Rakhi (Hindi)

आने वाला है राखी का त्यौहार

तेरी उम्र हो बहुत ही लंबी
और सुरक्षित रहे मेरा भी संसार,
इसीलिए इस बार, 
नहीं गई मैं बाज़ार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
ना ही कोई रेशम का धागा, 
ना मैं लाई मिठाई,
नहीं आऊंगी इस बार तेरे घर,
पर मत करना भैया लड़ाई,
भाभी से बँधवा लेना धागा,
और याद करना मेरा प्यार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
सारा साल है फीका अपना,
नहीं मना कोई भी त्यौहार,
घर ही घर में कैद हुए सब,
बस बचा रहे हैं परिवार,
खर्चे बढ़ते, घटती कमाई,
पर नहीं शिकायत भाई,
बस ये वक्त जल्द निकल जाए,
ऐसी देती हूँ दुहाई,
फिर से लगे सावन की झड़ियाँ,
झूले-मेलों की आये बहार,
आने वाला है राखी का त्यौहार...
आने वाला है राखी का त्यौहार।



Hariyaali Teej (Hindi)

हाथों में रचाकर हरी-हरी मेहँदी,
कलाईयों में हरी चूड़ियाँ डालूँ,
हरी साड़ी लपेट बदन पे,
खुद को हरी धरती सा सजा लूँ,
सखियों संग झूमूं किसी बगीचे में,
साज-श्रृंगार की बातें बना लूँ,
मगर क्यूँ नहीं आज सही मायने में
मैं ये त्यौहार मना लूँ,
पार्लर की बजाय नर्सरी को जा
चंद नए पौधे लिवा लूँ,
हाथों को मेहँदी की जगह
गीली मिट्टी से सजा लूँ,
और खुद सँवरने से पहले
एक पौधे को सँवारने की जिम्मेदारी उठा लूँ,
हरे बगीचे में तो सब जाते हैं,
पर आज किसी सूखे स्थान को हरा-भरा बना लूँ,
और उस हरे पौधे की दुआ से ही आज,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ,
मैं ये हरियाली तीज मना लूँ।



Hum Paudhe (Hindi)

खरपतवार की तरह उगे हुए थे
हम जंगल के पौधे,
मज़ा बड़ा था, बस डरते थे,
कोई हमें नहीं रौंदे,
उस खुले अल्हड़ बचपन को हटा
किसी ने सभ्यता सिखलाई,
हाँ, निखारा व्यक्तित्व को मेरे
और नई जमीन दिखलाई,
आज सभ्य हूँ, सही जगह हूँ,
देती आश्रय सबको,
पर वो मासूमियत-अल्हड़ता चली गई,
ढूंढ़ रही मैं जिसको,
पूर्णता तो कभी नहीं थी,
बस तब था अबोध मन प्यारा,
अब संकटों से झूझता सा जीवन,
जग कहता इसे अनुभव हमारा।



Pita ka Pyar (Father's Love) (Hindi)

# एक जंगल ऐसा भी

बड़े प्यार से किसी पिता ने
बेटे जी के सुख की ख़ातिर
बना दिया है प्यारा जंगल
ताकि बच्चे छोड़ें दंगल।
कहीं पे बंदर, कहीं बघेरा,
कहीं डला है शेर का डेरा,
कहीं पे हाथी, कहीं हिरण है,
नदी में पड़ती सूर्य किरण है।
जुगत लगा कर, चीज़ बचा कर,
जोड़-तोड़ कर बना है सारा,
प्यारे बच्चे भूल भी जायें,
याद रखेगा बाप हमारा।
माँ की ममता अपनी जगह है,
बाप के प्यार का नाम नहीं है,
सारे दिन की थकान के बाद,
रातों को उसका काम यही है।
गुमनामी ही उसे मिलेगी,
भूल जाएंगे इस प्यार को इक दिन,
याद रखेगा परमपिता पर,
उसके प्यार को तारे गिन-गिन।



Dar Lagta hai (Hindi)

डर लगता है उस घूरते हुए चेहरे से,
कभी मेरे हँसने पर तो कभी उदास होने पर,
कभी मेरे गाने पर तो कभी बाहर जाने पर,
वो चेहरा मुझे घूरता रहता है,
न जाने क्यूँ वो हँसता नहीं,
मुझसा है, पर मुझसा नहीं,
वो जब चाहे, जहाँ चाहे मुझे घूरता है,
और कल जब उसे हँसते देखा,
तो उस भद्दी हँसी में उसका काला चेहरा
और भी डराने लगा,
डर लगता है उस घूरते हुए चेहरे से,
तो कल मैंने उसे घूर लिया,
तो मेरे इस साहस को दबाने के लिए
वो बोला,
मैं तुम्हें डराना नहीं, बचाना चाहता हूँ,
तुम्हारे कोमल मन को कोई ठेस न लगे,
ये ही कार्य है मेरा,
मैंने माना और मुँह फ़ेर लिया,
पर फिर सोचने लगी...
ये वही घूरने वाला चेहरा तो है,
जो हर बार अलग-अलग तरीके से,
ठेस लगाता है मेरे कोमल मन को,
हाँ, बहुत डर लगता है,
उस घूरते हुए चेहरे से,
जो हर घड़ी मेरा पीछा भी करता है
और मेरा इंतज़ार भी।



Kaisa Saal (Hindi)

जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है,
कहीं कोरोना, कहीं अम्फान,
तो कहीं टिड्डियों का बवाल है।

वक्री सारे ग्रह बैठे हैं
मित्र भी शत्रु बन बैठे हैं,
दांव लगी है मेहनत सारी,
पैसों का भी सवाल है,
जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है।

खर्चे सिर चढ़ कर बोले हैं,
उधारी के फंदे घोले हैं,
फिर भी नहीं फ़िकर है उनकी,
क्योंकि जान खुद ही बेहाल है,
जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है।

आपद का अम्बार लगा है,
नहीं कोई व्यापार चला है,
तंगी-भूख-मंदी से घिरे हैं,
सबकी बिगड़ी चाल है,
जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है।

लगता है दुनिया डूबेगी,
आधी आबादी न रहेगी,
ऊपर से नीचे तक खुलता,
बड़ा काल का गाल है,
जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है।



Phool Aur Taare (Hindi)

रोज़ भोर होते ही छुप जाते हो,
ऐ तारों सुबह-सुबह कहाँ जाते हो,
खिल रहे हैं फूल मेरी फुलवारी में,
कहीं वो ही बनकर तो न आ जाते हो,
देखा है मैंने बन्द होते फूलों को शाम में,
और तभी तुम्हें लुक-छिप कर वापिस आते,
अच्छा मेरा इक काम करना,
उस चमकते चाँद को बोलना,
उगाया है कमल भी इसी बगीचे में मैंने,
पर वो अभी तक खिला नहीं,
जो चाँद कमल बन आये,
तो शायद वो भी खिल जाये,
और कल की बीती रात की तरह,
मेरी फुलवारी भी पूरी हो जाये।



Yaaden (Hindi)

मेरे अक्स का दीदार कर मैं शरमा गई,
आईने में देख तेरी कोई बात याद आ गई,
बस यूँ ही देखते, खुद को सँवारते,
पता नहीं कब सुबह बीती,
और तुझसे मिलने की घड़ी आ गई,
मिलना तो था,
पर जमीं में कदम धँस गए,
जब तेरी फ़ोटो पर चढ़ी माला के फूलों में,
मेरी चुनरी के तार फँस गए।

रोती भी हूँ और चुप होती भी हूँ,
कभी तेरे जाने को सोचकर, कभी तेरे होने को जानकर...



Friendship Day (Hindi)

आज अपने पुराने दोस्तों से मिलने गई थी....
ना आँख में काजल डाला था
ना कान में पहनी थी बाली
एक पुरानी जींस और शर्ट मैंने डाली
ना सेल्फ़ी खिंचवानी थी
ना मेक-अप से ख़ुद को छिपाना था
मैं जैसी थी, मैं जो भी थी
वैसे ही मिलने जाना था
मिलना था मेरी रूहों से
जिनकी रूहों में मैं थी बसी
कुछ उनकी सुनके आना था
कुछ अपनी कहने जाना था
जो सोचा उससे ज़्यादा मिला
आज लगा की फिर मैं पूरी हुई
शुक्रिया मेरी उन रूहों का
जो आज फिर मुझ में आ मिलीं
ना नक़ाब था, ना कोई पर्दा
बस बातों में हम घुलते गए
कुछ कहते गए, कुछ सुनते गए
मन की परतों को चुनते गए
ना शिकवे किए
ना वादे किए
बस जो मन में था
वही बातें किए
जब चुप हो गए
तो थोड़ा रो गए
और फिर हँस लिए
और हम चल दिए
और यूँ इस तरह
आज फिर पूरा हुआ
दोस्ती का ये फ़र्ज़
आज दोस्ती के दिन।



Shikaar... (Hindi)

जो शिकार होता है, वो ‘शिकार’ होता है,
क्यूँकि वो कमज़ोर है...

उसमें नहीं है ताक़त अपने आप से लड़ने की,
उसमें नहीं है ताक़त डर को पीछे छोड़ आगे बढ़ने की,
उसमें नहीं है ताक़त सच को स्वीकार करने की,
उसमें नहीं है ताक़त स्वयं को नियंत्रित रखने की,

पर जाने क्यूँ दुनिया,
उम्मीद करती है उससे ताक़त की,
जाने क्यूँ सोचती है कि वो होते तो ऐसा करते,
वो होते तो वैसा करते,

अरे वो होते ही नहीं ना...
क्यूँकि जो शिकार होता है,
वो ‘शिकार’ होता है,
क्यूँकि वो कमज़ोर है...

और ‘दुनिया’ में तो बहुत ताक़त है,
‘दुनिया’ ना तो तनहा है
और ना ही कमज़ोर...
और ‘दुनिया’ के पास ज़ुबान भी है,
इसीलिए तो वो ‘शिकार’ नहीं है,

पर जब वो अपने डर को पीछे छोड़
अपनी क्षमताओं से भी आगे बढ़ जाता है...
एक छोटा मेमना शेर से लड़ जाता है...
या सहमने की जगह भीड़ में चढ़ जाता है...

तो छीन लाता है वो एक ज़िंदगी और एक ख़ुशी,
एक नई सोच और एक नया तज़ुरबा...
जो बनाते हैं उसे भीड़ से अलग एक मिसाल,
नहीं करती दुनिया उससे फिर कोई सवाल,

और वो नहीं रह जाता ‘शिकार’|



Jara Si Baat... (Hindi)

ज़रा सी बात थी और...
मैंने मन में सोच सोच उलझा लिया
मैं चाहती थी कि तुम सुलझाओ,
पर सच में उलझन कहाँ है,
ये क्या जान पाते तुम,
पर तुम्हारी चाहते हुए भी,
ना कि गई कोशिश से,
मेरे ग़ुस्से ने जो उस पर ताला लगाया,
उसने मुझे अब बहुत दूर ला दिया,
ज़रा सी ही तो बात थी...

मैं जानती हूँ,
तुम ग़लत नहीं, अनजान थे,
और मैं परेशान,
बस बिन कहे क्यूँ नहीं समझ पाए तुम?
ज़रा सी ही तो बात थी...

अब चाहती हूँ,
जो हुआ उसे भुला आगे बढ़ जाना,
पर क्या तुम आज भी दोगे मेरा साथ?
फिर उलझ रही हूँ अपने सवालों में,
अपने ही मन में,
क्यूँ नहीं ख़ुद से खोल देती,
मेरे मन की गाँठें,
क्यूँ नहीं तुम्हें बोल देती,
जो मेरा मन चाहे,
आख़िर ज़रा सी ही तो बात थी...



Indian Oldage Love (Hindi)

साठ पार कर चुके थे दौनों,
फिर भी कहासुनी सारी थी,
इक दूजे बिन रह नहीं पायें,
पर दौनों को ज़िद प्यारी थी।

ज़िद थी भी इतनी प्यारी,
जो करती थी रिश्तों को गहरा,
इक दूजे को समझते दौनों,
इसीलिए था पहरा।

पहरा था गहरा,
नहीं देतीं मिठाई उनको सीधे,
पर उनके हिस्से की फ़्रिज में,
छोड़ देतीं थी धीरे,
पर उनके खा लेते ही,
मचता रोज़ बवाल,
साठ पार खाते हो मिठाई,
होगा तुम्हारा क्या हाल,
अब जाओ दौड़ने और
पीछे से मैं भी आती हूँ,
कहीं बीच में बैठ ना जाओ,
पूरा पता लगाती हूँ।

पता लगा लो तुम पूरा,
और पीछे मेरे आओ,
जो साठ पार मिठाई तुमने खाई,
उसको तुम भी पचाओ,
आख़िर तुम बिन कोई नहीं अब
इस दुनिया में मेरा,
तेरी ज़िदों के बिना
नहीं पचेगा खाना मेरा।

अच्छा तो ये प्यार नहीं,
इसमें भी तेरा स्वार्थ,
जो कोई और होता दुनिया में
तो करते भी नहीं बात।

करता नहीं जो बात,
तो क्या तुम चुप हो जाती,
सालों हो गए सुनते,
बस तुम अपनी गातीं,
कभी ज़बरन काम पर भेजतीं,
देकर गाली हज़ार,
रोज़ नई चीज़ों की फ़रमाइश,
इतना ही था प्यार।

हाँ इतना ही था प्यार,
बनाया तुमको लायक़,
घर संसार बसाया तेरा,
पर तुम तो रहे खलनायक,
जो भी ख़रीदा, तेरे लिए था,
नहीं अपने लिए बचाया,
फिर भी देखो तुमने मुझको,
इतना कुछ है सुनाया,
जो इतनी बुरी थी लगती,
तो क्यूँ रोज़ गज़रा थे लाते,
क्यूँ कम पैसों में भी तुम
मुझको हर वीक घुमा कर लाते।

लाता था हर वीक घुमा कर,
और तेरे लिए गज़रा,
ठंडी रहे तू, सजी रहे तू,
ये ही स्वारथ बस था,
पर मेरे प्यार को तू समझ ना पाई,
हाय री मेरी क़िस्मत,
हो चला हूँ बुड्ढा, अब तो बक्श दे,
मौत दे रही दस्तक।

मौत दे दस्तक दुश्मन के,
मैं सदा1



Gandhi Ki Kismat (Hindi)

अपनी अपनी क़िस्मत

हाड़ माँस का पुतला था वो,
सत्य के लिए लड़ता था,
अपने ही देश के लिए नहीं,
वो मानवमात्र से प्रेम करता था,
फिर भी उसके अपनों ने ही,
उसकी नहीं क़दर जानी,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

एक देश आज़ाद कराया,
दूजा आज़ादी पर था,
पर एक विभाजन रोक ना पाया,
ऐसा ही क़िस्मत में था,
वो क्या सिखा गया हमको,
क्या राह दिखा दी जन-जन को,
उसको नहीं याद रखा हमने,
ऐसे कैसे हम अभिमानी,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

बिन हथियार किए उसने वार,
सारे जन-मन को था एक किया,
अपना सर्वस्व लुटाकर भी,
मन में ना उसका अहं किया,
लगता सारी जनता को था,
वो अपना सा, वो प्यारा सा,
फिर भी ना जाने क्यूँ उनमें से ही,
किसी एक ने उस पर वार किया,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

उस एक को तो चलो भूल भी लो,
पर आज के जन का अब क्या करो,
जो नहीं जानते उन्हें क्या है मिला,
वो करते हैं उस संत से गिला,
ना वो पढ़ते हैं, ना समझते हैं,
बस बुराई सबकी करते हैं,
गांधी को ग़लत ठहराते हैं,
ख़ुद को सम्राट बताते हैं,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

विदेशों से सम्मान मिला,
अपने देश में ही अपमान मिला,
उसने तो कुछ नहीं चाहा था,
बस अपना फ़र्ज़ निभाया था,
वो ही था किया, जो तब था सही,
हम कौन जो कह दें, कुछ किया नहीं,
हमने अब तक क्या कर डाला,
बन बैठे बिन किए हम लाला,
ये अपनी-अपनी क़िस्मत है,
ये ही है क़िस्मत की कहानी।

'गाँधी' होना छोटी बात नहीं,
सबको ले कर चलना, देना सीख सही,
अपने लिए कुछ भी रखना नहीं,
फिर भी अपनों की नफरत...
क्या ये बात है1



Ankahe Ansune Sawal (Hindi)

जब कुछ नहीं तो क्यूँ बोलती हैं तेरी निगाहें...
करतीं हैं मुझसे दो-चार बातें,
जुबां तेरी भी चुप है, जुबां मेरी भी चुप है,
तो कैसे बोलते-बोलते कटती हैं रातें...

मेरे हर सवाल पर तेरी खामोशी कहती है,
मैं नहीं तेरा, तू नहीं मेरी...
तो फिर भी क्यूँ ये लगता है कि जैसे चोरी से,
तेरी इज़ाजत के बग़ैर...
करने लगती हैं, तेरी निगाहें कई बातें...

क्यूँ आ जाती है शऱारत तेरे मन में,
जो सामने मैं हूँ होता...
क्यूँ लगती है तू मुझे मेरी हमदम, मेरी छाया...

क्या ये मोहब्बत है... मेरे मन की..., मेरे मन में...,
या सच में तू भी उसी पशोपेश में है... जहाँ मैं हूँ...,
और चाहती है तू भी जानना उत्तर...
चंद उन अनकहे-अनसुने सवालों के।



Tarang :: Be Live (Hindi)

आज ज़रा गाड़ी को रहने दो गैराज़ में,
कि दिल पैर निकालने को कर रहा है,
आज ज़रा मोबाइल को फिक्स्ड कर दो,
कि मन कुछ कहने को मचल रहा है।

आज कोई ना चलाओ एसी. ,
कि वादियों की खानी हैं हवाएँ,
आज सब इयरफोन निकाल दो,
और सुनो जो भँवरे गुनगुनायें।

आज कोई टीवी को बंद कर दो,
कि मुझे है तुमसे दो बात करनी,
आज कोई दिन में ना सोने जाओ,
कि दिखानी है मेरे सपनों की जरनी।

आज सब फेसबुक को भूल जाओ,
कि लाइव देखना है फेस तुम सबका,
आज सब बंद कमरों से बाहर आओ,
चलो मिलकर करें मन हल्का।



Hanson Ka Joda :: The Swans (Hindi)

हंसों का जोड़ा

यूँ ही एक दिन टहलने गई जब मैं सागर किनारे,
आसमां में उड़ता देखा एक हंसों का जोड़ा।

आँखों में उमंग, पंखों में शक्ति, मन में था साहस,
उस अथाह जलराशि से टकराने का,
अठखेलियाँ करते एक-दूसरे के आगे-पीछे,
चले जा रहे थे वे निरंतर अपने लक्ष्य की ओर।

कि तभी बोझिल होने लगी हंसिनी की चाल,
ख़त्म होने लगी उसके पंखों की शक्ति,
एक पल के लिए खो बैठी वो अपनी चेतना,
और जाने लगी उसी अथाह जलराशि में विलीन होने,
जिससे टक्कर लेने का प्राण उन दौनों ने लिया था कभी...

पर जैसे ही हंस ने पाया अपनी प्रिया को काल के गाल में जाते,
रोक न पाया...
अगले ही पल एक नीची उड़ान भर,
ले आया अपनी जीवन-तरंग को अपने पंखों पर बिठा...
उड़ता रहा उसे भी अपने साथ लेकर,
बिना सोचे कि कभी तो उसकी भी हार होगी...
जब न वो बच पायेगा और न उसकी प्रिया।

तभी लौट आई उस हंसिनी की चेतना,
अपने प्रिय को अपने समीप पाकर...
भूल गई उस लील जाने वाले शान्ति के कोलाहल को,
जो निगलने को आतुर था, उस नन्हें बेज़ान पंछी को,
अपने प्रिय की बाहों ने दी उसे पूरे संसार की ऊर्जा,
और फिर चल पड़ी वह, उसी के पीछे, उसी उमंग से,
जिस उमंग के साथ उन दौनों ने शरू की थी वो यात्रा।

मैं जितनी दूर तक देख पाई, दोनो उड़ते रहे,
देते हुए एक-दूसरे को सहारा...
बनते हुए अपने साथी की शक्ति,
पता नहीं वे अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाए या नहीं...
पर अनायास ही मेरे हाथ जुड़ गए,
करने लगी नमन मैं उन देवदूतों को,
जिनके अगाध प्रेम की शक्ति और कर्मठता,
दे रही थी प्रेरणा सम्पूर्ण मानव-जाति को,
जो अपने तुच्छ स्वार्थ की ख़ातिर,
दूसरे को मिटाने के लिए,
ख़ुद मर-मिटने को तैयार रहती है।

इतना सोचते-सोचते ही1



Khushi :: Happiness (Hindi)

पंछी की तरह उड़ने में, कूद-कूद कर चलने में,
आता है कितना मज़ा ओ प्रभुजी।
इसीलिए रोज़ फुदक-फुदक मैं आती हूँ तेरे द्वारे,
कि हे प्रभुजी! ऐसे ही मुझे फुदक-फुदक आने देना,
कूद-कूद चलने देना,
क्योंकि जो मज़ा इंसान बनकर फुदकने में है,
वो चिड़िया बन उड़ जाने में कहाँ।
चिड़िया बनकर तो कोई भी उड़ सकता है,
पर इंसान बन, हर कोई कहाँ फुदक पाता है।
इसीलिए हे प्रभु! मुझे यूँ ही इंसान बने फुदकते रहने देना,
चिड़िया सा मत बना देना।



Pita ka Dard (Father's Pain) (Hindi)

बचपन से तेरी जवानी तक,
तुझे पाला-पोसा बड़ा किया,
बाइक से मोबाइल तक,
तेरी हर ख्वाहिश को मैंने जिया,

तूने माँगा चाहे मना किया,
पर मैंने अपना बेस्ट दिया,
तेरे पहले बिज़नेस से ले,
हर फैसले तक,
तेरी जीत से जीतकर,
तेरी हार में हारकर,
कभी समझाकर, कभी डांटकर,
अपने मन से तुझे सही किया,

और आज तू कहता है पापा!
तुम समझे नहीं मुझे, मैंने क्या चाहा...,
तुम अपनी इच्छा थोपते रहे मुझपर...,
और मुझपर ना कभी यकीं किया...,

अरे बेटा! चिर गया दिल मेरा,
कब साथ तेरे मैं रहा ना खड़ा,
कब तुझको रोका कुछ करने से,
कब परिवार का बोझ मैंने पड़ने दिया,
और आज तू कहता है पापा,
तुमने मुझपर न यकीन किया...,

मेरी हार में, बीच मझधार में,
समय की मार में, चाकू की धार में,
वो ताकत ना थी, जो तेरे 'पापा' को चीर देती,
पर तेरे शब्दों ने आज ये एहसास कराया,
कि तू अब बड़ा हो गया है और मैं पुराना,
शायद इसे ही कहते हैं बदला ज़माना,

'सॉरी बेटा'!!
बस ये शब्द तुझे कभी यूज़ न करने पड़ें,
ये दुआ है मेरी,
अलविदा सयाने बेटे,
अब ये जिंदगी है तेरी।



Maine Chod Diya... (I left...) (Hindi)

मैंने छोड़ दिया पतंगों को लपकना,
कि चंद लड़के पतंगों से ज्यादा मेरी छलांगों को देखने लगे थे,
मैंने छोड़ दिया खुलकर खिलखिलाना,
कि चंद होठ उसे देख अजीब सी शक्लें बनाने लगे थे,
मैंने छोड़ दिया छत पर गाने गुनगुनाना,
कि पड़ोस के लड़के बिन चाहे करने लगे थे तारीफ़ उसकी,
मैंने छोड़ दिया नज़रें मिलाना,
कि समझना ही नहीं चाहती थी मैं उनकी नापाक शक्लें,
मैंने छोड़ दिया बिना चुन्नी के सड़क पर जाना,
कि चंद घूरती निगाहें अजीब लगती थीं मुझको।

क्यों कल तक जो कर कर ख़ुशी मिलती थी मुझे,
आज वो हरकतें करते हुए, मैं देखती हूँ चारों तरफ,
क्यों आज अपनी खुशी से पहले डर जाती हूँ,
कि कोई आँखें देख न लें मुझे यूँ खुशियाँ मनाते,
पता नहीं वो कौनसा अनजाना साया डराता है,
वो कौन है जिससे छुपती फिर रही हूँ मैं,
चंद अखबार की ख़बरें हैं या परिवार की नसीहतें,
जो डरा देती हैं मुझे रोज़ाना,
वो जो भी हैं... पर अब इतना तो मैं समझती हूँ,
कि मेरा अपना देश मेरे लिए सुरक्षित नहीं है।

यहाँ न्याय की देवी के घर में अंधेर भले ही न हो,
पर देर अवश्य है...
गुनहगारों के मन में डर नहीं,
पर बच जाने का यकीन है।
नेता को नेतागिरी से और बलवान को दादागिरी से,
फ़ुरसत ही नहीं...
और सफेदपोशों के काले हाथ अंधों को दिखते ही नहीं।
वैसे किसी को यहाँ किसी दूसरे के फटे में हाथ नहीं देना,
लेकिन आँख, कान और मुँह वहीं घुसाए रखने हैं।
धृष्ट से लेकर भ्रष्ट तक सब मौसी के लड़के हैं,
और बिना अपने उल्लू को सीधा किये कोई लाचार का सगा नहीं है।

अपनी जाति को रोज़ अखबारों में लाचारी से मरते-घुटते देख,
तिल-तिल कर जो मैं मरती-डरती जाती हूँ,
ये जो हवा खराब हो गई है मेरे देश की,
उसमें जब मैं सांस1



Adhoori Khwahishen... (Hindi)

जिंदगी में जरुरी नहीं कि हर ख्वाहिश पूरी हो,
कोई जरुरी नहीं कि हर रात नूरी हो,
वो तो नजरिया इंसां का है, जो है उसे देखता,
बदलता, ढालता, ढलता और सहेजता,
अंधियारे में सायों से ही वो बनाता नए चित्र,
अधूरी ख्वाहिशों में भी भरता रहता रंग विचित्र,
इन्हीं चित्रों में ढूंढ ख़ुशी, पूरी करता ख्वाहिशें,
क्या हुआ ख्वाहिशें बदलीं और मिल गई नई मंज़िलें,
जो ख्वाब पूरे न हों तो उनके पीछे क्या भागना,
ख्वाब लो तुम बदल अपने, जिंदगी जी लो यहाँ,
ना बीते पर बस है अपना, ना आने वाले का यकीं,
जी सको तो जी लो हर पल, मानो जैसे ये ही है आखिरी,
लाख गम हैं जमाने में, मैं क्यूँ दूँ इक और मिला,
कारवां क्यूँ न शुरू कर दूँ, अपना मैं इक कदम बढ़ा,
फ़लसफ़े तो बन ही लेंगे, जब दिल में है इतना हौसला,
सारे ख्वाब भी पूरे होंगे, बस अब शरू है सिलसिला,
आँख मेरी आज नम है, दिल में है छाया ज़लज़ला,
चंद अधूरी ख्वाहिशें, चुभती हैं दिल में, करतीं गिला,
कर दूंगी उनको भी मैं ठंडा, अपनी नज़मों के रंग मिला|



Aaj Man Khamosh Hai... (Hindi)

आज मन खामोश है, तो क्या ख़ामोशी में खनकार न होगी,
आज कलम भी रुकी हुई है, तो क्या रुकी कलम से बात न होगी,
आज रात में है बहुत अँधेरा, तो क्या उजियारे की आस न होगी,
आज सुस्त है कवि मन मेरा, तो क्या कविता की बरसात न होगी,
आज हूँ तनहा गुमशुदा सी, तो क्या खुद की कोई तलाश न होगी,
आज सोच रही हूँ कि मैं क्या हूँ, तो क्या खुद से मेरी मुलाकात न होगी,
बहुत दूर हूँ साहिल से तो क्या, मझधारों में कोई बात न होगी।



Andhi Galiyan (Hindi)

अंधी गलियां,
जिन्हें नहीं मिलती कोई चौड़ी सड़क,
ग़ुम हो जाती हैं,
जाकर चंद दरवाजों पर,
जो अपनी ही अकड़ में,
खुलने से मना कर देते हैं,
और फिर एक दिन,
बाढ़ के पानी से तरबतर हो,
खुद भटक औरों को भी भटका देती हैं ये - अंधी गलियां।



Two Liners (Hindi)

कोई क्या इतने प्यार से भी रो जाता है,
जो उसकी हर आह पर वाह ही निकल पाता है,
सुनती हैं दीवारें, पर क्यूँ आज इन्सान चुप है,
पूछता है वो कि क्या दीवारों से भी कुछ कहा जाता है।


कोई प्याला हो तो पी के भी मैं ख़ुश हूँ यारों,
मरी दुनिया में ऐसे ही जिया जाता है,
वो साँस ही क्या, जिसमें आवाज़ ना हो यारों,
इसीलिए मरते दम तक ऐसे ही पिया जाता है।


पसंद जब चाहत बने और चाहत बने जूनून,
तब दिक्कत बढ़ जाती है, जब पल को नहीं सुकून।
सुकून ढूँढू मैं गलियों में, सुकूं तो मन का मोर,
ज्यूँ चकोर उड़ता फिरे, ढूंढे चाँद चहुँ ओर।


औरों से अब क्या कहूँ, कैसे कहूँ मैं बात,
खुद में ही खामोश हूँ, मन में है उल्लास।


मितवा तुम किसी और के, नहीं करते मुझसे बात,
कल जाकर ले आये तुम, उसके लिए सौगात।


फ़ुरसत के दो लम्हे जिंदगी में मिलें... तो शायद मर जाएँ...
एक नज़र वो हमें और हम उन्हें देख लें, तो शायद प्यार कर जाएँ।



Meri Har Muskurahat Ke Peeche... (Gazal) (Hindi)

मेरी हर मुस्कुराहट के भी पीछे आह होती है,
मुझे गम है क्या, इसकी किसे परवाह होती है,
मैं रातों को नहीं सोता, मैं डरता हूँ क्यूँ ख्वाबों से,
न जाने क्यूँ मेरे जगने की भी अब वाह -वाह होती है।

हर महफ़िल की रौनक हूँ, तो क्यूँ ज़हनी है खालीपन,
क्यूँ उठता है धुआं बिन आग, भीतर से जलाता है,
जब रहता हूँ मैं गुमसुम-गुमशुदा सारे नज़ारों में,
तो क्यूँ हर नज़र, हर सफ़र में मेरी ही बात होती है।

अब तो आदत सी हो गई है मुझे भी मुस्कुराने की,
किसे परवाह मेरे गम की, तो क्या ज़रूरत दिखने की,
पर रातों को जो सोता हूँ तो उसकी याद होती है,
जो सोने नहीं देती, ऐसी कुछ बात होती है।

मेरी हर मुस्कुराहट के भी पीछे आह होती है,
मुझे गम है क्या, इसकी किसे परवाह होती है|



Khar (Enmity) (Hindi)

बहुत ख़ार है तेरे भीतर, कुछ ख़ार यहाँ है बाकी,
लहरें-तूफ़ां अनेकों, मेरे मन के भी ये साथी।
इतने तूफानों में भी, है मौन खड़ा तू जैसे,
वैसी ही मौन हूँ मैं भी, पर शांत कहूँ मैं कैसे ...

ये हवा नहीं, ना ही मौसम, जो मन को हिला-मिला दें,
कुछ रिश्तों के बंधन हैं, जहाँ शिकवे और गिला हैं।
तुझसी नहीं बलशाली, जो सबको मैं अपना लूँ,
या तो अपने रंग में रंग दूँ, या छोड़ कर उन्हें दया दूँ ...

फिर भी शांति की तलाश, ले आई मुझे यहाँ आज,
उमड़े-घुमड़े और बरसे मेरे बादल, पिघल गई मैं आज,
आँखों से आँसू बन निकला, ख़ार मिला तुझ भीतर,
तेरे मौन से मेरे मौन को मिले अनेकों उत्तर...
तेरे मौन से मेरे मौन को मिले अनेकों उत्तर।



Pita Aur Ishwar (Father and God) (Hindi)

तेरा तेरे नन्हे क़दमों से चल,
पापा की गोद में चले जाना,
और प्यारी सी मुस्कान से,
अपनी विजयगाथा को सुनाना,
वो मम्मी-पापा की पकड़ पर तेरा यकीं,
कि हवा में पैर रखने से भी तू अब डरती नहीं,
तुझे पता है कि वो हैं यहीं-कहीं,
तेरे हर गलत कदम को, सही दिशा पाने का यकीं,
और क्या जो गिर भी गए तो …
एक किलकारी और मम्मी की गोद प्यारी-प्यारी,
हाय ये बचपन …
कितना उन्मुक्त, कितना प्यारा,
ना फिक्र, ना कोई गम और जीवन प्यारा-प्यारा|

काश ता-उम्र हम ईश्वर पर भी कर पाते यही विश्वास,
तो हँसते ही रहते जब तक रहती तन में श्वाश,
करते तो हम भी हैं वही...
दो कदम चलने पर, अपनी विजयश्री का यकीं,
फिर सुनाते हैं अपनी विजयगाथा,
और रो-रो कर बुलाते हैं ईश्वर को,
जो जीवन में कोई तूफ़ान आता,
लेकिन बस वो यकीं नहीं दिखा पाते,
हर कदम को थामेगा ईश्वर,
ये सोच ही नहीं पाते,
सोचो …
उस ईश्वर को भी होती होगी कितनी ख़ुशी,
हमारे हर सही फैसले पर हमारे बड़े होने का यकीं,
और बड़े हो अपनी दुनिया में मगन,
और ईश्वर को भुला दिए जाने का गम भी,
लेकिन कोई नहीं...
वो जानता है...
फिर इक तूफां आएगा,
जब याद उसे किया जाएगा,
और बिना किसी बैर, किसी स्वार्थ के,
इक पिता की तरह ही वो हमें बचायेगा …
वो शर्तिया हमें बचाएगा…



A few lines by Heart (Hindi)

कभी-कभी खुद के अन्दर की ख़ामोशी सुनने के लिए ज़िन्दगी का शोर ज़रूरी होता है,
कभी-कभी एक लम्हा जीने के लिए सदियों तक हर रोज़ मरना ज़रूरी होता है,
क्या चाहा... क्या पाया... इसका हिसाब करने के लिए कभी-कभी फ़कीर होना ज़रूरी होता है,
और ...
जीत और हार दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं...
इसीलिए ...
किसी को जिताने के लिए कभी-कभी अपना सब कुछ हार जाना ज़रूरी होता है......



Nazaren :: Eyes (Hindi)

एक नज़र कहती रुक जा,
एक नज़र कहती बढ़ जा,
हर एक नज़र से देख नज़ारे,
अब भूल रही अपनी नज़रें,
हैं इन नज़रों में ख्वाब कई,
कुछ रंग भरे मेरे मन के हैं,
फिर क्यूँ कहतीं ये नज़रें हैं,
तू भूल उन्हें, मत देख वहाँ।

क्यूँ मुझको जो मंज़िल लगती है,
उसे राह का पत्थर कहतीं नज़रें,
बूढ़ी नज़रें, अपनी नज़रें,
हैं रही डरा मेरी नज़रों से,
जो नज़र मेरी दे रही धोखा,
है सच वो नहीं जो मैंने देखा,
तो भी मैं रहूंगी साथ सदा,
मेरी नज़रों और नज़ारों के।

जो ये नज़रें नहीं होतीं तो,
कैसे दिखतीं बाकी नज़रें,
है नमी आज भी नज़रों में,
पर डर है नहीं किसी नज़रों से,
मेरे अपनों से मिली नज़र,
है नाज़ मुझे इन नज़रों पे,
देखने दो मुझे, अब मत रोको,
जो ख़्वाब बसे मेरी नज़रों में,
बस रखो यकीं मेरी नज़रों पर
ना झुकाऊँगी, ना झुकने दुँगी।

आपकी ही नज़र, है मेरे भीतर,
बतलाती सब सही गलत मुझे,
है मुझको बस उसपर ये यकीं,
लाएगी बचा वो हर मुश्किल से,
नज़र तो है वही मेरी भी,
बस नजरिया ज़रा थोड़ा बदला है,
मेरे नज़रिये से देखो जरा,
क्यों नज़र नज़र में हैं फर्क कई।

तेरी नज़रें, मेरी नज़रें,
करती रहतीं हैं बात कई,
पर मेरे ख्वाबों से कटती हैं,
नज़रों-नज़रों में रात कई,
इसीलिए आगे अब मैं हूँ बढ़ती,
ले साथ लिए सबकी नज़रें,
पर नज़रिया आज भी हूँ रखती,
मेरे ख्वाबों का, मेरे नजारों का…

There are a lot of issues Today's Woman is facing and I want to share her voice with you guys... Kindly read it.

Human eye speaks a lot and reads a lot. Sometimes it shows happiness, sometimes anger and sometimes grievances... It judges situation and other person. In India, girls are still in a misery and restricted condition. They do not have1