Kaisa Saal (Hindi)

जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है,
कहीं कोरोना, कहीं अम्फान,
तो कहीं टिड्डियों का बवाल है।

वक्री सारे ग्रह बैठे हैं
मित्र भी शत्रु बन बैठे हैं,
दांव लगी है मेहनत सारी,
पैसों का भी सवाल है,
जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है।

खर्चे सिर चढ़ कर बोले हैं,
उधारी के फंदे घोले हैं,
फिर भी नहीं फ़िकर है उनकी,
क्योंकि जान खुद ही बेहाल है,
जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है।

आपद का अम्बार लगा है,
नहीं कोई व्यापार चला है,
तंगी-भूख-मंदी से घिरे हैं,
सबकी बिगड़ी चाल है,
जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है।

लगता है दुनिया डूबेगी,
आधी आबादी न रहेगी,
ऊपर से नीचे तक खुलता,
बड़ा काल का गाल है,
जाने ये कैसा साल है,
सबका बुरा सा हाल है।



Jara Si Baat... (Hindi)

ज़रा सी बात थी और...
मैंने मन में सोच सोच उलझा लिया
मैं चाहती थी कि तुम सुलझाओ,
पर सच में उलझन कहाँ है,
ये क्या जान पाते तुम,
पर तुम्हारी चाहते हुए भी,
ना कि गई कोशिश से,
मेरे ग़ुस्से ने जो उस पर ताला लगाया,
उसने मुझे अब बहुत दूर ला दिया,
ज़रा सी ही तो बात थी...

मैं जानती हूँ,
तुम ग़लत नहीं, अनजान थे,
और मैं परेशान,
बस बिन कहे क्यूँ नहीं समझ पाए तुम?
ज़रा सी ही तो बात थी...

अब चाहती हूँ,
जो हुआ उसे भुला आगे बढ़ जाना,
पर क्या तुम आज भी दोगे मेरा साथ?
फिर उलझ रही हूँ अपने सवालों में,
अपने ही मन में,
क्यूँ नहीं ख़ुद से खोल देती,
मेरे मन की गाँठें,
क्यूँ नहीं तुम्हें बोल देती,
जो मेरा मन चाहे,
आख़िर ज़रा सी ही तो बात थी...



Pita ka Dard (Father's Pain) (Hindi)

बचपन से तेरी जवानी तक,
तुझे पाला-पोसा बड़ा किया,
बाइक से मोबाइल तक,
तेरी हर ख्वाहिश को मैंने जिया,

तूने माँगा चाहे मना किया,
पर मैंने अपना बेस्ट दिया,
तेरे पहले बिज़नेस से ले,
हर फैसले तक,
तेरी जीत से जीतकर,
तेरी हार में हारकर,
कभी समझाकर, कभी डांटकर,
अपने मन से तुझे सही किया,

और आज तू कहता है पापा!
तुम समझे नहीं मुझे, मैंने क्या चाहा...,
तुम अपनी इच्छा थोपते रहे मुझपर...,
और मुझपर ना कभी यकीं किया...,

अरे बेटा! चिर गया दिल मेरा,
कब साथ तेरे मैं रहा ना खड़ा,
कब तुझको रोका कुछ करने से,
कब परिवार का बोझ मैंने पड़ने दिया,
और आज तू कहता है पापा,
तुमने मुझपर न यकीन किया...,

मेरी हार में, बीच मझधार में,
समय की मार में, चाकू की धार में,
वो ताकत ना थी, जो तेरे 'पापा' को चीर देती,
पर तेरे शब्दों ने आज ये एहसास कराया,
कि तू अब बड़ा हो गया है और मैं पुराना,
शायद इसे ही कहते हैं बदला ज़माना,

'सॉरी बेटा'!!
बस ये शब्द तुझे कभी यूज़ न करने पड़ें,
ये दुआ है मेरी,
अलविदा सयाने बेटे,
अब ये जिंदगी है तेरी।



Adhoori Khwahishen... (Hindi)

जिंदगी में जरुरी नहीं कि हर ख्वाहिश पूरी हो,
कोई जरुरी नहीं कि हर रात नूरी हो,
वो तो नजरिया इंसां का है, जो है उसे देखता,
बदलता, ढालता, ढलता और सहेजता,
अंधियारे में सायों से ही वो बनाता नए चित्र,
अधूरी ख्वाहिशों में भी भरता रहता रंग विचित्र,
इन्हीं चित्रों में ढूंढ ख़ुशी, पूरी करता ख्वाहिशें,
क्या हुआ ख्वाहिशें बदलीं और मिल गई नई मंज़िलें,
जो ख्वाब पूरे न हों तो उनके पीछे क्या भागना,
ख्वाब लो तुम बदल अपने, जिंदगी जी लो यहाँ,
ना बीते पर बस है अपना, ना आने वाले का यकीं,
जी सको तो जी लो हर पल, मानो जैसे ये ही है आखिरी,
लाख गम हैं जमाने में, मैं क्यूँ दूँ इक और मिला,
कारवां क्यूँ न शुरू कर दूँ, अपना मैं इक कदम बढ़ा,
फ़लसफ़े तो बन ही लेंगे, जब दिल में है इतना हौसला,
सारे ख्वाब भी पूरे होंगे, बस अब शरू है सिलसिला,
आँख मेरी आज नम है, दिल में है छाया ज़लज़ला,
चंद अधूरी ख्वाहिशें, चुभती हैं दिल में, करतीं गिला,
कर दूंगी उनको भी मैं ठंडा, अपनी नज़मों के रंग मिला|



Aaj Man Khamosh Hai... (Hindi)

आज मन खामोश है, तो क्या ख़ामोशी में खनकार न होगी,
आज कलम भी रुकी हुई है, तो क्या रुकी कलम से बात न होगी,
आज रात में है बहुत अँधेरा, तो क्या उजियारे की आस न होगी,
आज सुस्त है कवि मन मेरा, तो क्या कविता की बरसात न होगी,
आज हूँ तनहा गुमशुदा सी, तो क्या खुद की कोई तलाश न होगी,
आज सोच रही हूँ कि मैं क्या हूँ, तो क्या खुद से मेरी मुलाकात न होगी,
बहुत दूर हूँ साहिल से तो क्या, मझधारों में कोई बात न होगी।



Andhi Galiyan (Hindi)

अंधी गलियां,
जिन्हें नहीं मिलती कोई चौड़ी सड़क,
ग़ुम हो जाती हैं,
जाकर चंद दरवाजों पर,
जो अपनी ही अकड़ में,
खुलने से मना कर देते हैं,
और फिर एक दिन,
बाढ़ के पानी से तरबतर हो,
खुद भटक औरों को भी भटका देती हैं ये - अंधी गलियां।



Two Liners (Hindi)

कोई क्या इतने प्यार से भी रो जाता है,
जो उसकी हर आह पर वाह ही निकल पाता है,
सुनती हैं दीवारें, पर क्यूँ आज इन्सान चुप है,
पूछता है वो कि क्या दीवारों से भी कुछ कहा जाता है।


कोई प्याला हो तो पी के भी मैं ख़ुश हूँ यारों,
मरी दुनिया में ऐसे ही जिया जाता है,
वो साँस ही क्या, जिसमें आवाज़ ना हो यारों,
इसीलिए मरते दम तक ऐसे ही पिया जाता है।


पसंद जब चाहत बने और चाहत बने जूनून,
तब दिक्कत बढ़ जाती है, जब पल को नहीं सुकून।
सुकून ढूँढू मैं गलियों में, सुकूं तो मन का मोर,
ज्यूँ चकोर उड़ता फिरे, ढूंढे चाँद चहुँ ओर।


औरों से अब क्या कहूँ, कैसे कहूँ मैं बात,
खुद में ही खामोश हूँ, मन में है उल्लास।


मितवा तुम किसी और के, नहीं करते मुझसे बात,
कल जाकर ले आये तुम, उसके लिए सौगात।


फ़ुरसत के दो लम्हे जिंदगी में मिलें... तो शायद मर जाएँ...
एक नज़र वो हमें और हम उन्हें देख लें, तो शायद प्यार कर जाएँ।



Meri Har Muskurahat Ke Peeche... (Gazal) (Hindi)

मेरी हर मुस्कुराहट के भी पीछे आह होती है,
मुझे गम है क्या, इसकी किसे परवाह होती है,
मैं रातों को नहीं सोता, मैं डरता हूँ क्यूँ ख्वाबों से,
न जाने क्यूँ मेरे जगने की भी अब वाह -वाह होती है।

हर महफ़िल की रौनक हूँ, तो क्यूँ ज़हनी है खालीपन,
क्यूँ उठता है धुआं बिन आग, भीतर से जलाता है,
जब रहता हूँ मैं गुमसुम-गुमशुदा सारे नज़ारों में,
तो क्यूँ हर नज़र, हर सफ़र में मेरी ही बात होती है।

अब तो आदत सी हो गई है मुझे भी मुस्कुराने की,
किसे परवाह मेरे गम की, तो क्या ज़रूरत दिखने की,
पर रातों को जो सोता हूँ तो उसकी याद होती है,
जो सोने नहीं देती, ऐसी कुछ बात होती है।

मेरी हर मुस्कुराहट के भी पीछे आह होती है,
मुझे गम है क्या, इसकी किसे परवाह होती है|



Khar (Enmity) (Hindi)

बहुत ख़ार है तेरे भीतर, कुछ ख़ार यहाँ है बाकी,
लहरें-तूफ़ां अनेकों, मेरे मन के भी ये साथी।
इतने तूफानों में भी, है मौन खड़ा तू जैसे,
वैसी ही मौन हूँ मैं भी, पर शांत कहूँ मैं कैसे ...

ये हवा नहीं, ना ही मौसम, जो मन को हिला-मिला दें,
कुछ रिश्तों के बंधन हैं, जहाँ शिकवे और गिला हैं।
तुझसी नहीं बलशाली, जो सबको मैं अपना लूँ,
या तो अपने रंग में रंग दूँ, या छोड़ कर उन्हें दया दूँ ...

फिर भी शांति की तलाश, ले आई मुझे यहाँ आज,
उमड़े-घुमड़े और बरसे मेरे बादल, पिघल गई मैं आज,
आँखों से आँसू बन निकला, ख़ार मिला तुझ भीतर,
तेरे मौन से मेरे मौन को मिले अनेकों उत्तर...
तेरे मौन से मेरे मौन को मिले अनेकों उत्तर।



A few lines by Heart (Hindi)

कभी-कभी खुद के अन्दर की ख़ामोशी सुनने के लिए ज़िन्दगी का शोर ज़रूरी होता है,
कभी-कभी एक लम्हा जीने के लिए सदियों तक हर रोज़ मरना ज़रूरी होता है,
क्या चाहा... क्या पाया... इसका हिसाब करने के लिए कभी-कभी फ़कीर होना ज़रूरी होता है,
और ...
जीत और हार दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं...
इसीलिए ...
किसी को जिताने के लिए कभी-कभी अपना सब कुछ हार जाना ज़रूरी होता है......