Indian Oldage Love (Hindi)

साठ पार कर चुके थे दौनों,
फिर भी कहासुनी सारी थी,
इक दूजे बिन रह नहीं पायें,
पर दौनों को ज़िद प्यारी थी।

ज़िद थी भी इतनी प्यारी,
जो करती थी रिश्तों को गहरा,
इक दूजे को समझते दौनों,
इसीलिए था पहरा।

पहरा था गहरा,
नहीं देतीं मिठाई उनको सीधे,
पर उनके हिस्से की फ़्रिज में,
छोड़ देतीं थी धीरे,
पर उनके खा लेते ही,
मचता रोज़ बवाल,
साठ पार खाते हो मिठाई,
होगा तुम्हारा क्या हाल,
अब जाओ दौड़ने और
पीछे से मैं भी आती हूँ,
कहीं बीच में बैठ ना जाओ,
पूरा पता लगाती हूँ।

पता लगा लो तुम पूरा,
और पीछे मेरे आओ,
जो साठ पार मिठाई तुमने खाई,
उसको तुम भी पचाओ,
आख़िर तुम बिन कोई नहीं अब
इस दुनिया में मेरा,
तेरी ज़िदों के बिना
नहीं पचेगा खाना मेरा।

अच्छा तो ये प्यार नहीं,
इसमें भी तेरा स्वार्थ,
जो कोई और होता दुनिया में
तो करते भी नहीं बात।

करता नहीं जो बात,
तो क्या तुम चुप हो जाती,
सालों हो गए सुनते,
बस तुम अपनी गातीं,
कभी ज़बरन काम पर भेजतीं,
देकर गाली हज़ार,
रोज़ नई चीज़ों की फ़रमाइश,
इतना ही था प्यार।

हाँ इतना ही था प्यार,
बनाया तुमको लायक़,
घर संसार बसाया तेरा,
पर तुम तो रहे खलनायक,
जो भी ख़रीदा, तेरे लिए था,
नहीं अपने लिए बचाया,
फिर भी देखो तुमने मुझको,
इतना कुछ है सुनाया,
जो इतनी बुरी थी लगती,
तो क्यूँ रोज़ गज़रा थे लाते,
क्यूँ कम पैसों में भी तुम
मुझको हर वीक घुमा कर लाते।

लाता था हर वीक घुमा कर,
और तेरे लिए गज़रा,
ठंडी रहे तू, सजी रहे तू,
ये ही स्वारथ बस था,
पर मेरे प्यार को तू समझ ना पाई,
हाय री मेरी क़िस्मत,
हो चला हूँ बुड्ढा, अब तो बक्श दे,
मौत दे रही दस्तक।

मौत दे दस्तक दुश्मन के,
मैं सदा1



Desire - Chahat (Hindi)

जिस डगर से हम निकलें,
कारवां साथ हो ले,
जिस सफर पे जाएँ,
फलसफे लिखे जाएँ,
बंजर जमीन हो तो,
फसल लहलाये,
जो छू लें रेत को तो,
सब सोना बन जाए,
इतना करें करम कि,
पूछे प्रभु भी हम से,
बोल ऐसा है क्या,
जो तेरे क़दमों में रखा जाये....



Shreshthta :: Excellence (Hindi)

हाँ मैं एक मानव हूँ और लड़ती हूँ...
कभी ये लड़ाई मेरी अपने आप से होती है, तो कभी अपने परिवार से,
तो कभी परिवार के लिए मैं लड़ रही होती हूँ, अपने दूर के रिश्तेदार से।
कभी अपने कर्मों से, अपने वृहत परिवार की श्रेष्ठता साबित करती हूँ ,
तो कभी अपनी जाति की महानता के लिए धर्म के कार्य करती हूँ।
कभी अपने नगर की प्रतिनिधि बन, दिखाती हूँ नगर का जोश,
कभी दुश्मन देश के नापाक इरादों पर प्रकट करती हूँ मन का रोष।
कभी देशहित में आने लगते हैं मेरे मन में विचार,
तो कभी प्राकृतिक आपदाओं में मेरा हो जाता है पूरा संसार।
कभी देशवासियों की विजय पर बजा रही होती हूँ ताली,
तो कभी विज्ञान की नई खोज पर कर रही होती हूँ आँखों से आँसू खाली।
हाँ मैं लड़ती हूँ और स्वयं को श्रेष्ठ साबित करती हूँ...
कभी स्वयं में, तो कभी समूह में, तो कभी-कभी सम्पूर्णता में।
पर हाँ मेरे प्रयास होते हैं ‘श्रेष्ठता’ की ओर...
और जब आप सच्चे मन से सही शब्दों में ‘श्रेष्ठ’ बन रहे होते हैं,
तो आप अपने और सम्पूर्ण मानव जाति के काम आते हैं,
किसी को मन-कर्म-वचन से हानि नहीं पहुँचाते...
आप बस विकसित होते हैं... और विकसित करते हैं।
तो आइये आप सभी आइये,
इस ‘श्रेष्ठता की दौड़' में मेरे साथ आइये,
मुझे पीछे छोड़ आगे जाइये...
क्यूँकि आप जीतें या मैं, उद्देश्य पूरा होगा मेरा ही...
क्यूँकि मैं एक मानव हूँ और लड़ती हूँ...
ये सबसे प्यारी ‘श्रेष्ठता की दौड़'।



Mera Bhagya, Mera Karm (Hindi)

नहीं-नहीं तुम नहीं हो नाथ, नहीं हो मेरे ईश्वर,
नहीं-नहीं तुम नहीं हो नाथ, नहीं हो मेरे ईश्वर।

बचपन से जो मेरे साथ खेला, मेरे साथ जागा और मेरे साथ सोया,
जिसने मुझे बढ़ाया और जीवन-दर्शन सिखलाया,
रास्ते में रोड़ा बन वो अड़ा नहीं, मेहनत करने पर वो जड़ा नहीं,
वो मेरे साथ रहा, मेरी हंसी में हँसा और मेरे दुःख में रोया,
जिसने मेरी हार पर मुझे संभाला और अगली जीत की ओर बढ़ाया,
जो संसार की सारी खुशियां, मेरे लिए बटोर कर लाया,
वो तुम न थे, कोई और था...

और जो तुम कहते हो खुद को ईश्वर,
तो तुम तब कहाँ रूठे थे,
जब पुकार रही थी मैं, झूझ रही थी इन तूफानों से,
जब सामना हो रहा था मेरा मौत से,
तब तुम किसी और पर मेहरबानी बरसाने में व्यस्त थे,
पर तब भी जो मेरे साथ था, वो तुम न थे, कोई और था...

और आज भी जिंदगी के इस मोड़ पर,
ओ भाग्य के छल-देवता ! क्या भरोसा, फिर छल जाओ,
आज साथ दो, तो कल वापिस न आओ,
लेकिन, मेरा कर्म मेरे साथ था, है और रहेगा,
वो मेरा है, तो मुझसे दूरी कैसे सहेगा,
मेरे जन्म से, मेरी मृत्यु तक और उसके बाद भी...
मेरे समस्त यश-अपयश, वेदना-संवेदना का कारण,
ईश्वर का दिया वो उपहार, जो मेरे हाथ में है,
वो तुम नहीं, कोई और है...

वो हाथ की लकीरों में नहीं, पर मेरे हाथ में है,
वो माथे की तकदीरों में नहीं, पर उससे बहते नमक के स्वाद में है,
वो मुझे जीने का और जी जाने का सुकून देता है,
वो मुझे कुछ कर जाने का जूनून देता है,
न वो खुद रुकता है, न मुझे रुकने देता है,
लेकिन भला ये है कि मुझे कभी नहीं झुकने देता है,
इसीलिए तुम नहीं हो मेरे नाथ... नहीं हो मेरे ईश्वर।1



Atal :: Expressions of Heart (Hindi)

बालपन से तरुणाई,
और तरुणाई से जवानी,
हर कदम पिछले से आगे,
यादगार और मुश्किल,
फिर घिरी हूँ संघर्षों में,
पहले से और सघन हैं ये बादल,
पर यकीन है बरसेगा सावन,
यकीन होता जा रहा है,
खुद पर और ईश्वर पर,
वो न हारेगा, न हारने देगा,
संघर्ष मेरी नीयती है,
और उससे बाहर लाना,
ईश्वर का फैसला,
और मैं मेरे संघर्ष पर और ईश्वर अपने फैसले पर,
अटल हैं और रहेंगे।