Hum Paudhe (Hindi)

खरपतवार की तरह उगे हुए थे
हम जंगल के पौधे,
मज़ा बड़ा था, बस डरते थे,
कोई हमें नहीं रौंदे,
उस खुले अल्हड़ बचपन को हटा
किसी ने सभ्यता सिखलाई,
हाँ, निखारा व्यक्तित्व को मेरे
और नई जमीन दिखलाई,
आज सभ्य हूँ, सही जगह हूँ,
देती आश्रय सबको,
पर वो मासूमियत-अल्हड़ता चली गई,
ढूंढ़ रही मैं जिसको,
पूर्णता तो कभी नहीं थी,
बस तब था अबोध मन प्यारा,
अब संकटों से झूझता सा जीवन,
जग कहता इसे अनुभव हमारा।



Thank You God (Hindi)

धन्यवाद

जब जब मैंने खुद को सेवाकार्य में रत कुछ महान पाया,
धन्यवाद हे प्रभु! तुमने मुझसे महान सेवादार दिखलाया,
जब लगा तेरी भक्ति में लीन मैं कोई साधवी हो गई,
तो धन्यवाद प्रभु! पुनः मोह में फँसा, मेरा भ्रम हटाया,
जब लगा कुछ नया खोज पाई इस जगत में,
धन्यवाद प्रभु! तुमने पहले किये गए शोध को पढ़वाया,
जब लगा संसार में सबसे अनोखी प्राणी हूँ मैं,
तो तुमने मुझसे अनोखे प्राणियों से मिलवाया
और तो और जब सबसे दुःखी होने का आभास हुआ,
तो धन्यवाद कि तुमने तभी मुझसे ज्यादा पीड़ित दिखलाया,
धन्यवाद कि मैंने सदा अकेले चलना चाहा
और तुम किसी न किसी रूप में मेरे साथ चलते रहे,
मुझे लगा कि मुझे कोई नहीं सुन रहा,
पर तुम हमेशा मुझे सुनते रहे,
हर बाधा से निकाला, हर परीक्षा में सफल कराया,
कभी दिया सबक और कभी बिखरा दी अपनी माया,
धन्यवाद हे प्रभु! मुझे एक बहुत ही आम सा खास जीवन देने के लिए
और धन्यवाद मेरा ये धन्यवाद सुन लेने के लिए।



Pita ka Pyar (Father's Love) (Hindi)

# एक जंगल ऐसा भी

बड़े प्यार से किसी पिता ने
बेटे जी के सुख की ख़ातिर
बना दिया है प्यारा जंगल
ताकि बच्चे छोड़ें दंगल।
कहीं पे बंदर, कहीं बघेरा,
कहीं डला है शेर का डेरा,
कहीं पे हाथी, कहीं हिरण है,
नदी में पड़ती सूर्य किरण है।
जुगत लगा कर, चीज़ बचा कर,
जोड़-तोड़ कर बना है सारा,
प्यारे बच्चे भूल भी जायें,
याद रखेगा बाप हमारा।
माँ की ममता अपनी जगह है,
बाप के प्यार का नाम नहीं है,
सारे दिन की थकान के बाद,
रातों को उसका काम यही है।
गुमनामी ही उसे मिलेगी,
भूल जाएंगे इस प्यार को इक दिन,
याद रखेगा परमपिता पर,
उसके प्यार को तारे गिन-गिन।



Diye Ki Lau (Hindi)

दिये की लौ

दिये की लौ,
मेरे मनोभावों सी,
कभी अदम्य,
कभी वो मद्धम,
कभी चंचल अनुरागों सी,
कभी खुद जलती,
कभी जलाती,
कभी विरक्ति दर्शाती सी,
चाहे जो, चाहे हो जैसी,
पर सदा प्रकाश फैलाती सी,
उज्ज्वल सी वो,
निर्मल सी वो,
ईश्वर के लिए स्थान बनाती सी,
निराश मन में,
आशा भर दे,
ऐसी कान्ति बिखराती सी,
दिये की लौ,
मेरे मनोभावों सी,
जैसी हूँ,
वैसा दिखाती सी।



Sapna (Hindi)

शब्दजाल


मेरा सपना मैं सुना सकती हूँ,
पर मेरी सपना को मैं सुना सकती नहीं।
मेरा सपना खुली आँखों से दिखता नहीं,
पर मेरी सपना को मैं,
आँखों में ही छुपा सकती नहीं।
मेरा सपना सब कह देता है,
पर फिर भी चुप ही रहता है,
मेरी सपना कभी कुछ कहती नहीं,
पर चुप तो वो रहती भी नहीं।
मेरा सपना तो मेरा ही अपना है,
मुझमें समाया, मुझमें जन्मा,
मेरी सपना मुझसे भी आगे है,
फिर भी है मुझसे ज्यादा मेरी,
मेरा सपना तो अजनबी है लेकिन,
मेरी सपना तो है मेरे सपने जैसी।
शब्दों का मायाजाल यहाँ,
है भँवर बड़ा जंजाल यहाँ,
जब सपना है मेरा पुरुष साथी,
तो क्यूँ उसमें स्त्री ध्वनि आती,
क्यूँ सपना मुझको आता है,
और मेरी सपना है चल आती।



Phool Aur Taare (Hindi)

रोज़ भोर होते ही छुप जाते हो,
ऐ तारों सुबह-सुबह कहाँ जाते हो,
खिल रहे हैं फूल मेरी फुलवारी में,
कहीं वो ही बनकर तो न आ जाते हो,
देखा है मैंने बन्द होते फूलों को शाम में,
और तभी तुम्हें लुक-छिप कर वापिस आते,
अच्छा मेरा इक काम करना,
उस चमकते चाँद को बोलना,
उगाया है कमल भी इसी बगीचे में मैंने,
पर वो अभी तक खिला नहीं,
जो चाँद कमल बन आये,
तो शायद वो भी खिल जाये,
और कल की बीती रात की तरह,
मेरी फुलवारी भी पूरी हो जाये।



Yaaden (Hindi)

मेरे अक्स का दीदार कर मैं शरमा गई,
आईने में देख तेरी कोई बात याद आ गई,
बस यूँ ही देखते, खुद को सँवारते,
पता नहीं कब सुबह बीती,
और तुझसे मिलने की घड़ी आ गई,
मिलना तो था,
पर जमीं में कदम धँस गए,
जब तेरी फ़ोटो पर चढ़ी माला के फूलों में,
मेरी चुनरी के तार फँस गए।

रोती भी हूँ और चुप होती भी हूँ,
कभी तेरे जाने को सोचकर, कभी तेरे होने को जानकर...



Friendship Day (Hindi)

आज अपने पुराने दोस्तों से मिलने गई थी....
ना आँख में काजल डाला था
ना कान में पहनी थी बाली
एक पुरानी जींस और शर्ट मैंने डाली
ना सेल्फ़ी खिंचवानी थी
ना मेक-अप से ख़ुद को छिपाना था
मैं जैसी थी, मैं जो भी थी
वैसे ही मिलने जाना था
मिलना था मेरी रूहों से
जिनकी रूहों में मैं थी बसी
कुछ उनकी सुनके आना था
कुछ अपनी कहने जाना था
जो सोचा उससे ज़्यादा मिला
आज लगा की फिर मैं पूरी हुई
शुक्रिया मेरी उन रूहों का
जो आज फिर मुझ में आ मिलीं
ना नक़ाब था, ना कोई पर्दा
बस बातों में हम घुलते गए
कुछ कहते गए, कुछ सुनते गए
मन की परतों को चुनते गए
ना शिकवे किए
ना वादे किए
बस जो मन में था
वही बातें किए
जब चुप हो गए
तो थोड़ा रो गए
और फिर हँस लिए
और हम चल दिए
और यूँ इस तरह
आज फिर पूरा हुआ
दोस्ती का ये फ़र्ज़
आज दोस्ती के दिन।



Indian Oldage Love (Hindi)

साठ पार कर चुके थे दौनों,
फिर भी कहासुनी सारी थी,
इक दूजे बिन रह नहीं पायें,
पर दौनों को ज़िद प्यारी थी।

ज़िद थी भी इतनी प्यारी,
जो करती थी रिश्तों को गहरा,
इक दूजे को समझते दौनों,
इसीलिए था पहरा।

पहरा था गहरा,
नहीं देतीं मिठाई उनको सीधे,
पर उनके हिस्से की फ़्रिज में,
छोड़ देतीं थी धीरे,
पर उनके खा लेते ही,
मचता रोज़ बवाल,
साठ पार खाते हो मिठाई,
होगा तुम्हारा क्या हाल,
अब जाओ दौड़ने और
पीछे से मैं भी आती हूँ,
कहीं बीच में बैठ ना जाओ,
पूरा पता लगाती हूँ।

पता लगा लो तुम पूरा,
और पीछे मेरे आओ,
जो साठ पार मिठाई तुमने खाई,
उसको तुम भी पचाओ,
आख़िर तुम बिन कोई नहीं अब
इस दुनिया में मेरा,
तेरी ज़िदों के बिना
नहीं पचेगा खाना मेरा।

अच्छा तो ये प्यार नहीं,
इसमें भी तेरा स्वार्थ,
जो कोई और होता दुनिया में
तो करते भी नहीं बात।

करता नहीं जो बात,
तो क्या तुम चुप हो जाती,
सालों हो गए सुनते,
बस तुम अपनी गातीं,
कभी ज़बरन काम पर भेजतीं,
देकर गाली हज़ार,
रोज़ नई चीज़ों की फ़रमाइश,
इतना ही था प्यार।

हाँ इतना ही था प्यार,
बनाया तुमको लायक़,
घर संसार बसाया तेरा,
पर तुम तो रहे खलनायक,
जो भी ख़रीदा, तेरे लिए था,
नहीं अपने लिए बचाया,
फिर भी देखो तुमने मुझको,
इतना कुछ है सुनाया,
जो इतनी बुरी थी लगती,
तो क्यूँ रोज़ गज़रा थे लाते,
क्यूँ कम पैसों में भी तुम
मुझको हर वीक घुमा कर लाते।

लाता था हर वीक घुमा कर,
और तेरे लिए गज़रा,
ठंडी रहे तू, सजी रहे तू,
ये ही स्वारथ बस था,
पर मेरे प्यार को तू समझ ना पाई,
हाय री मेरी क़िस्मत,
हो चला हूँ बुड्ढा, अब तो बक्श दे,
मौत दे रही दस्तक।

मौत दे दस्तक दुश्मन के,
मैं सदा1



Ankahe Ansune Sawal (Hindi)

जब कुछ नहीं तो क्यूँ बोलती हैं तेरी निगाहें...
करतीं हैं मुझसे दो-चार बातें,
जुबां तेरी भी चुप है, जुबां मेरी भी चुप है,
तो कैसे बोलते-बोलते कटती हैं रातें...

मेरे हर सवाल पर तेरी खामोशी कहती है,
मैं नहीं तेरा, तू नहीं मेरी...
तो फिर भी क्यूँ ये लगता है कि जैसे चोरी से,
तेरी इज़ाजत के बग़ैर...
करने लगती हैं, तेरी निगाहें कई बातें...

क्यूँ आ जाती है शऱारत तेरे मन में,
जो सामने मैं हूँ होता...
क्यूँ लगती है तू मुझे मेरी हमदम, मेरी छाया...

क्या ये मोहब्बत है... मेरे मन की..., मेरे मन में...,
या सच में तू भी उसी पशोपेश में है... जहाँ मैं हूँ...,
और चाहती है तू भी जानना उत्तर...
चंद उन अनकहे-अनसुने सवालों के।



Tarang :: Be Live (Hindi)

आज ज़रा गाड़ी को रहने दो गैराज़ में,
कि दिल पैर निकालने को कर रहा है,
आज ज़रा मोबाइल को फिक्स्ड कर दो,
कि मन कुछ कहने को मचल रहा है।

आज कोई ना चलाओ एसी. ,
कि वादियों की खानी हैं हवाएँ,
आज सब इयरफोन निकाल दो,
और सुनो जो भँवरे गुनगुनायें।

आज कोई टीवी को बंद कर दो,
कि मुझे है तुमसे दो बात करनी,
आज कोई दिन में ना सोने जाओ,
कि दिखानी है मेरे सपनों की जरनी।

आज सब फेसबुक को भूल जाओ,
कि लाइव देखना है फेस तुम सबका,
आज सब बंद कमरों से बाहर आओ,
चलो मिलकर करें मन हल्का।



Hanson Ka Joda :: The Swans (Hindi)

हंसों का जोड़ा

यूँ ही एक दिन टहलने गई जब मैं सागर किनारे,
आसमां में उड़ता देखा एक हंसों का जोड़ा।

आँखों में उमंग, पंखों में शक्ति, मन में था साहस,
उस अथाह जलराशि से टकराने का,
अठखेलियाँ करते एक-दूसरे के आगे-पीछे,
चले जा रहे थे वे निरंतर अपने लक्ष्य की ओर।

कि तभी बोझिल होने लगी हंसिनी की चाल,
ख़त्म होने लगी उसके पंखों की शक्ति,
एक पल के लिए खो बैठी वो अपनी चेतना,
और जाने लगी उसी अथाह जलराशि में विलीन होने,
जिससे टक्कर लेने का प्राण उन दौनों ने लिया था कभी...

पर जैसे ही हंस ने पाया अपनी प्रिया को काल के गाल में जाते,
रोक न पाया...
अगले ही पल एक नीची उड़ान भर,
ले आया अपनी जीवन-तरंग को अपने पंखों पर बिठा...
उड़ता रहा उसे भी अपने साथ लेकर,
बिना सोचे कि कभी तो उसकी भी हार होगी...
जब न वो बच पायेगा और न उसकी प्रिया।

तभी लौट आई उस हंसिनी की चेतना,
अपने प्रिय को अपने समीप पाकर...
भूल गई उस लील जाने वाले शान्ति के कोलाहल को,
जो निगलने को आतुर था, उस नन्हें बेज़ान पंछी को,
अपने प्रिय की बाहों ने दी उसे पूरे संसार की ऊर्जा,
और फिर चल पड़ी वह, उसी के पीछे, उसी उमंग से,
जिस उमंग के साथ उन दौनों ने शरू की थी वो यात्रा।

मैं जितनी दूर तक देख पाई, दोनो उड़ते रहे,
देते हुए एक-दूसरे को सहारा...
बनते हुए अपने साथी की शक्ति,
पता नहीं वे अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाए या नहीं...
पर अनायास ही मेरे हाथ जुड़ गए,
करने लगी नमन मैं उन देवदूतों को,
जिनके अगाध प्रेम की शक्ति और कर्मठता,
दे रही थी प्रेरणा सम्पूर्ण मानव-जाति को,
जो अपने तुच्छ स्वार्थ की ख़ातिर,
दूसरे को मिटाने के लिए,
ख़ुद मर-मिटने को तैयार रहती है।

इतना सोचते-सोचते ही1



Khushi :: Happiness (Hindi)

पंछी की तरह उड़ने में, कूद-कूद कर चलने में,
आता है कितना मज़ा ओ प्रभुजी।
इसीलिए रोज़ फुदक-फुदक मैं आती हूँ तेरे द्वारे,
कि हे प्रभुजी! ऐसे ही मुझे फुदक-फुदक आने देना,
कूद-कूद चलने देना,
क्योंकि जो मज़ा इंसान बनकर फुदकने में है,
वो चिड़िया बन उड़ जाने में कहाँ।
चिड़िया बनकर तो कोई भी उड़ सकता है,
पर इंसान बन, हर कोई कहाँ फुदक पाता है।
इसीलिए हे प्रभु! मुझे यूँ ही इंसान बने फुदकते रहने देना,
चिड़िया सा मत बना देना।



Two Liners (Hindi)

कोई क्या इतने प्यार से भी रो जाता है,
जो उसकी हर आह पर वाह ही निकल पाता है,
सुनती हैं दीवारें, पर क्यूँ आज इन्सान चुप है,
पूछता है वो कि क्या दीवारों से भी कुछ कहा जाता है।


कोई प्याला हो तो पी के भी मैं ख़ुश हूँ यारों,
मरी दुनिया में ऐसे ही जिया जाता है,
वो साँस ही क्या, जिसमें आवाज़ ना हो यारों,
इसीलिए मरते दम तक ऐसे ही पिया जाता है।


पसंद जब चाहत बने और चाहत बने जूनून,
तब दिक्कत बढ़ जाती है, जब पल को नहीं सुकून।
सुकून ढूँढू मैं गलियों में, सुकूं तो मन का मोर,
ज्यूँ चकोर उड़ता फिरे, ढूंढे चाँद चहुँ ओर।


औरों से अब क्या कहूँ, कैसे कहूँ मैं बात,
खुद में ही खामोश हूँ, मन में है उल्लास।


मितवा तुम किसी और के, नहीं करते मुझसे बात,
कल जाकर ले आये तुम, उसके लिए सौगात।


फ़ुरसत के दो लम्हे जिंदगी में मिलें... तो शायद मर जाएँ...
एक नज़र वो हमें और हम उन्हें देख लें, तो शायद प्यार कर जाएँ।



Haan Main Tumhaare Liye Kuch Nahi Laai Hun (Hindi)

आँखों में जुगनू, मुट्ठी में धूप भर के लाई हूँ,
हाँ, मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं लाइ हूँ ...

अपनी सारी दुआएं, किस्मत के सारे तारे लाई हूँ,
हाँ, मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं लाइ हूँ ...

पहली बारिश की ख़ुशबू, अपनी पहली गुड़िया लाई हूँ,
हाँ, मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं लाइ हूँ ...

अपने अनदेखे सपने, सारी हँसी लाई हूँ,
हाँ, मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं लाइ हूँ ...

जिन किताबों में लिखा था तुम्हारा नाम और ईद का चाँद, लाई हूँ,
हाँ, सही कहा तुमने...... मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं लाइ हूँ ...



Pita Aur Ishwar (Father and God) (Hindi)

तेरा तेरे नन्हे क़दमों से चल,
पापा की गोद में चले जाना,
और प्यारी सी मुस्कान से,
अपनी विजयगाथा को सुनाना,
वो मम्मी-पापा की पकड़ पर तेरा यकीं,
कि हवा में पैर रखने से भी तू अब डरती नहीं,
तुझे पता है कि वो हैं यहीं-कहीं,
तेरे हर गलत कदम को, सही दिशा पाने का यकीं,
और क्या जो गिर भी गए तो …
एक किलकारी और मम्मी की गोद प्यारी-प्यारी,
हाय ये बचपन …
कितना उन्मुक्त, कितना प्यारा,
ना फिक्र, ना कोई गम और जीवन प्यारा-प्यारा|

काश ता-उम्र हम ईश्वर पर भी कर पाते यही विश्वास,
तो हँसते ही रहते जब तक रहती तन में श्वाश,
करते तो हम भी हैं वही...
दो कदम चलने पर, अपनी विजयश्री का यकीं,
फिर सुनाते हैं अपनी विजयगाथा,
और रो-रो कर बुलाते हैं ईश्वर को,
जो जीवन में कोई तूफ़ान आता,
लेकिन बस वो यकीं नहीं दिखा पाते,
हर कदम को थामेगा ईश्वर,
ये सोच ही नहीं पाते,
सोचो …
उस ईश्वर को भी होती होगी कितनी ख़ुशी,
हमारे हर सही फैसले पर हमारे बड़े होने का यकीं,
और बड़े हो अपनी दुनिया में मगन,
और ईश्वर को भुला दिए जाने का गम भी,
लेकिन कोई नहीं...
वो जानता है...
फिर इक तूफां आएगा,
जब याद उसे किया जाएगा,
और बिना किसी बैर, किसी स्वार्थ के,
इक पिता की तरह ही वो हमें बचायेगा …
वो शर्तिया हमें बचाएगा…