = माया,
सवेरा = मृत्यु और नवजीवन की शुरुआत,
प्रभु का आना = मोक्ष,
रात = मायामयी संसार,
दिन-रात = जीवन (दिन - कर्म प्रधान, रात्रि - माया, स्वप्न - इच्छा),
कथा = जीवन-वृत्तांत,
तम = इच्छाएँ - आसक्तियाँ - मन,
सत = कर्म - शरीर - वास्तविकता,1



Kis Vidhi Poojun Nath (Hindi)

किस विधि पूजूँ नाथ... आप आये मेरे द्वारे...,
मैले सारे आसन... कैसे दूँ मैं बिठा रे...

मैंने ही कहा था कल तुम आना,
साफ़ रखुँगी अपना अँगना,
पर निद्रा में स्वप्न जो आये,
मुझको दिया पीछे भगा रे...,
इँह ते उँह तक भगा-भगा के,
मुझको दिया थका रे...

भोर भई, तुम थे आने को,
अमृत वायु मिली थी मुझको,
पर पीने भर की शक्ति नहीं थी,
वो पल दिए गंवा रे...

तुम आये तो मैला था मन,
झूठे पड़े थे रात के बर्तन,
कहाँ बिठाऊँ, क्या मैं खिलाऊँ,
नैनों में अश्रु भरा रे...,

अश्रु बहे, बहा ले गए तुमको,
अब तुम पास नहीं थे,
कल तेरे आने की आस थी मन में,
हम भी निराश नहीं थे,
धुल गया था आँगन,
पावन था मन,
पर तुम चले गए थे,
कल भोर में आने का, फिर से वचन दे,
तुम मुझे छोड़ गए थे,

कभी तो ऐसा भी होगा ओ प्रभुजी!
सपनों से मैं बाहर रहुँगी,
भोर के अमृत से झाड़ कर आँगन,
तेरा ही नाम जपुँगी,
उदयकाल की मिलन वेला में,
तुझसे मिलन करुँगी,
कुछ अपनी कह, कुछ तेरी सुन,
मन में धीर धरुँगी।



Ashram Memories

Today I am telling you about a totally different destination for vacation, for knowledge gain, for knowing our culture as well as staying in a calm and natural environment. A destination where your kids will play freely and you can meditate there without children's worry. A destination where you will find members of different age groups, kids, youths, elders, old-age people, all. And everybody would be talking about development of nation, about technology, about linking spirituality with techn...


Prayer to Goddess Durga :: 2 (Hindi)

हे माँ तुझे चढाने को मैं फूल कहा से लाऊँ,
ऐसा क्या मैं दूँ तुझे मैया, जिसको अपना बताऊँ,
जग की हर वस्तु है तेरी, तो क्या, तेरा तुझे समर्पित,
क्या है कुछ भी ऐसा जग में, जो कर पाऊँ मैं अर्पित,

हे मेरी माँ! वैसे तो ये तन-मन-धन सब है तेरा,
तेरी बुद्धि से ही बनी पापी, तो कभी किया जग में उजेरा,
तो हे मेरी माँ! ये उपज थी मेरी, करती आज समर्पित,
मेरा पाप-पुण्य सब तेरा, तेरा तुझको अर्पित।

हे माँ! कल्पना से ही मैंने जाना, कि तू दिखती है कैसी,
तो करती कल्पना आज समर्पित, मिल जा मुझको वैसी,
जहाँ कल्पना चल ना पाई, वहां जिज्ञासा थी मैंने लगाई,
नरक-स्वर्ग सब दिखे उसी से, सो आज उसे भी लाई,
मेरी जिज्ञासा, ज्ञान-अज्ञान ये मेरा, करती तुझको अर्पण,
विनय और बड़े प्रेम भाव से, स्वीकार करो ये समर्पण।

हे माँ! इच्छा उपजी भीतर, जिसने मुझे फंसाया,
कभी काम बन, कभी क्रोध बन, मन को खूब नचाया,
कभी सौंदर्य बोध ने बांधा, कभी ये मन ललचाया,
तो कभी ख़ुशी ने खिला-खिला के तुझसे दूर कराया,
तो हे मेरी माँ! उस काम-क्रोध को भी करती आज समर्पित,
कभी ये तुझसे मिलन का कारण, कभी करता मुझको गर्वित।

हे मेरी मैया! वैमनस्य ही था मेरा, भीतर से मुझको काटे,
तू बाहर थी खड़ी द्वार पे, पर ये मुझको था बांटे,
तो हे मेरी माँ! करूँ आज समर्पण, मेरे सारे द्वेष और बैर,
तू भीतर अब आजा मैया, धर हृदय में पैर।

ध्यान, इच्छा, बुद्धि, जिज्ञासा, और मेरा सब ज्ञान,
हे माँ! करती आज समर्पण मेरा सारा मान,
सारी कलाएं थीं दी तूने मुझे, मैंने कर दीं विकृत,
पुनि करती हूँ आज मैं अर्पित, कर दे उनको सुकृत।

हे मेरी माँ! नहीं फूल हैं कोई, बस कांटे हैं मेरे पास,
इन्हीं काँटों को करके अर्पित, है मिलन की मेरी आस,
सबसे1



Prayer to Goddess Durga (Hindi)

बसो मैया मेरे भीतर, सदा-सर्वदा वास करो।
मन की गति बन, मेरी सुमति बन, सदा मेरा तुम विकास करो।

मेरे मन की शक्ति तुम हो, हृदय में बसी भक्ति तुम,
वाणी की मधुरता तुम हो, सुर-साम्राज्ञी देवी तुम।

तुम से ही माँ, दश विद्याएं, नौ निधि सब तेरे आधीन,
अष्ट-सिद्धि की दाता मैया, व्याधि-विनाशिनी दोष विहीन।

ओ मेरी मैया, सामने आना, साथ में मेरे रहना सदा,
सब अपराध क्षमा कर मैया, मेरी तुम विनती सुनना।

कुमार्गगामी, मैं खलकामी, तुमको ना पहचानी माँ,
पर तुम मेरी शक्ति-स्वरूपा, तुम हो अंतर्यामी माँ।

तुमने ही संसार बनाया, सब रचना तेरे आधीन,
मेरी रचना का विकास कर, बना मुझे तू पूर्ण स्वाधीन।

तेरे ही चित्र उकेरूँ प्रतिपल, तेरा ही गान मैं गाऊँ माँ,
जग में कुछ ऐसा कर पाऊँ, कहलाऊँ तेरी 'आभा'।

तेरे ही कार्यों में शोभा पाऊँ, बना रहे सदा साथ तेरा,
इस जनम और हर एक जनम में, सिर पर हो माँ हाथ तेरा,

माँ बना रहे विश्वास मेरा, माँ सिर पर हो सदा हाथ तेरा...