Yuva Abhyuday Mission (Hindi)

अँधियारा क्यों करता है आकर्षित,
आता है आनंद भूतिया कहानियों में,
परी कथा तो आजकल बच्चे भी नहीं सुनते,
बिना लोभ के काम की शुरुआत ही नहीं होती,
जो खिलाता है चॉकलेट, बच्चे भी उसे ही हैं चुनते।

तंत्र-मंत्र और डराने वाले ग्रह हैं हाई डिमांड में,
भगवत-भजन से क्या होगा,
जब पड़ोसियों के टोटके हैं कमान में।
संसार की छोड़ो, अपनों के लिए भी दुआ नहीं निकलती,
बस दूसरे का बुरा हो जाए... इसी सोच में जिंदगी है चलती।

बॉलीवुड का मसाला, पड़ोसी की बुराई,
भूतों की स्टोरी और सास-बहू की चुगली खाई,
फिर भी समय मिला तो नेताओं को कोसना,
और बाकी समय में सेल्फ़ी खेंच, सोशल मीडिया पर परोसना।

धार्मिक सीरियलों में भी इंद्र का अहंकार,
विद्वान् राक्षसों पर साज़िशी पलटवार,
शनिदेव के न्याय में दलित राक्षसों पर नेह,
राधा की चिता पर रोते कृष्ण का स्नेह।

शूरवीर के इतिहास में, प्रेमपाश के वार,
रसिक और बेवक़ूफ़ राजाओं की इतिहास में भरमार,
बुद्धिमान मंत्री से ज्यादा, मूर्खों की कहानी,
मीरां की भक्ति को कहते कि मीरां थी कृष्ण की दीवानी।

आख़िर क्या है जो बनेगा आने वाली पीढ़ी का आधार,
साजिशों से भरी संस्कृति और टोटकों से भरे विचार,
इसी से इतर आज युवा चाहता है शांति,
पर अपने में मदहोश हो फैला रहा है भ्रांति,
ख़ुश नहीं है वो, डरा हुआ है,
सच और झूठ को परख़ने से दूर खड़ा हुआ है,
कोई उसका मिसयूज ना करले,
ये सोच अनयूजफुल बना हुआ है।

ब्रेन है पर ब्रेन स्टॉर्मिंग से डरता है,
बचपन में मोबाइल, जवानी में लड़कियों पर मरता है,
'क्रांति' शब्द तो सिर्फ तनख़्वाह बढ़वाने,
और माँ-बाप को सुनाने के ही काम आता है,
गलती कोई उसकी बता दे,
तो मन गुस्से से भर जाता है,
करप्शन हटाने और आरक्षण रोकने में
वो है आगे,
पर कोई उसे ऐसी फैसिलिटी दे दे तो फिर
क्यों1



Pranaam to Guru Ji and Guru Maa (Hindi)

गुरू जी मेरे सरल-सुहृदय,
गुरु माँ चपल-चन्द्रिका सी,
गुरु जी शांत समुद्र विशाल,
गुरु माँ बहती गंगा सी।

गुरु जी सिखलाते जीवन,
पर जीवंत बनाती गुरु माँ ही,
गुरु जी ध्यान कराते हैं,
पर ध्यान रखती हैं गुरु माँ ही,
सारा रस, जीवन-तरंग,
हम तक पहुंचाती गुरु माँ ही,
मन से मिलते हम गुरूजी से,
साक्षात् करातीं गुरु माँ ही।

गुरू जी मेरे सरल-सुहृदय,
गुरु माँ चपल-चन्द्रिका सी...

गुरूजी मेरे ये हैं कैसे,
ये मुझे बतातीं गुरु माँ ही,
नित्य रात्रि करते इन्तजार,
पाती भिजवाती गुरु माँ ही,
हम सब पीछे श्री गुरूजी के,
सही राह सुझातीं गुरु माँ ही,
नैया पार कराते श्री गुरूजी मेरे,
पर उसमें छेद बतातीं गुरु माँ ही।

गुरू जी मेरे सरल-सुहृदय,
गुरु माँ चपल-चन्द्रिका सी...

आदर करते सब गुरूजी का,
पर लाड़ लड़ातीं गुरु माँ ही,
व्यक्तित्व बहुमुखी गुरूजी का,
जिसे पूर्ण बनातीं गुरु माँ ही,
गुरु जी-गुरु माँ को नमन मेरा,
गुरु तक पहुंचा दो गुरु माँ जी,
गुरु जी जैसे तो बन न सकेंगे,
स्वयं सा निर्मल बना दो गुरु माँ जी।

गुरू जी मेरे सरल-सुहृदय,
गुरु माँ चपल-चन्द्रिका सी...



Ashram Memories

Today I am telling you about a totally different destination for vacation, for knowledge gain, for knowing our culture as well as staying in a calm and natural environment. A destination where your kids will play freely and you can meditate there without children's worry. A destination where you will find members of different age groups, kids, youths, elders, old-age people, all. And everybody would be talking about development of nation, about technology, about linking spirituality with techn...